सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी :सीजेआई सूर्यकांत

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने और कैसे किया.

मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी. यह सुनवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हुई. वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग पर फॉर्म 6 में “गैरकानूनी बदलाव” करने का आरोप लगाया.

फॉर्म 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है. एसआईआर के दौरान पहली बार आयोग के ऑनलाइन संस्करण में एक अतिरिक्त हिस्सा जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से उसके माता-पिता की पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी. हालांकि, नियमों के तहत निर्धारित मूल फॉर्म में औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था.

गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि दिल्ली में एसआईआर के दौरान फॉर्म 6 में दो नई शर्तें जोड़ी गई थीं और इन बदले हुए फॉर्म को इस्तेमाल के लिए जारी किया गया. उन्होंने कहा कि नए फॉर्म के आधार पर लोगों को नोटिस भी जारी किए गए और कुछ याचिकाकर्ताओं को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया.

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है. उन्होंने यह भी कहा कि जब चुनाव आयोग अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखेगा, तब अदालत यह देखेगी कि फॉर्म में किसने क्या बदलाव किया.

द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर पूरा होने वाले राज्यों में अपने ईसीआईनेट पोर्टल से फॉर्म 6 के साथ जोड़ी गई एसआईआर घोषणा को हटा दिया है. आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे.

आयोग ने यह भी कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है और एसआईआर अवधि समाप्त होने के बाद नियमों के अनुसार निर्धारित फॉर्म लागू होंगे.

मामले में अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में ईसीआईनेट पोर्टल पर फॉर्म 6 में डिजिटल बदलाव किया गया. याचिका के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए तत्काल वापस लेने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद बदला हुआ फॉर्म कुछ समय तक पोर्टल पर उपलब्ध रहा.

याचिका में दावा किया गया है कि पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं के लिए वैधानिक फॉर्म 6 में बिना किसी विधायी अधिकार या मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन के बदलाव किया गया. याचिका में इसे चुनाव आयोग के भीतर बहुमत की ओर से “अनधिकृत और अवैध” माना जाना भी बताया गया है.

याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मतदाता सूची में जानबूझकर हेरफेर करने का आरोप लगाते हुए इसे उनके आधिकारिक दायित्वों से बाहर की कार्रवाई बताया है. हालांकि, ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इन पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई चुनाव आयोग की रिपोर्ट और फॉर्म 6 में किए गए बदलावों से जुड़े तथ्यों के सामने आने के बाद महत्वपूर्ण होगी.

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