2023 मणिपुर हिंसा शुरू होने से एक दिन पहले सरकार के साथ राजनीतिक समाधान पर हुई थी चर्चा: विद्रोही गुट

विजयेता सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, 3 मई 2023 को मणिपुर में कुकी-जो और मैतेई समुदाय के बीच जातीय हिंसा भड़कने से ठीक एक दिन पहले, कुकी-जो समूह केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के साथ एक राजनीतिक शांति समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब थे. यह जानकारी ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स’ समझौते में शामिल विद्रोही गुट ‘यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट’ (यूपीएफ) के प्रवक्ता एरॉन किपगेन ने दी.

किपगेन के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर 2 मई 2023 को इंफाल में कुकी विद्रोही संगठनों—केएनओ और यूपीएफ—की केंद्र के वार्ताकार ए.के. मिश्रा और आईबी अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी. गृह मंत्रालय का स्पष्ट संदेश था कि 2008 से चले आ रहे ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स’ समझौते का तार्किक अंत किया जाए—या तो राजनीतिक समाधान लागू हो या इस अध्याय को समाप्त किया जाए.

कुकी-जो प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि मई के पहले सप्ताह में बातचीत पूरी कर नई दिल्ली में गृह मंत्री की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर होंगे. उस समय तक वार्ता संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्तता, वित्तीय व न्यायिक अधिकारों और पारंपरिक न्याय प्रणालियों की मान्यता पर केंद्रित थी, जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह भी अवगत थे.

हालांकि, 3 मई को भड़की हिंसा ने इस पूरी प्रक्रिया को अचानक रोक दिया. किपगेन ने आरोप लगाया कि हिंसा सुनियोजित थी और इंफाल में कुकी-जो घरों को निशाना बनाया गया.

हिंसा के बाद हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन और दोनों समुदायों के भौगोलिक अलगाव ने बातचीत के मूल आधार को पूरी तरह बदल दिया.  अब कुकी-जो समूहों की मांग बदलकर संविधान के अनुच्छेद 239A के तहत विधायिका वाले पृथक केंद्र शासित प्रदेश या अलग प्रशासनिक व्यवस्था की हो गई है.

हालांकि केंद्र सरकार ने नए केंद्र शासित प्रदेश न बनाने की नीति का हवाला दिया है, फिर भी कुकी-जो समूह अपनी मांग पर कायम हैं. यूपीएफ नेता ने बताया कि केंद्र के साथ बातचीत जारी है और नए वार्ताकार अजीत लाल के साथ बैठकें हुई हैं. अगली औपचारिक वार्ता जल्द होने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि 2023 से जारी इस जातीय हिंसा में अब तक लगभग 300 लोग जान गंवा चुके हैं.

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