बिहार में अपराध पर चिराग पासवान के भी कड़े तेवर और यूपी चुनाव लड़ने के ऐलान से एनडीए में असहजता

बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर अपनी ही सरकार पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के तीखे हमलों और उनकी पार्टी ‘लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)’ द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान ने सत्तारूढ़ एनडीए के भीतर असहजता पैदा कर दी है.

जे. पी. यादव की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग लड़कियों से उत्पीड़न की घटनाओं पर बीजेपी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार को घेरते हुए चिराग ने कहा, "बिहार में प्रशासन निकम्मा हो चुका है. ऐसी सरकार का समर्थन करने में मुझे खुद शर्म महसूस हो रही है."

जहाँ बीजेपी इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयानबाजी से बच रही है, वहीं एनडीए की दूसरी बड़ी घटक दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने चिराग को सीमा में रहने की हिदायत दी है. जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि घटनाओं पर चिंता वाजिब है, लेकिन पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था को ध्वस्त बताना अतिशयोक्ति है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग का यह आक्रामक रुख खुद को बिहार के भावी मुख्यमंत्री और अग्रणी युवा नेता के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले विधानसभा चुनाव में 29 में से 21 सीटें जीतकर उनकी साख और मजबूत हुई है.

चिराग ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान की तर्ज पर "युवा बोले तो" कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें वे युवाओं को रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर बोलने का मंच दे रहे हैं. पटना के बाद इलाहाबाद में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बीजेपी को चेतावनी देते हुए कहा:

"चिराग पासवान आपके अधिकारों की रक्षा के लिए गठबंधन में है.  जिस दिन मुझे लगेगा कि मेरे लोगों के साथ अन्याय हो रहा है, उस दिन अपने स्वर्गीय पिता (रामविलास पासवान) की तरह मंत्री पद छोड़ने में मुझे एक मिनट भी नहीं लगेगा."

उनकी यह टिप्पणी दलित हितों और आरक्षण पर चल रही बहस की ओर स्पष्ट इशारा थी.

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 में उतरने का ऐलान

इलाहाबाद में चिराग ने घोषणा की कि उनकी पार्टी 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी. हालाँकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वे बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे या अकेले.

लोजपा (रामविलास) के सूत्रों के अनुसार, पार्टी यूपी में बीजेपी से सीटों की मांग करेगी और बात न बनने पर स्वतंत्र रूप से प्रत्याशी उतारेगी.  पार्टी का मुख्य जनाधार दलित पासवान समुदाय है, जिसकी उत्तर प्रदेश में भी अच्छी मौजूदगी है.

बीजेपी के एक नेता के मुताबिक, "चिराग पासवान एक सख्त मोलभाव करने वाले नेता हैं. बिहार चुनावों की तरह वे यूपी में भी दबाव बनाकर अधिक सीटें हासिल करने की रणनीति अपना रहे हैं."

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