कानून-व्यवस्था को लेकर बिहार सरकार पर बढ़ता दबाव, बीजेपी के भीतर से भी उठे विरोध के स्वर
बिहार में यौन उत्पीड़न की सिलसिलेवार घटनाओं को लेकर विपक्ष के हमलों का सामना कर रही सम्राट चौधरी सरकार अब एक अप्रत्याशित मोर्चे — यानी अपनी ही पार्टी के भीतर से — घिरती नजर आ रही है. शनिवार को बीजेपी के राज्य सभा सांसद शंभू शरण पटेल ने "बिगड़ती कानून-व्यवस्था" को लेकर अपनी ही सरकार पर निशाना साधा, जिससे सत्ताधारी गठबंधन पर दबाव और बढ़ गया है.
पत्रकारों से बात करते हुए पटेल ने कहा, "बिहार में पुलिसिंग चरमरा गई है." उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण बहाल करने के लिए नए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति की मांग की. उन्होंने कहा, "हमें राज्य में नया मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक चाहिए. हमें कानून-व्यवस्था की स्थिति में पूरी तरह से सुधार करने की जरूरत है. अपराधियों में अब कानून का कोई डर नहीं रह गया है."
राज्य पुलिस के साथ अपने हाल के एक व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए बीजेपी सांसद ने आगे कहा: "एक लड़की से जुड़ी घटना के बाद मैंने पटना प्रशासन को फोन किया था, लेकिन एसएसपी ने मेरा फोन तक नहीं उठाया. इस मामले में अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है. मैं और क्या कह सकता हूं? सत्ताधारी दल का हिस्सा होने के नाते मेरे हाथ बंधे हुए हैं, लेकिन जनता ने हमें सुशासन देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का जनादेश दिया था. किसी भी बेटी पर जब अत्याचार होता है तो यह शर्मनाक है. मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि राज्य में पुलिस व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है."
पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब यौन उत्पीड़न की कई घटनाओं ने राज्य प्रशासन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बैकफुट पर ला खड़ा किया है. चौधरी के पास राज्य के गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, और विपक्ष अब त्वरित कार्रवाई के लिए लगातार दबाव बना रहा है. इसी बीच समस्तीपुर से यौन उत्पीड़न का एक और वीडियो सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार से "जवाबदेही" तय करने की मांग की है.
सिलसिलेवार वीडियो सामने आए
संतोष सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, ये घटनाक्रम पिछले एक हफ्ते के दौरान पूरे बिहार में लड़कियों के कथित उत्पीड़न के सिलसिलेवार वीडियो सामने आने के बाद हुए हैं, जिससे कई जिलों की पुलिस की नींद उड़ी हुई है.
इस हफ्ते की शुरुआत में, एक वीडियो में जमुई के बाहरी इलाके में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र में कुछ युवकों को दो स्कूली छात्राओं को घेरकर कथित तौर पर प्रताड़ित करते देखा गया था. पुलिस ने इस मामले में तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया और दो लोगों — नंदन यादव और हरेराम यादव — को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी का विरोध करने पर नंदन के पैर में गोली लगी थी. इस घटना और उसके बाद की कार्रवाई पर जमकर राजनीति हुई और विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर एनडीए सरकार को घेरने की कोशिश की.
यह मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि समस्तीपुर के एक बाईपास रोड से दिनदहाड़े एक लड़की को कथित तौर पर प्रताड़ित करने, उसके बाल खींचने और अभद्र टिप्पणी करने का एक और वीडियो सामने आ गया. यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
समस्तीपुर का ही एक तीसरा वीडियो सामने आया, जिसमें मुसरीघरारी थाना क्षेत्र की एक सड़क पर कुछ लोग एक लड़की को कथित तौर पर परेशान करते दिखे. 14 अगस्त का बताया जा रहा यह वीडियो सामने आने के बाद चार लोगों की पहचान की गई और एक व्यक्ति धर्मेंद्र सहनी को गिरफ्तार किया गया. बांका का एक अन्य वीडियो भी सामने आया जिसमें ऐतिहासिक मंदार हिल पर्यटन स्थल पर कुछ लोग एक लड़की को परेशान करते और मारपीट करते दिखे. पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि यह घटना वास्तव में 3 जून को हुई थी और उन्होंने बिहार से बाहर प्रवासी मजदूर के रूप में काम कर रहे तीन संदिग्धों की पहचान कर ली है.
इन मामलों ने जमुई घटना से निपटने के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के तरीके को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है. शनिवार को तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक हैंडल से जमुई की पीड़ित लड़की की तस्वीर पोस्ट किए जाने के बाद पुलिस से मुख्यमंत्री कार्यालय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की.

