श्रवण गर्ग | ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और ‘रिजीम चेंज’ की बहस

‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता-व्यवस्था में बदलाव की मांग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया और मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन पर चर्चा की.

श्रवण गर्ग ने बातचीत की शुरुआत मोहन भागवत के भाषण के विश्लेषण से की. उन्होंने कहा कि भागवत ने अपने संबोधन में भारत और अन्य देशों में चल रहे आंदोलनों का उल्लेख करते हुए बाहरी शक्तियों पर अस्थिरता फैलाने के प्रयास करने का आरोप लगाया. गर्ग के अनुसार, भागवत का कहना था कि केवल ‘रिजीम चेंज’ से परिस्थितियां नहीं बदलेंगी और ऐसी मांग करने वालों से सख्ती से निपटना चाहिए. गर्ग ने इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और देश में चल रहे आंदोलनों के संदर्भ में समझने की जरूरत बताई.

बातचीत का मुख्य मुद्दा ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग रहा. श्रवण गर्ग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया सामान्य सरकारी नियुक्तियों से अलग है. उनके अनुसार, इसके लिए इस्तीफा या महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ता है. उन्होंने मार्च 2026 में संसद के दोनों सदनों में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए दिए गए नोटिसों और उन्हें खारिज किए जाने का भी उल्लेख किया.

गर्ग ने सवाल उठाया कि जो लोग कहते हैं कि उनकी मांग केवल ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तक सीमित है, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसा किस प्रक्रिया के तहत संभव होगा. उनके मुताबिक, यदि सरकार सीधे उन्हें पद से नहीं हटा सकती, तो उनकी विदाई के लिए सरकार की भूमिका और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए दोनों मामलों की परिस्थितियों में अंतर भी बताया.

चर्चा में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची, चुनाव आयोग की जवाबदेही और सुप्रीम कोर्ट की संभावित भूमिका पर भी बात हुई. गर्ग ने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों और इस संबंध में सार्वजनिक रूप से किए गए दावों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अदालत में याचिकाओं की सुनवाई और किसी संवैधानिक पदाधिकारी को पद से हटाने की प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं.

गर्ग का तर्क था कि ‘रिजीम चेंज’ की मांग को हिंसक सत्ता परिवर्तन के रूप में देखना उचित नहीं है. उनके अनुसार, इस बहस में संवैधानिक प्रक्रियाओं, शांतिपूर्ण आंदोलनों और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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