‘हिंदुओं को आरएसएस से कुछ सीखने की जरूरत नहीं’: प्रियंक खड़गे ने धर्म के नाम पर अवैध गतिविधियों का आरोप लगाया
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला करते हुए उस पर धर्म के नाम पर “अवैध गतिविधियां” करने का आरोप लगाया है. उन्होंने आरएसएस को “बिना पंजीकरण वाली मनी लॉन्ड्रिंग इकाई” भी बताया. खड़गे ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित 1,000 किलोमीटर की पदयात्रा को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में की.
खड़गे ने दिग्विजय सिंह को “कट्टर सनातनी” बताते हुए हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच अंतर की बात कही. उन्होंने कहा कि आरएसएस करीब 100 साल पुराना संगठन है, जबकि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से मौजूद है. आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को हुई थी.
खड़गे ने कहा कि आरएसएस ने हिंदुत्व की अवधारणा को आगे बढ़ाया, जबकि हिंदू धर्म उससे बहुत पुराना है. इसी आधार पर उन्होंने कहा कि हिंदुओं को आरएसएस से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन धर्म के नाम पर ऐसी गतिविधियां कर रहा है, जिन्हें वे अवैध मानते हैं.
खड़गे ने 13 जून को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे अपने पत्र का भी जिक्र किया. उन्होंने पूछा था कि देशभर में व्यापक संगठनात्मक मौजूदगी का दावा करने वाला आरएसएस बिना औपचारिक पंजीकरण के कैसे काम कर रहा है. यह पत्र आरएसएस को लेकर खड़गे की ओर से उठाया गया पहला बड़ा कानूनी कदम बताया गया था.
इससे पहले 10 जून को खड़गे ने यह सवाल भी उठाया था कि आरएसएस से जुड़े सवालों के जवाब भाजपा नेता क्यों देते हैं. उन्होंने आरएसएस नेताओं को उन्हें अपने कार्यालय बुलाने या खुद उनके कार्यालय आने का न्योता दिया था, ताकि संगठन के औपचारिक पंजीकरण से जुड़े सवालों पर स्पष्टीकरण दिया जा सके.
खड़गे ने इससे पहले आरएसएस पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उसके वित्तीय संचालन पर सवाल उठाए थे. उन्होंने संगठन से जुड़े 2,500 से अधिक संबद्ध संगठनों के नेटवर्क के जरिए देश और विदेश में गतिविधियों के लिए धन जुटाने के तरीके पर भी सवाल किया था.
हालांकि, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले साल कहा था कि संगठन एक मान्यता प्राप्त “बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स” के रूप में काम करता है. उन्होंने कहा था कि आरएसएस को मिलने वाली ‘गुरुदक्षिणा’ को आयकर से छूट मिली हुई है और अदालतों ने संगठन की इस स्थिति को मान्यता दी है.
इस तरह आरएसएस की कानूनी स्थिति, उसके पंजीकरण और वित्तीय संचालन को लेकर खड़गे के आरोपों और संगठन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बीच राजनीतिक विवाद जारी है.

