‘भारत में हिरासत’: दुनिया का पहला प्रोटेस्ट, जो सरकार की सख्ती से सफल हो गया; ‘सांस लेता हूँ तो कोई डिटेन हो जाता है’

शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर और देश की राजधानी से हज़ारों किलोमीटर दूर भी ‘द ग्रेट इंडियन डिटेंशन’ (भारत में बड़े पैमाने पर हिरासत) का नज़ारा देखने को मिला, जब केंद्र और कुछ राज्यों की सरकारों ने छात्रों, युवाओं, बुजुर्ग राजनेताओं और देश के नागरिकों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इकट्ठा होने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी.

शनिवार को भारत “लोकतंत्र की जननी” जैसा बिल्कुल नहीं लग रहा था.  इतिहास 10 अक्टूबर, 2026 को उस दिन के रूप में याद रखेगा जब भारत की राजधानी एक विशाल छावनी में बदल गई थी. कार्टूनिस्ट मंजुल ने ‘एक्स’ पर लिखा, “ये दुनिया का पहला प्रोटेस्ट है, जो बिना हुए भी सक्सेसफुल होगा.” मंजुल ने एक पोस्ट में यह भी कहा, “आज का हाल देखिए, सोचिए और खुद से सवाल पूछिए- प्रशासन के चाहे बगैर 2002 का कत्लेआम मुमकिन था क्या? और प्रशासन यही महाशय चला रहे थे. 

सीलबंद सीमाएं, विमान के उतरते ही हवाई अड्डे पर हिरासत में लेना, घरों से गिरफ्तारियां, जंतर-मंतर जाते समय रास्ते में हिरासत, इंटरनेट शटडाउन और अर्धसैनिक बलों व पुलिसकर्मियों का भारी जमावड़ा—शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी का अधिकांश समय यही हाल रहा. इसे अलग-अलग रूपों में “नया प्योंगयांग”, “बैरिकेड्स की वैश्विक राजधानी” और इस तरह के अन्य कई नामों से वर्णित किया गया.

अर्णब गांगुली के अनुसार, द न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार लिडिया पोलग्रीन ने पुलिस द्वारा हर संभव व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “दिल्ली की सड़कों पर पूरी तरह से पुलिस का तांडव मचा हुआ है.”

नरेंद्र मोदी सरकार ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों से लगभग 24 घंटे पहले, यानी शुक्रवार को ही अपने इरादे साफ कर दिए थे, जब दिल्ली जाने वाली ट्रेनें रद्द कर दी गईं और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आने वाली ट्रेनों से यात्रियों को उतारकर हिरासत में ले लिया गया.

प्रशासन ने छात्रों और युवाओं को राजधानी के निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर पहुंचने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी और बीएसएफ जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 26,000 से अधिक जवानों को तैनात किया था, जो आमतौर पर भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करते हैं.

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के अगुआ अभिजीत दिपके और उनके सहयोगियों आशुतोष रांका और सौरव दास को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के एक विमान के उतरने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम ने घेर लिया.

दिपके ने उन पुलिस अधिकारियों से कहा, “मैं गिरफ्तार होने आया हूँ, मुझे गिरफ्तार करो... मैं तुम लोगों से नहीं डरता.” उनके साथ एक ऐसे समाचार चैनल की टीम भी प्रतीत हो रही थी जिसे सत्ताधारी दल के करीब माना जाता है.

दिल्ली और उसके आस-पास अन्य जगहों पर, यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी के कानूनी प्रकोष्ठ प्रमुख रत्ना सिंह को उनके आवास से हिरासत में लिया गया, और वर्तमान व्यवस्था के विरोध के लिए जाने जाने वाले कुछ सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स को भी हिरासत में लिया गया.

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को जंतर-मंतर के रास्ते में हिरासत में लिया गया. पत्रकारों को विरोध प्रदर्शन के केंद्र से काफी दूर की जगहों से उठाया गया. मीडियाकर्मियों पर सुरक्षा बलों द्वारा की गई अभूतपूर्व कार्रवाई को लेकर पत्रकारों के संगठनों ने चिंता व्यक्त की है. 'द वायर' के अनुसार, शनिवार को दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों द्वारा प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद कई पत्रकारों को हिरासत में ले लिया गया.

मुंबई और आंध्र प्रदेश में भी गिरफ्तारियां और हिरासतें हुईं. महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को मुंबई पुलिस ने सांताक्रूज पुलिस स्टेशन के पास एक जगह से उठाया और अंधेरी (पश्चिम) के डीएन नगर पुलिस स्टेशन ले आए.

वे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अगस्त क्रांति मैदान जा रहे थे ताकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर सकें—एक ऐसी मांग जिसे भारत के प्रमुख विपक्षी दलों ने उठाया है और अब युवा तथा छात्र भी इसका समर्थन कर रहे हैं.

कांग्रेस शासित कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी लोगों को हिरासत में लिया गया. कंटेंट क्रिएटर पुलित कोचर की इस एक लाइन ने पूरी स्थिति को बयां कर दिया: “सांस लेता हूँ तो कोई डिटेन हो जाता है.”

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