3,900 किलोमीटर दूर: चीन में बैठे डॉक्टर ने हैदराबाद के मरीज का किया ऑपरेशन

‘साउथ फर्स्ट’ के मुताबिक, हैदराबाद के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी में एक मरीज मूत्राशय की सर्जरी के लिए भर्ती हुआ. ऑपरेशन थिएटर तैयार था, रोबोटिक मशीनें सक्रिय थीं और डॉक्टर सर्जरी कर रहे थे. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि सर्जरी करने वाला डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं था. वह भारत में भी नहीं था.

18 मई को संस्थान के रोबोटिक यूरोलॉजिकल सर्जन डॉ. सैयद मोहम्मद गाउस चीन के वुहान स्थित टोंगजी अस्पताल के एक नियंत्रण कक्ष में बैठे थे, जबकि मरीज हैदराबाद में ऑपरेशन टेबल पर था. दोनों शहरों के बीच लगभग 3,900 किलोमीटर की दूरी थी.

करीब 90 मिनट तक चली यह सर्जरी अब दुनिया की पहली ऐसी दूरस्थ रोबोटिक यूरेटर पुनर्संयोजन सर्जरी मानी जा रही है, जिसे इतनी लंबी दूरी से सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया.

पहली नजर में यह किसी विज्ञान-कल्पना फिल्म जैसा लगता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसकी तकनीक कई वर्षों से आधुनिक ऑपरेशन थिएटरों में मौजूद है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब दूरी की सीमाएं टूट रही हैं.

‘ऑपरेशन थिएटर के अंदर भी आप सीधे मरीज को नहीं छू रहे होते’

डॉ. गाउस बताते हैं कि रोबोटिक सर्जरी अपने आप में पहले से ही “दूरस्थ सर्जरी” का एक रूप है. सामान्य सर्जरी की तरह डॉक्टर सीधे मरीज के शरीर पर खड़े होकर ऑपरेशन नहीं करते. इसके बजाय वे एक नियंत्रण कक्ष में बैठते हैं, जहां उन्हें मरीज के शरीर के भीतर का त्रि-आयामी दृश्य दिखाई देता है. डॉक्टर अपने हाथों की हलचल से रोबोटिक भुजाओं को नियंत्रित करते हैं और वही हरकत मरीज के शरीर के भीतर दोहराई जाती है.

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन थिएटर के अंदर भी डॉक्टर सीधे मरीज को हाथ नहीं लगाता. वह एक नियंत्रण कक्ष में बैठा होता है और उसके हाथों की हरकत रोबोटिक प्रणाली मरीज के शरीर के अंदर दोहराती है. यानी तकनीकी रूप से रोबोटिक सर्जरी पहले से ही दूरस्थ सर्जरी है.”

18 मई को जो बदला, वह सिर्फ दूरी थी.

उन्होंने कहा, “अब आप इस नियंत्रण कक्ष को सैकड़ों और हजारों किलोमीटर दूर ले जाकर वहीं से ऑपरेशन कर रहे हैं. यही दूरस्थ सर्जरी है.”

सर्जरी के दौरान आखिर हुआ क्या?

वुहान और हैदराबाद के डॉक्टरों ने ऑपरेशन से पहले मरीज की चिकित्सीय रिपोर्टें साझा कीं और पूरी प्रक्रिया की संयुक्त योजना बनाई. हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित अस्पताल में मरीज को बेहोशी की दवा दी गई और उसे चीनी कंपनी मेडबॉट द्वारा विकसित रोबोटिक सर्जिकल प्रणाली से जोड़ा गया.

रोबोटिक भुजाएं और उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे छोटे चीरे के जरिए मरीज के शरीर में डाले गए. उसी समय वुहान में बैठे डॉ. गाउस अपने नियंत्रण कक्ष पर हैदराबाद से आ रही सीधी त्रि-आयामी तस्वीर देख रहे थे. उनके हाथों की हर हरकत 5जी नेटवर्क के जरिए तुरंत हैदराबाद पहुंच रही थी और रोबोटिक भुजाएं उसी हिसाब से काम कर रही थीं.

डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान नेटवर्क विलंब सिर्फ 63 मिलीसेकंड रहा. तुलना के लिए इंसान की एक पलक झपकने में लगभग 150 से 400 मिलीसेकंड का समय लगता है.

हालांकि पूरी प्रक्रिया के दौरान हैदराबाद में स्थानीय सर्जिकल टीम मरीज के पास मौजूद रही ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हस्तक्षेप किया जा सके.

डॉ. गाउस ने कहा, “मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं अपने ही ऑपरेशन थिएटर में बैठा हूं. मशीन की प्रतिक्रिया और नियंत्रण इतने सहज थे कि पूरी प्रक्रिया बेहद सरल रही.”

इस मरीज को ही क्यों चुना गया?

दिलचस्प बात यह है कि डॉक्टरों के अनुसार मरीज को किसी विशेष चिकित्सीय स्थिति के कारण नहीं चुना गया था. डॉ. गाउस एक चिकित्सा सम्मेलन के सिलसिले में चीन गए हुए थे और उन्होंने वहां से यह सर्जरी करने की संभावना पर काम किया.

उन्होंने कहा, “हम रोज एक-दो रोबोटिक सर्जरी करते हैं. हमारे पास यह मरीज था और दूर से सर्जरी करने की तकनीकी संभावना भी थी. मरीज ने सहमति दी और हमने यह प्रक्रिया कर दी.”

जो सर्जरी की गई उसमें मूत्रवाहिनी को दोबारा मूत्राशय से जोड़ा गया.

डॉक्टरों के मुताबिक यह क्यों महत्वपूर्ण है?

डॉ. गाउस मानते हैं कि इस तकनीक का सबसे बड़ा असर भविष्य में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की पहुंच पर पड़ेगा. संस्थान की भारत में कई शाखाएं हैं, जिनमें चेन्नई, विशाखापत्तनम, सिलिगुड़ी और हैदराबाद शामिल हैं. उनका कहना है कि आने वाले समय में विशेषज्ञ सर्जन बिना यात्रा किए दुनिया के किसी भी हिस्से में ऑपरेशन में मदद कर सकेंगे.

उन्होंने कहा, “अगर किसी दूरदराज अस्पताल में रोबोट मौजूद है और वहां के डॉक्टर को विशेषज्ञ मदद चाहिए, तो मैं कहीं से भी बैठकर सर्जरी में सहयोग कर सकता हूं.”

उनके मुताबिक यह तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है जो बड़े शहरों तक नहीं पहुंच सकते या जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है.

उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि किसी छोटे शहर या दूरदराज इलाके के अस्पताल में रोबोट मौजूद है, लेकिन विशेषज्ञ सर्जन नहीं. ऐसे में हजारों किलोमीटर दूर बैठा डॉक्टर उस मरीज को वही विशेषज्ञता दे सकता है.”

‘सर्जरी का भविष्य सीमाओं से परे है’

यह सर्जरी चीन के टोंगजी अस्पताल और एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी के बीच सहयोग का हिस्सा थी. टोंगजी अस्पताल चीन के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक माना जाता है, जबकि यह संस्थान एशिया का सबसे बड़ा एकल-विशेषज्ञता यूरो-नेफ्रोलॉजी केंद्र है.

इस उपलब्धि पर भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी प्रतिक्रिया दी और इसे “सीमाओं से परे जीवन बचाने वाली चिकित्सा” बताया.

डॉ. गाउस के लिए यह अनुभव भविष्य की झलक जैसा था.

उन्होंने कहा, “जो कभी कल्पना लगता था, वह अब चिकित्सीय वास्तविकता बन चुका है. सर्जरी का भविष्य सिर्फ कम चीरे वाली प्रक्रिया नहीं, बल्कि सीमाओं से परे है.”

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