नीट दुबारा परीक्षा पर सरकार के दावों के बीच छात्रों ने उठाए सवाल, ओएमआर शीट और नतीजों में गड़बड़ी के आरोप

‘स्क्रोल’ के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम रील में कहा कि सरकार ने 2026 की राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा का दोबारा आयोजन बेहद तेजी से कराया. उन्होंने कहा कि "सिर्फ पांच-छह दिन पहले ही परिणाम घोषित हुए हैं और देशभर से छात्रों के सफल होने की अच्छी खबरें आ रही हैं." मई में हुई परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद सरकार की आलोचना हो रही थी और यह बयान उसी पृष्ठभूमि में आया.

दो दिन बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने भी एक्स पर लिखा कि छात्रों, अभिभावकों और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को री-एग्जाम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने ऐसी शिकायतें सामने रखीं, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे.

परिणाम के बाद बढ़ीं छात्रों की शिकायतें

परिणाम जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर छात्रों ने अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं. किसी ने कहा कि पोर्टल पर दिखाई गई उसकी ओएमआर शीट वास्तविक उत्तर पुस्तिका से मेल नहीं खा रही है, तो किसी ने आरोप लगाया कि हर बार लॉग-इन करने पर उसके अंक बदल रहे हैं. कुछ छात्र अपनी मार्कशीट तक डाउनलोड नहीं कर पा रहे थे.

इन शिकायतों ने उन छात्रों की चिंता और बढ़ा दी, जो पहले ही पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा देने की वजह से मानसिक दबाव का सामना कर चुके थे.

24 घंटे में तीन बार बदले अंक

हरियाणा के एक छात्र ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया कि 24 घंटे के भीतर उसके अंक तीन बार बदल गए. छात्र के अनुसार, अस्थायी उत्तर कुंजी के आधार पर उसे लगभग 620 अंक मिलने की उम्मीद थी. परिणाम वाले दिन पहले उसे 650 अंक दिखाई दिए, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा लॉग-इन करने पर अंक 500 रह गए. अगले दिन वही अंक घटकर केवल 135 हो गए.

छात्र ने एनटीए को कई ईमेल भेजे, लेकिन उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. बाद में वह दिल्ली स्थित एनटीए कार्यालय पहुंचा, जहां उसके अनुसार अधिकारियों ने उसे ऐसी ओएमआर शीट दिखाई जो उसकी नहीं थी.

इसके बाद उसने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया. अदालत के निर्देश पर एनटीए ने उसकी मूल उत्तर पुस्तिका पेश की. छात्र के वकील विनीत जिंदल ने दावा किया कि अदालत में पेश की गई उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन दिखाई गई कॉपी से अलग थी. 31 जुलाई को हाई कोर्ट ने छात्र को अपने परिणाम के खिलाफ कानूनी चुनौती देने की अनुमति दे दी.

ओएमआर शीट पर भी उठे सवाल

उत्तर भारत के एक अन्य छात्र ने बताया कि उसने अपनी उत्तर पुस्तिका पर पहचान के लिए तीन छोटे बिंदु बनाए थे ताकि बाद में स्कैन कॉपी देखकर उसकी पुष्टि कर सके. लेकिन पोर्टल पर उपलब्ध ओएमआर शीट में वे निशान नहीं थे.

उसका कहना है कि उत्तर कुंजी के अनुसार उसे लगभग 679 अंक मिलने चाहिए थे, जबकि पोर्टल पर केवल 179 अंक दिखाए गए. छात्र ने यह भी दावा किया कि उसकी ओएमआर शीट में उसके नाम के ऊपर दोबारा लिखने जैसी आकृति दिखाई देती है. उसने भी एनटीए को शिकायत भेजी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला.

एक छात्र, दो अलग-अलग स्कोरकार्ड

दिल्ली के एक छात्र ने बताया कि परिणाम जारी होने के समय वेबसाइट में तकनीकी दिक्कत थी. जब उसके मित्र ने उसके खाते में लॉग-इन किया तो दो अलग-अलग स्कोरकार्ड दिखाई दिए. एक में उसकी श्रेणी सामान्य थी और अंक 343 थे, जबकि दूसरे में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के साथ केवल 133 अंक दर्ज थे.

अगले दिन दोबारा लॉग-इन करने पर केवल कम अंकों वाला स्कोरकार्ड दिखाई दिया. छात्र ने एनटीए से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उसने बताया कि पहली परीक्षा में उसे लगभग 525 अंक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन री-एग्जाम के बाद उसका प्रदर्शन प्रभावित हुआ और अब उसने बीएससी में दाखिला ले लिया है.

एनटीए का जवाब और एआई का मुद्दा

सोशल मीडिया पर बढ़ती शिकायतों के बीच एनटीए ने दावा किया कि कुछ छात्रों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से बदले गए स्कोरकार्ड और ओएमआर शीट साझा कर गलत दावे किए हैं. एजेंसी ने एक्स पर कुछ मामलों में छात्रों के नाम और आवेदन संख्या का उल्लेख करते हुए कहा कि साझा की गई ओएमआर शीट डिजिटल रूप से बदली गई थीं.

एनटीए ने चेतावनी दी कि जांच के लिए केवल मूल दस्तावेज ही भेजे जाएं और फर्जी या एआई से तैयार दस्तावेज भेजने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

शिकायत करने से भी डर रहे छात्र

छात्रों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विनीत जिंदल के अनुसार, लगभग 40 छात्र अपने परिणामों को लेकर उनसे संपर्क कर चुके हैं, लेकिन उनमें से केवल तीन ने अदालत का रास्ता चुना है. उनका कहना है कि अधिकांश छात्र सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और भविष्य के करियर पर असर पड़ने की आशंका के कारण सार्वजनिक रूप से सामने आने से डर रहे हैं.

सरकार री-एग्जाम को सफल बता रही है, लेकिन छात्रों के अनुभव अलग तस्वीर पेश करते हैं. ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ियां, बदलते परिणाम, तकनीकी समस्याएं और शिकायतों के समाधान में देरी ने परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन मामलों पर एनटीए और अदालतों की आगे की कार्रवाई पर अब हजारों छात्रों की नजर टिकी हुई है.

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