गिरफ्तारी के करीब नौ साल बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को दी जमानत

कथित आतंकवाद के आरोपों में 2017 से भारत में बंद 39 वर्षीय ब्रिटिश सिख नागरिक जगतार सिंह जोहल को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है. स्कॉटलैंड के डंबार्टन निवासी जोहल को खालिस्तान लिबरेशन फोर्स को आर्थिक मदद देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिस पर पंजाब में लक्षित हत्याएं करने का आरोप है.

‘द गार्डियन’ में पैट्रिक विंटोर की खबर है कि अदालती कार्यवाही में लगातार देरी हुई और अभियोजन पक्ष सत्यापन योग्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका. इससे पहले पंजाब की एक अदालत इसी तरह के साजिश के आरोपों को खारिज कर चुकी है. जोहल 2017 में शादी के लिए भारत आए थे. विवाह के तीन सप्ताह बाद 4 नवंबर को जालंधर से कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें जबरन गाड़ी में बिठा लिया. जोहल का आरोप है कि उन्हें कानूनी सहायता नहीं दी गई और प्रताड़ित कर बयान लिया गया.

जमानत के फैसले पर उनके भाई गुरप्रीत सिंह जोहल ने कहा, "हमने इस पल के लिए लंबा इंतजार किया है. जब भी अदालत में साक्ष्यों की जांच हुई, जजों को कोई ठोस सबूत नहीं मिला. वे तब तक पूरी तरह आजाद नहीं होंगे जब तक डंबार्टन में अपने परिवार के पास नहीं लौट आते."

गुरप्रीत ने ब्रिटेन के कई विदेश मंत्रियों से गुहार लगाई है. हालांकि, ब्रिटिश अधिकारियों ने मामले में देरी स्वीकार की, लेकिन दूसरे देश की न्यायपालिका में हस्तक्षेप न करने का हवाला देकर सार्वजनिक मांग से परहेज किया. हाल ही में यूके सरकार ने एलिस्टेयर बर्ट को जटिल मामलों का विशेष दूत नियुक्त कर जोहल के परिवार से मुलाकात कराई है.

मानवाधिकार संगठन 'रिप्राइव' के उप निदेशक डैन डोलन ने चेतावनी दी कि जमानत के बाद भी रिहाई की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि जोहल को अभी भी आठ अन्य मामलों में गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं 'रिड्रेस' संगठन के वरिष्ठ सलाहकार क्रिस एस्डाले ने कहा कि जमानत नौ साल की अकारण हिरासत की पीड़ा को कम नहीं कर सकती और प्रताड़ना के आरोपों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है.

फिलहाल वकीलों को जमानत की विस्तृत शर्तों और मुचलके की राशि का इंतजार है. औपचारिकताएं पूरी होने तक जोहल न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे.

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