2025 में सीवर-सैप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 47 सफाईकर्मियों की मौत: केंद्र

‘स्क्रोल’ के मुताबिक, देशभर में 2025 के दौरान सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करते हुए 47 सफाईकर्मियों की मौत हुई. केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में यह जानकारी दी.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने एक सांसद के सवाल के जवाब में बताया कि सबसे ज्यादा 10 मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं. इसके बाद हरियाणा में सात और तमिलनाडु में छह सफाईकर्मियों की मौत हुई.

देश में हाथ से मानव मल की सफाई यानी मैनुअल स्कैवेंजिंग पर 2013 के “हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम” के तहत प्रतिबंध है. इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सफाईकर्मियों की मौत के मामले सामने आते रहे हैं.

मौजूदा कानूनों की प्रभावशीलता से जुड़े सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बताया कि संबंधित योजना का 2025 में मूल्यांकन किया गया था. उन्होंने कहा कि इसके तहत सफाईकर्मियों को सुरक्षा उपकरण, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य बीमा और सफाई प्रक्रिया के मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है.

केंद्र सरकार के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2013 के कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने भी सीवर और सेप्टिक टैंक की सुरक्षित सफाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है.

हालांकि, मैनुअल स्कैवेंजिंग खत्म होने को लेकर सरकारी दावों पर सवाल बने हुए हैं. जुलाई 2023 में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय की केंद्रीय निगरानी समिति ने दावा किया था कि देश से मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा समाप्त हो चुकी है. यह दावा ऐसे समय किया गया था, जब मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश के 766 जिलों में से केवल 520 जिलों को ही मैनुअल स्कैवेंजिंग से मुक्त बताया गया था.

2025 में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई 47 मौतें एक बार फिर सफाईकर्मियों की सुरक्षा, सफाई के पूर्ण मशीनीकरण और प्रतिबंधित प्रथा के प्रभावी उन्मूलन को लेकर सवाल खड़े करती हैं.

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