मणिपुर: पहाड़ियों से लेकर घाटियों तक, विभाजन बहुत गहरा हो चुका है
वर्ष 2023 में, उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य मणिपुर मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा से पूरी तरह बिखर गया था. तब से लेकर अब तक 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, हज़ारों लोग विस्थापित हुए हैं, और पूरे के पूरे पड़ोस 'बफ़र ज़ोन' (मध्यवर्ती क्षेत्रों) और सुरक्षा चौकियों में बंट गए हैं. अप्रैल में हुई ताज़ा हिंसा ने इस संकट को एक बार फिर भड़का दिया है.
एक भयानक विस्फोट में दो बच्चों की मौत से लेकर, न्याय की मांग को लेकर महिलाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों और अफवाहों द्वारा हिंसा को हवा दिए जाने के तरीकों तक—बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव और देवाशीष कुमार ने ज़मीनी स्तर से रिपोर्ट की है. उन्होंने उस गहरे दुख को कैमरे में कैद किया है जो धुंधला होने का नाम नहीं ले रहा, और उस संघर्ष को दिखाया है जो तीन साल बाद भी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है.
पहाड़ियों से लेकर घाटियों तक, यह विभाजन बहुत गहरा हो चुका है. राहत शिविर अब स्थायी ठिकाने बन चुके हैं. भरोसा टूट चुका है और डर का साया बना हुआ है. राजनीतिक वादे तो अपनी जगह हैं, लेकिन मणिपुर के कई लोगों के लिए यह ज़ख्म अब भी अधूरा है.

