‘अब सरकार हमारी बात सुनती है’: बजरंग दल मुंबई के स्वतंत्र चर्चों पर हमले तेज कर रहा है

श्रीनाथ राव ने ‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित अपने लेख में लिखा है कि मार्च से अगस्त 2026 के बीच मुंबई और आसपास के इलाकों में बजरंग दल तथा उससे जुड़े हिंदुत्ववादी संगठनों ने छोटे स्वतंत्र चर्चों की प्रार्थना सभाओं को बार-बार बाधित किया और उन पर जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए.  उनके मुताबिक,  इस दौरान कम से कम 14 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जबकि मुंबई और वसई पुलिस ने चर्च के पादरियों और सदस्यों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज कीं. इनमें से अधिकांश मामले महाराष्ट्र के अंधविश्वास और काला जादू विरोधी कानून के तहत दर्ज किए गए, क्योंकि जबरन धर्मांतरण को अपराध बनाने वाला महाराष्ट्र का कानून 30 जुलाई 2026 को लागू हुआ.

19 जुलाई को मुंबई के मारोल इलाके में बजरंग दल के करीब 20 कार्यकर्ताओं ने एक होटल में हो रही असेंबली ऑफ बिलीवर्स चर्च की प्रार्थना सभा के बाहर प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वहां हिंदुओं का धर्मांतरण कराया जा रहा है और पुलिस से सभा रुकवाने की मांग की. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर एक बाइक सवार, ऑटो रिक्शा और घटनाक्रम रिकॉर्ड कर रहे एक पादरी के साथ मारपीट की. बाद में पांच बजरंग दल कार्यकर्ताओं और 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई.

अप्रैल से बजरंग दल लगभग हर रविवार को मुंबई और वसई में होने वाली प्रार्थना सभाओं को निशाना बना रहा है. संगठन सोशल मीडिया पर सभाओं की जानकारी हासिल कर वहां पहुंचता है और पुलिस को कथित धर्मांतरण की शिकायत करता है. कई चर्च स्कूलों, कॉलेजों, बैंक्वेट हॉल और किराए के अन्य स्थानों पर प्रार्थना सभाएं करते हैं.

विवाद का एक प्रमुख कारण ईसाई प्रार्थनाओं में होने वाली ‘हीलिंग’ यानी उपचार की प्रार्थनाएं हैं. बजरंग दल का आरोप है कि इन प्रार्थनाओं के जरिए बीमारियों को ठीक करने के नाम पर हिंदुओं का धर्मांतरण कराया जाता है. चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि ये सामान्य धार्मिक प्रार्थनाएं हैं और किसी दूसरे धर्म को अपमानित करने का उद्देश्य नहीं होता.

12 अप्रैल को वसई में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मसिह एकता फाउंडेशन की प्रार्थना सभा में प्रवेश किया, जिसके दौरान झड़प हुई. पुलिस ने पादरी रवि गुप्ता पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और छूकर बीमारी ठीक करने के दावे करने का मामला दर्ज किया, जबकि एक चर्च कर्मचारी की शिकायत पर बजरंग दल के दो सदस्यों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ. इसके बाद फाउंडेशन ने वसई में अपनी प्रार्थना सभाएं बंद कर दीं.

10 मई को मालाड में एक स्कूल में प्रार्थना सभा को लेकर भी मामला दर्ज हुआ. बाद में महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने विधानसभा में बताया कि पुलिस जांच में जबरन धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला.

जून में घाटकोपर में इमैनुएल वर्शिप मिनिस्ट्री की सभा में भी बजरंग दल कार्यकर्ता पहुंचे. पुलिस ने चार लोगों पर अंधविश्वास फैलाने का मामला दर्ज किया. चर्च के सहायक पादरी अर्जुन चव्हाण ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रार्थना के दौरान किसी को बीमारी ठीक होने का दावा करके धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जाता.

28 जून को सांताक्रूज ईस्ट में पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज करने से इनकार करने के बाद बजरंग दल ने पुलिस पर ही पक्षपात का आरोप लगाया और एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर चर्च के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने की चेतावनी दी. स्थानीय चर्च नेताओं के अनुसार, लगातार घटनाओं के कारण दो सप्ताह तक प्रार्थना सभाएं रोकनी पड़ीं और बाद में पुलिस सुरक्षा में उन्हें फिर शुरू किया गया.

12 जुलाई को भाजपा की मुंबई पार्षद सीमा शिंदे समर्थकों के साथ बोरीवली ईस्ट के एक कॉलेज में चल रही प्रार्थना सभा में पहुंचीं. उन्होंने धर्मांतरण के आरोप लगाते हुए पुलिस से एफआईआर की मांग की. हालांकि, एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, कथित धर्मांतरण के लिए प्रलोभन दिए जाने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया.

9 अगस्त को भयंदर में भी बजरंग दल और सकल हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा बाधित करने की कोशिश की. पुलिस ने कहा कि उसे जबरन धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला और स्थिति गलतफहमी के कारण तनावपूर्ण हुई थी. इसके बाद शांति भंग करने के आरोप में हिंदुत्ववादी समूह के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार घटनाओं ने मुंबई के छोटे चर्चों और ईसाई समुदाय में भय पैदा किया है. कई चर्चों ने सुरक्षा बढ़ा दी है, नए सदस्यों की पहचान जांचने, रजिस्टर रखने और सीसीटीवी लगाने जैसे कदम उठाए हैं. कुछ चर्चों के लिए लगातार विरोध के कारण प्रार्थना के लिए किराए का स्थान मिलना भी मुश्किल हो रहा है.

मुंबई फॉर पीस समेत नागरिक संगठनों ने पुलिस को ज्ञापन देकर आरोप लगाया है कि बजरंग दल की गतिविधियों पर निष्क्रियता ने उसे और अधिक आक्रामक होने का हौसला दिया है. वहीं, बजरंग दल से जुड़े निलेश सिंह ने कहा कि संगठन अब कथित धर्मांतरण के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाता है. उनके शब्दों में, “अब सरकार हमारी बात सुनती है.”

रिपोर्ट में पुलिस और चर्च प्रतिनिधियों के बयानों से यह सवाल उठता है कि जबरन धर्मांतरण के ठोस प्रमाण नहीं मिलने के बावजूद धार्मिक सभाओं में बार-बार हस्तक्षेप और आरोपों का सिलसिला क्यों जारी है. लगातार बढ़ती ऐसी घटनाएं मुंबई में धार्मिक स्वतंत्रता, पुलिस की भूमिका और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.

श्रीनाथ राव मुंबई में स्वतंत्र पत्रकार और लेखक हैं. यह लेख उनके अंग्रेजी लेख का हिंदी में अनुदित अंश है.

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