2023 से पहले बिके प्रत्येक दो में से एक पेट्रोल वाहन के माइलेज में E20 ईंधन के कारण आई गिरावट

'लोकलसर्कल्स' द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2022 या उससे पहले पेट्रोल वाहन खरीदने वाले आधे मालिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि 2025 में E20 पेट्रोल अनिवार्य होने के बाद उनके वाहन का माइलेज कम हो गया है.

‘बिजनेस टुडे’ के मुताबिक, अध्ययन से पता चलता है कि 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के प्रत्येक 2 में से 1 मालिक का कहना है कि पिछले 9 महीनों में उनके वाहन की ईंधन दक्षता/माइलेज में कमी आई है. सर्वे में यह भी नोट किया गया है कि इसी तरह, 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के 29% मालिकों ने पिछले 9 महीनों के दौरान अपने वाहन के इंजन, फ्यूल लाइन (ईंधन पाइप), टैंक, कार्बोरेटर आदि में असामान्य टूट-फूट या मरम्मत की आवश्यकता का अनुभव होने की पुष्टि की है.

यह सर्वेक्षण भारत के 301 जिलों में रहने वाले पेट्रोल वाहनों (2022 या उससे पहले के मॉडल) के मालिकों से प्राप्त 50,000 से अधिक जवाबों पर आधारित है. इसमें शामिल उत्तरदाताओं में से 45% टियर-1 जिलों से, 29% टियर-2 से और 26% टियर-3, 4 व 5 जिलों से थे.

सरकारी अनुमान बनाम जमीनी हकीकत

लोकलसर्कल्स का कहना है कि हालांकि आधिकारिक अनुमानों के अनुसार E20 पेट्रोल से माइलेज में लगभग 1-6% की कमी आ सकती है, लेकिन कई उपभोक्ताओं का दावा है कि वास्तविक दुनिया (जमीनी स्तर पर) में यह नुकसान कहीं अधिक है, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाली शहरी परिस्थितियों में चलने वाले पुराने वाहनों में. संस्था ने आगे कहा, “बढ़ती जीवनयापन लागत का सामना कर रहे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए माइलेज में मामूली कमी भी मासिक ईंधन खर्च में भारी बढ़ोतरी का कारण बनती है.”

देश के अधिकांश हिस्सों में अब E20 प्रभावी रूप से डिफ़ॉल्ट (मुख्य) पेट्रोल ग्रेड बन चुका है, जिसके कारण पुराने वाहनों के मालिकों के पास ईंधन के अन्य विकल्प बेहद कम बचे हैं. हालांकि कुछ चुनिंदा हाई-एंड (महंगी) कारों के लिए अभी भी कम-एथेनॉल वाले कुछ प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट बेचे जा रहे हैं, लेकिन उनकी अत्यधिक कीमत के कारण वे आम उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हैं.

वाहन मालिकों को आ रही मुख्य समस्याएं

सर्वेक्षण के अनुसार, वाहन मालिकों ने बार-बार इस तरह की समस्याओं की शिकायत की है: इंजन का तेजी से गर्म होना, रफ इडलिंग (इंजन चालू रहने पर असामान्य आवाज/कंपन होना, कोल्ड स्टार्ट (सर्दियों या ठंडे इंजन को चालू करने) में कठिनाई होना, अत्यधिक कंपन और कम एक्सीलरेशन (पिकअप में कमी), ईंधन दक्षता (माइलेज) में भारी गिरावट.

भीषण गर्मी के महीनों के दौरान सोशल मीडिया पर इंजन के अत्यधिक गर्म होने की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं, जिसने उपभोक्ताओं की चिंता को और बढ़ा दिया है.

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के रासायनिक गुण अलग होते हैं. एथेनॉल नमी को अधिक आसानी से सोखता है, इसमें ऊर्जा की मात्रा कम होती है, और यह उन वाहनों के रबर व प्लास्टिक के हिस्सों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा सकता है जिन्हें मूल रूप से उच्च एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किया गया था. परिणामस्वरूप, जंग लगने, सील और गैस्केट के कमजोर होने, फ्यूल-लाइन के खराब होने, इंजेक्टर के क्षतिग्रस्त होने और इंजन पर दीर्घकालिक अतिरिक्त दबाव पड़ने की चिंताएं सामने आई हैं. पुराने दोपहिया वाहनों, छोटी कारों और बजट कम्यूटर (रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले) वाहनों के मालिक विशेष रूप से चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि मरम्मत और कलपुर्जे बदलने का खर्च उन पर भारी वित्तीय बोझ डाल सकता है.

उद्योग के अनुमान बताते हैं कि पिछले 15 वर्षों में बेचे गए लगभग 80% वाहनों को केवल E5 या E10 ईंधन मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किया गया था. अब E20 पेट्रोल के व्यापक प्रसार के साथ, पुराने वाहनों के कई मालिक रख-रखाव के बढ़ते खर्च, इंजन की कम होती उम्र और घटते माइलेज को लेकर तेजी से चिंतित हो रहे हैं.

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