‘छोटे दलों’ का मतलब करोड़ों रुपये: रिपोर्ट ने अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिले भारी चंदे का किया पर्दाफाश

विजय कुमार सोनी ने राजस्थान के भीलवाड़ा से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था और उन्हें 1,347 वोट मिले थे, जो उस निर्वाचन क्षेत्र में पड़े कुल वोटों का लगभग 0.10 प्रतिशत था.

अर्नब गांगुली के अनुसार, सोनी 10 उम्मीदवारों और नोटा बटन के बीच सबसे अंतिम स्थान पर रहे थे, लेकिन उनकी 'भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी' देश की सबसे अधिक कमाई करने वाली पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPPs) में शीर्ष पांच में शामिल है.  कमाई के मामले में इसने तमिलनाडु में सरकार चला रही 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (टीवीके) और प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' जैसी पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया है. भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी का निर्वाचन आयोग में पंजीकरण जनवरी 2024 में हुआ था, जो कि लोकसभा चुनाव से महज चार महीने पहले था.

इस पार्टी को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए चंदे के रूप में 170.0445 करोड़ रुपये मिले. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय विवरणों के नवीनतम विश्लेषण में राजस्थान स्थित 'भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी' को ऐसी तीन अन्य पार्टियों के पीछे रखा गया है, जो सभी पड़ोसी राज्य गुजरात से हैं.

‘द न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी’, ‘भारतीय नेशनल जनता दल’ और ‘भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी’ का हिस्सा देश में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा घोषित कुल आय का 67.82 प्रतिशत था.

एक अन्य राजनीतिक दल, 'स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी', जो मार्च 2021 में पंजीकृत हुई थी, उसने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कोई आय प्रदर्शित नहीं की है, हालांकि उसने चंदे के रूप में 228.8098 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी दी है.

‘द न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी’, जिसे चंदे के रूप में 270.9984 करोड़ रुपये मिले, उसने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर उम्मीदवार उतारे और उसे 1,426 वोट मिले.

चंदे के माध्यम से 228.8098 करोड़ रुपये कमाने वाली 'स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी' को चार लोकसभा सीटों पर 12,741 वोट मिले.

गुजरात स्थित 'भारतीय नेशनल जनता दल' ने इस साल के बंगाल विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे कुल 1,247 वोट मिले थे.

वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ऐसे 734 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की कुल आय 1,118.494 करोड़ रुपये रही.

इस कुल घोषित आय में लगभग 80.67 प्रतिशत हिस्सा केवल गुजरात, दिल्ली और राजस्थान का था.

गुजरात के कुल 29 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs ) ने 510.4172 करोड़ रुपये की संचित आय की सूचना दी, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक है. इसके बाद दिल्ली में 73 पार्टियों ने (218.483 करोड़ रुपये) और राजस्थान में 23 पार्टियों ने (173.365 करोड़ रुपये) की आय घोषित की.

भारत में छह राष्ट्रीय पार्टियां, 67 क्षेत्रीय पार्टियां और लगभग 2,074 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां (RUPPs) हैं.

एडीआर ने रिपोर्ट दी कि देश की 2,074 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों में से केवल 734 की ही वार्षिक ऑडिट और योगदान रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी.

लगभग 65 प्रतिशत RUPPs ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अपनी वार्षिक ऑडिट और योगदान रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है.

बंगाल में ऐसी 53 RUPPs हैं और इनमें से केवल 23 ने ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर वार्षिक ऑडिट और योगदान रिपोर्ट अपलोड की है.

एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक कमाई करने वाली 15 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPPs) की आय देश की 36 क्षेत्रीय पार्टियों के बराबर है.

छह राष्ट्रीय दलों की आय का 85.08 प्रतिशत, क्षेत्रीय दलों की आय का 58.87 प्रतिशत और शीर्ष 15 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की आय का 99.79 प्रतिशत हिस्सा चंदे से आता है.

किसी पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दलों जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं. ऐसी पार्टियों के पास कोई निश्चित चुनाव चिह्न नहीं होता है, उन्हें मतदाता सूची की मुफ्त प्रति नहीं दी जाती है, चुनाव प्रचार के लिए दूरदर्शन और आकाशवाणी पर मुफ्त प्रसारण की सुविधा नहीं मिलती है और न ही पार्टी कार्यालय स्थापित करने के लिए रियायती दर पर भूमि आवंटित की जाती है.

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की तरह, पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों को भी इस शर्त पर आयकर के भुगतान से पूर्ण छूट का लाभ मिलता है कि वे आयकर विभाग को वार्षिक आयकर रिटर्न जमा करेंगी और किसी भी वित्तीय वर्ष के दौरान प्राप्त 20,000 रुपये से अधिक के सभी चंदों का विवरण प्रस्तुत करेंगी.

कर छूट की अनुमति तब भी दी जाती है जब गैर-मान्यता प्राप्त दल घोषणा करते हैं कि उन्हें किसी एकल दाता से 20,000 रुपये से अधिक का कोई चंदा प्राप्त नहीं हुआ है.

मान्यता प्राप्त हो या नहीं, एक बार जब कोई पार्टी निर्वाचन आयोग में पंजीकृत हो जाती है, तो वे चंदा एकत्र करना जारी रख सकती हैं और कर-मुक्त स्थिति का लाभ उठा सकती हैं, बशर्ते वे उपरोक्त शर्तों को पूरा करती हों.

अगस्त और सितंबर 2025 में, निर्वाचन आयोग ने लगातार छह वर्षों तक कोई चुनाव न लड़ने के कारण 808 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को सूची से हटा दिया था. 19 सितंबर, 2025 को अपनी वार्षिक ऑडिट और योगदान रिपोर्ट जमा करने में विफल रहने पर 359 अन्य गैर-मान्यता प्राप्त दलों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई थी.

सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक, उत्तर प्रदेश की 530 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों में से लगभग 57.36 प्रतिशत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए दोनों में से कोई भी रिपोर्ट जमा नहीं की थी. कुल 226 दलों ने केवल एक ही रिपोर्ट जमा की थी.

जुलाई 2025 में एडीआर द्वारा जारी इसी तरह के एक विश्लेषण से पता चला था कि ऐसी छह गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों ने भाजपा को छोड़कर अन्य पांच राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय से भी अधिक चंदे से कमाई की थी. उन छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों में से पांच गुजरात में स्थित थीं.

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