326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज: सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश
राजनीति के अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकसभा के 543 में से 251 सदस्यों और राज्यसभा के 233 में से 75 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द से जल्द निपटारे की मांग करने वाली एक जनहित याचिका में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया द्वारा शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में कहा गया है कि संसद सदस्यों और राज्य विधानसभा सदस्यों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं.
‘पीटीआई’ के अनुसार, 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गंभीर मामलों सहित अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की घोषणा की है. हंसारिया ने निवेदन किया कि त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों द्वारा मामलों की निगरानी किए जाने के बावजूद, 2018 के बाद से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है.
2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का फैसला किया गया, जबकि उसी वर्ष 1,050 नए मामले दर्ज किए गए. पूर्व और वर्तमान सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित कुल मामलों की संख्या 4,192 है. लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 170 मामले गंभीर आपराधिक मामले (पाँच वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय) हैं."
"राज्यसभा में 233 सदस्यों में से 75 (33 प्रतिशत) सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 40 (18 प्रतिशत) मामले गंभीर आपराधिक मामले हैं." वरिष्ठ वकील ने उत्तर प्रदेश को छोड़कर विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों का एक विश्लेषण भी दायर किया, क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी.

