शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है: ईएएस शर्मा ने केंद्रीय गृह सचिव को लिखा पत्र

‘काउंटरकरंट्स’ में प्रकाशित पत्र में पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस शर्मा ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के निर्देश वापस लेने की अपील की है. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने से रोकने की खबर पर चिंता जताई है.

शर्मा ने ‘द प्रिंट’ की 9 अक्टूबर की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को सीजेपी के सदस्यों और समर्थकों को प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया था.

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के वेब पोर्टल बंद किए और सार्वजनिक असहमति को दबाने के लिए दिल्ली मेट्रो सेवाएं भी बंद कीं. उनके अनुसार, दूसरे लोकतांत्रिक देशों में इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों से अधिक सम्मानजनक और लोकतांत्रिक तरीके से निपटा जाता है.

शर्मा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि महात्मा गांधी और दूसरे नेताओं के शांतिपूर्ण आंदोलनों को बेरहमी से दबाने की कोशिश की गई थी. उन्होंने 1975 के आपातकाल का भी उल्लेख किया, जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों के खिलाफ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाए थे.

उन्होंने लिखा कि मौजूदा स्थिति उन दमनकारी दिनों की याद दिलाती है. उनके अनुसार, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तीन जरूरी आधार चर्चा, असहमति और बहस हैं. सीजेपी और अन्य संगठन देशभर में युवाओं की शिक्षा, रोजगार के भविष्य और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं.

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

शर्मा ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का संरक्षक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य के लिए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग सत्ता में बैठे नेताओं के राजनीतिक हितों के अनुरूप काम कर रहा है.

उनके मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लाखों वास्तविक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किया गया, युवा मतदाताओं के पंजीकरण को हतोत्साहित किया गया और जमीनी स्तर पर काम करने वाले चुनाव अधिकारियों की भूमिका को प्रतिबंधात्मक सॉफ्टवेयर के जरिए कमजोर किया गया.

शर्मा ने कहा कि मतदाता सूची से कथित अनुचित विलोपन पर सवाल उठाना किसी भी जागरूक नागरिक का अधिकार है. उनके अनुसार, सीजेपी और दूसरे प्रदर्शनकारी इसी प्रक्रिया की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं. उनकी असहमति को दबाना अलोकतांत्रिक है और लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोकना संविधान की भावना के खिलाफ है.

गृह मंत्रालय से निर्देश वापस लेने की अपील

शर्मा ने पत्र में कहा कि सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन की जानकारी खुफिया एजेंसियों को होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शन गैरकानूनी है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है.

उन्होंने गृह सचिव से सवाल किया कि क्या युवाओं की आवाज दबाना संविधान के लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है. शर्मा के अनुसार, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी राजनीतिक नेतृत्व को सार्वजनिक प्रदर्शनों को दबाने के बजाय उनका सम्मान करने की सलाह देना है.

पत्र के अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि गृह मंत्रालय अपने रुख की समीक्षा करेगा और राज्यों को युवाओं को सामूहिक रूप से असहमति व्यक्त करने से रोकने के निर्देश वापस लेगा. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के बजाय सरकार को जनता की चिंताओं को सुनना चाहिए और लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए.

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