श्रवण गर्ग | राहुल गांधी ने अमित शाह को जनता की नजर में खलनायक बना दिया
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में निधिश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इस सवाल पर विस्तार से चर्चा की कि आखिर राहुल गांधी लगातार गृह मंत्री अमित शाह को अपने निशाने पर क्यों ले रहे हैं. जंतर-मंतर से शुरू हुई "छात्रों की गूंज" और जेन जी से जुड़े आंदोलन को क्या सिर्फ छात्रों के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए, या इसके पीछे भारतीय राजनीति की कहीं बड़ी लड़ाई चल रही है?
श्रवण गर्ग का तर्क है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय या किसी एक घटना तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. उनके मुताबिक, यह लड़ाई भारत के राजनीतिक भविष्य और सत्ता के मौजूदा समीकरणों से जुड़ चुकी है. खास तौर पर अमित शाह की बढ़ती बेचैनी को वे इसी बड़े राजनीतिक संदर्भ में देखते हैं.
चर्चा में एक संभावित राजनीतिक टाइमलाइन का जिक्र किया गया. श्रवण गर्ग के मुताबिक, सत्ता पक्ष के सामने डीलिमिटेशन, महिला आरक्षण और वन नेशन वन इलेक्शन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण राजनीतिक समीकरण बना सकते हैं. उनका कहना है कि यदि ये योजनाएं तय समय पर आगे नहीं बढ़तीं तो 2027 और उसके बाद की राजनीति का पूरा गणित बदल सकता है. इसी संदर्भ में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनावों को भी महत्वपूर्ण बताया.
श्रवण गर्ग का सबसे बड़ा तर्क यह रहा कि राहुल गांधी ने इस राजनीतिक लड़ाई का केंद्र अमित शाह को बना दिया है. उनके मुताबिक, जितना अधिक समय बीतेगा, उतना ही विपक्ष को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर मिल सकता है. उन्होंने कहा कि "छात्रों की गूंज" अब केवल छात्रों की आवाज नहीं रह सकती, बल्कि यह अलग-अलग शहरों में सत्ता विरोधी राजनीतिक अभियान का रूप ले सकती है.
बातचीत में बीजेपी की Gen Z और युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई. भारतीय जनता युवा मोर्चा में उम्र सीमा में बदलाव, सोशल मीडिया पर जोर और युवाओं को आकर्षित करने के लिए नई समितियों के गठन को इसी रणनीति का हिस्सा बताया गया. लेकिन श्रवण गर्ग ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा राजनीतिक चेहरों और पुराने ढांचे के जरिए वास्तव में नई पीढ़ी से संवाद स्थापित किया जा सकता है?
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और प्रशासन के व्यवहार तक में बदलाव की कोशिश दिखाई दे रही है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों के साथ टकराव के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से राजनीतिक कंटेंट बन जाते हैं. उनके मुताबिक, यह भी बताता है कि सत्ता अब Gen Z की डिजिटल राजनीति को गंभीरता से समझने लगी है.
चर्चा का निष्कर्ष यही रहा कि राहुल गांधी और अमित शाह के बीच दिख रही यह राजनीतिक टकराहट सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं है. श्रवण गर्ग के मुताबिक, इसके केंद्र में 2027, राष्ट्रपति चुनाव, डीलिमिटेशन, वन नेशन वन इलेक्शन और 2029 की सत्ता का भविष्य है. असली सवाल यह है कि आने वाले महीनों में कौन सा राजनीतिक समीकरण पहले टूटता है और कौन नई ताकत के रूप में उभरता है. पूरी बातचीत यहां सुन हैं.

