एसआईआर के बाद दिल्ली के एक-तिहाई मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से हटे

राज्य चुनाव कार्यालय द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सोमवार को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची से दिल्ली के कम से कम एक-तिहाई मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं.

गायत्री मणि की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा मतदाता सूची के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47.7 लाख मतदाताओं के नाम इस प्रारूप सूची से बाहर कर दिए गए हैं, और इसके साथ ही नाम शामिल करने के लिए दावे आमंत्रित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जाएगी.

'हटाए गए' मतदाता अब क्या कर सकते हैं?

जिन मतदाताओं के नाम एसआईआर 2026 की प्रारूप सूची में शामिल नहीं हैं, उनके संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने बताया कि "बीएलओ (बूथ स्तर के अधिकारी) ने बीएलए (बूथ स्तर के एजेंटों) के परामर्श से ऐसे मतदाताओं की एक सूची तैयार की है जिनके गणना फॉर्म प्राप्त नहीं हुए हैं."

अधिकारियों के अनुसार, जिन पीड़ित व्यक्तियों के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर तक घोषणा पत्र और सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 में अपने दावे जमा कर सकते हैं. अधिकारियों ने कहा कि प्राप्त दावों और आपत्तियों की जाँच की जाएगी तथा नोटिस और निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक जारी रहेगी.

97.5 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हुए

प्रारूप सूची में लगभग 97.5 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जिनके गणना फॉर्म 30 जून से 17 अगस्त तक चलाए गए घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान प्राप्त और डिजिटाइज़ किए गए थे. दिल्ली के कुल 1,45,10,299 मतदाताओं में से लगभग 67.18 प्रतिशत के गणना फॉर्म डिजिटाइज़ किए गए.

शेष 47.62 लाख मतदाताओं को "गैर-संग्रहणीय" के रूप में चिह्नित किया गया — यह एक ऐसी श्रेणी है जिसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत मतदाता, डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ या "अन्य" कारण शामिल हैं, और इन्हें प्रारूप सूची से हटा दिया गया है.

डिजिटलीकरण की दर दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर काफी भिन्न रही. रोहिणी में सबसे अधिक 83.43 प्रतिशत डिजिटलीकरण दर्ज किया गया, जबकि तुगलकाबाद में सबसे कम 52.15 प्रतिशत रहा.

यह एसआईआर अभियान घर-घर जाकर गणना के माध्यम से मतदाता सूची के सत्यापन के लिए चलाया गया था. जिन लोगों के गणना फॉर्म इस अभियान के दौरान प्राप्त नहीं हो सके थे, उन्हें दावे और आपत्तियां प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर दिया गया है.

Previous
Previous

वंदिता मिश्रा: जंतर-मंतर के आलोक में भाजपा का आंतरिक असंतोष और कांग्रेस का सांगठनिक ठहराव

Next
Next

सुप्रीम कोर्ट ने जिम मालिक ‘मोहम्मद दीपक’ के खिलाफ एफआईआर पर रोक लगाई, सोशल मीडिया प्रतिबंध भी हटाया