2026 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार पहुँचा
अनंत कृष्णन की रिपोर्ट है कि चालू वर्ष के पहले तीन तिमाहियों में चीन को भारत का निर्यात 40% बढ़कर लगभग 20 अरब डॉलर हो गया है, और चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ता हुआ इस साल 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है.
चीन के सीमा शुल्क प्रशासन (जीएसी) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25.4% बढ़कर 144.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि चीन से भारत का आयात 23.3% बढ़कर 125.19 अरब डॉलर पर पहुँच गया. चीन को होने वाला भारतीय निर्यात, हालांकि बहुत छोटे आधार (बेस) से था, लेकिन शुरुआती तीन तिमाहियों के बाद 40.7% की मजबूत वृद्धि के साथ 19.26 अरब डॉलर पर पहुँच गया और इसने पिछले साल के कुल आंकड़े को अभी से पार कर लिया है.
बढ़ता असंतुलन
व्यापार घाटा 105.93 अरब डॉलर दर्ज किया गया और यह पिछले साल के रिकॉर्ड आंकड़े को पीछे छोड़ने की राह पर है. यह बढ़ता असंतुलन नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत में भी यह घाटा चर्चा का केंद्र रहा था. वर्ष 2025 में व्यापार घाटा बढ़कर 116.12 अरब डॉलर हो गया था, और इस साल इस रिकॉर्ड के भी टूटने की पूरी संभावना है.
हालांकि, चीन को होने वाले निर्यात में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिसमें 40..7% की वृद्धि दर्ज की गई है. इस साल चीन को भारत के प्रमुख निर्यातों में समुद्री उत्पाद (सीफूड), नेफ्था और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में तक भारत पड़ोसी देश से भारी मात्रा में खरीदता था.
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि हालांकि इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि व्यापार पूरी तरह संतुलित हो, लेकिन व्यापक चिंता का विषय अत्यधिक असंतुलित व्यापार संबंध, भारतीय कंपनियों के लिए बाजार तक पहुँच की कमी और भारत के आयात की प्रकृति है. जहां भारत को विनिर्माण के लिए चीन से बड़ी मात्रा में मध्यवर्ती वस्तुओं (इंटरमीडिएट्स) की आवश्यकता होती है, वहीं बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी सहित तैयार माल पर निरंतर निर्भरता एक चिंता का विषय बनी हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, फर्टिलाइजर (उर्वरक) से लेकर दुर्लभ मृदा खनिजों (रेयर अर्थ्स) तक, बढ़ती संख्या में क्षेत्रों पर चीनी निर्यात नियंत्रण को लेकर भी भारत चिंतित है.

