सुप्रीम कोर्ट ने जिम मालिक ‘मोहम्मद दीपक’ के खिलाफ एफआईआर पर रोक लगाई, सोशल मीडिया प्रतिबंध भी हटाया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देहरादून के जिम मालिक दीपक कुमार (जिन्हें 'मोहम्मद दीपक' के नाम से भी जाना जाता है) के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगा दी. यह मामला बजरंग दल के सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के बीच हुई झड़प से जुड़ा हुआ था.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी, जिसने दीपक को इस घटना और मामले के संबंध में सोशल मीडिया पोस्ट करने या सार्वजनिक बयान जारी करने से रोक दिया था. शीर्ष अदालत ने एफआईआर रद्द करने से उच्च न्यायालय के इनकार को चुनौती देने वाली दीपक की याचिका पर उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया है.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था. उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था. अदालत ने दीपक और मामले से जुड़े एक अन्य व्यक्ति को इस विषय पर बयान न देने या सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड न करने का भी निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि दीपक ने खुद इस घटना के संबंध में शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई.

'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंघवी ने अदालत से कहा, "किसी मददगार व्यक्ति (गुड समैरिटन) के खिलाफ इस तरह की शिकायत कैसे दर्ज की जा सकती है?"

सिंघवी ने यह भी तर्क दिया कि आवश्यक शर्तें पूरी न होने के बावजूद दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 के तहत दंगे का आरोप लगाया गया था. बाद में इसी वजह से इस आरोप को हटा भी दिया गया था.

बजरंग दल के सदस्यों से झड़प

उत्तराखंड में बजरंग दल के सदस्यों के साथ हुई झड़प के बाद दीपक सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा में आए थे. आरोप है कि बजरंग दल के सदस्यों ने एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान के नाम में "बाबा" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी.

इस बहस के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए थे.  बातचीत के दौरान दीपक को यह कहते सुना गया, "मेरा नाम मोहम्मद दीपक है."

इस घटना ने सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक ध्रुवीकरण पर एक व्यापक बहस को जन्म दिया, जिसमें मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े होने के लिए दीपक को काफी समर्थन और ध्यान मिला.

कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान (जिसके कारण धर्मेंद्र प्रधान को भारत के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था), कई प्रदर्शनकारियों ने "मेरा नाम मोहम्मद दीपक है" कहा था, जो यह दर्शाता है कि उनकी कहानी ने देश भर के लोगों को कैसे प्रेरित किया था.

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से अब एफआईआर से जुड़ी आगे की कार्यवाही पर रोक लग गई है, जबकि अदालत इस मामले को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रही है. उच्च न्यायालय द्वारा उनके सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों पर लगाई गई रोक को भी हटा दिया गया है.

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