दिल्ली में छात्र विरोध प्रदर्शन में पैलेट गन चलाने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं
गृह मंत्रालय ने 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने और शॉक बैटन (बिजली के झटके देने वाली लाठियों) का इस्तेमाल करने के आरोपी 'रैपिड एक्शन फोर्स' (आरएएफ) के जवानों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है.
और न ही विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवती को थप्पड़ मारने के आरोपी दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी संदीप लांबा के खिलाफ कोई कदम उठाया गया है. हालांकि, इमरान अहमद सिद्दीकी के अनुसार मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को यह निर्देश देने के लिए कहा है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियों वाले उन पोस्ट और वीडियो को हटा दें, जो जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान अपलोड किए गए थे.
मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की इस कार्रवाई में कम से कम चार लोगों को पैलेट गन से चोटें आने की खबर है. एक अधिकारी ने कहा, "यह पता लगाने के लिए जांच अभी भी जारी है कि किन परिस्थितियों में पैलेट गन चलाई गईं, क्या इसका इस्तेमाल अन्य स्थानों पर भी किया गया था और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था. जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी."
पैलेट गन और शॉक बैटन, सीआरपीएफ की दंगा-नियंत्रण इकाई आरएएफ के साजो-सामान का हिस्सा हैं. सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस दोनों गृह मंत्री अमित शाह के अधीन आते हैं. सरकार ने इससे पहले प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था.
सूत्रों का कहना है कि व्यापक निंदा के बाद, आरएएफ की महानिरीक्षक सीमा धुंधिया ने कथित तौर पर कर्मियों को अत्यधिक बल प्रयोग से बचने और बल के "संवेदनशील पुलिसिंग" के सिद्धांत का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है. एक आंतरिक बैठक के दौरान धुंधिया ने आरएएफ के जवानों और अधिकारियों से कहा कि प्रदर्शन के दौरान "अत्यधिक बल का प्रयोग" अनुचित था और यह आरएएफ प्रशिक्षण के निर्धारित नियमों व प्रोटोकॉल के अनुकूल नहीं था.
इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी मंगलवार (28 जुलाई 2026) को लोकसभा में सरकार से पूछा कि छात्रों पर लाठियाँ, आँसू गैस, वॉटर कैनन, पैलेट गन और एक-47 चलाने की इजाज़त किसने दी — गृह मंत्री ने या प्रधानमंत्री ने…? महिलाओं पर हमला क्यों किया गया… उनके कपड़े क्यों फाड़े गए? उन्हें इस तरह अपमानित करने की क्या ज़रूरत थी? उनके साथ इस तरह का बर्बर और अमानवीय व्यवहार करने की क्या ज़रूरत थी? क्या वे आतंकवादी थे? हमें जवाब चाहिए. कौन जवाब देगा?
इतना ही नहीं सोमवार को संसद पहुँचे धर्मेंद्र प्रधान का जिस भव्य अंदाज़ में स्वागत किया गया, उसे लेकर भी गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, "क्या आपको नहीं लगता कि यह शर्मनाक है? हर किसी ने वे परिस्थितियाँ देखी हैं जिनमें प्रधान ने इस्तीफा दिया था… लेकिन कल संसद में उनका ऐसे स्वागत किया गया जैसे वे कोई सुपरस्टार हों!"

