दस्तावेज़ से खुलासा: दिल्ली पुलिस अधिकारी के निर्देश पर आरएएफ ने प्रदर्शनकारियों पर चलाई थी पैलेट गन

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से दिल्ली पुलिस के इनकार के कुछ दिनों बाद—जिस घटना में कम से कम चार लोग पैलेट छर्रों से घायल हुए थे—पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक 'जनरल डायरी एंट्री' से खुलासा हुआ है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने पुलिस के एक पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) स्तर के अधिकारी के निर्देश पर एंटी-राइट गन से दो राउंड गोलियां चलाई थीं.

‘द हिंदू’ में विजयेता सिंह की खबर है कि जनरल डायरी एंट्री में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए, "डीसीपी के आदेश पर," आरएएफ डिप्टी कमांडेंट ने 55 राउंड नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 राउंड इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टियर स्मोक ग्रेनेड और एंटी-राइट गन से प्लास्टिक पैलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस के दो राउंड फायर किए थे.

आरएएफ कर्मियों द्वारा कथित तौर पर चलाई गई पैलेट गन से घायल हुए दो लोगों का सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन किया गया था. इनमें से एक, साहिल लोचब (19) के परिवार का कहना है कि उनकी दाहिनी आँख की पुतली में छर्रा घुसने के कारण उनकी आँख की रोशनी जाने का खतरा बना हुआ है.

यह पहली बार था जब राष्ट्रीय राजधानी में निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया है. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.

27 जुलाई को, इंटेलिजेंस ब्यूरो के सेवानिवृत्त विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद और पैलेट गन से घायल हुए दो अन्य पीड़ितों (एक कलाकार और एक अन्य पेशेवर) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा नागरिक सभाओं/भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पंप एक्शन राइफलों या प्रोजेक्टाइल एक्शन गन (पीएजी) से दागे जाने वाले पूरी तरह या आंशिक रूप से धात्विक काइनेटिक प्रोजेक्टाइल/पैलेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने या इन्हें सेवा से बाहर करने की मांग की है. इसके साथ ही, 20 जुलाई को राज्य की कार्रवाई के कारण पैलेट चोटों का शिकार हुए सभी पीड़ितों के लिए अनुकरणीय मुआवजे की व्यवस्था करने और उनके पूर्ण चिकित्सा उपचार, देखभाल और पुनर्वास को सुनिश्चित करने की मांग की गई है.

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दिल्ली में छात्र विरोध प्रदर्शन में पैलेट गन चलाने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं