वाराणसी पुलिस ने गंगा में नाव पर चिकन पकाने और बीयर पीने के आरोप में पांच को गिरफ्तार किया, सभी हिंदू

एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि वाराणसी में गंगा नदी के बीचों-बीच एक नाव पर कथित तौर पर चिकन पकाने और बीयर पीने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

दशाश्वमेध एसीपी अतुल अंजन त्रिपाठी ने कहा कि जांच के बाद, इसमें शामिल लोगों की पहचान की गई, उन्हें जेल भेज दिया गया और नाव को जब्त कर लिया गया. ‘पीटीआई’ के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान दीपक कुमार, अजय सहनी, अरुण कुमार सहनी,  अनुराग निषाद और राहुल सहनी के रूप में हुई है. इन सभी की उम्र 25 से 32 साल के बीच है.

याद हो कि इसके पहले वाराणसी में इसी वर्ष मार्च में 14 लोगों को रमज़ान के दौरान गंगा नदी में एक नाव पर इफ़्तार पार्टी करने के लिए गिरफ्तार किया गया था.इसका एक वीडियो वायरल होने और भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा भाजयुमो के शहर अध्यक्ष की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई थी. करीब दो माह बाद मई में इन सभी 14 आरोपियों को जमानत पर रिहा किया गया था. तब भाजयुमो नेता ने कहा था कि पुलिस की इस कार्रवाई से “मुस्लिम युवकों को सबक हासिल होगा.” संयोग देखिए इस बार गंगा के बीचोबीच नाव पर चिकन पकाने और बीयर पीने के मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी हिंदू हैं.

गिरफ्तारी और बयानों में विसंगति, चूंकि नाव भाजपा नेता की थी... 

इस बीच ‘द वायर’ के अनुसार, वाराणसी में गंगा नदी की एक नाव पर चिकन पकाने और बीयर पीने के कथित पुराने वीडियो के आधार पर पुलिस ने जिन पांच युवकों को गिरफ्तार किया, उन्हें मंगलवार को ₹20,000 के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई. इस मामले में पुलिस के दावों में विसंगति दिखी है; जहाँ 23 जून को दर्ज एफआईआर में गंगा में मांस-मदिरा के सेवन से धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है, वहीं अदालत में पेश पुलिस चालान में वीडियो का कोई जिक्र नहीं है, बल्कि पर्यटकों से बहस कर शांति भंग करने (बीएनएसएस की धारा 170) की बात कही गई है. यह नाव कथित तौर पर एक भाजपा नेता की है, जिसकी जांच जारी है.

वकील विकास सिंह के अनुसार, यह मामला मार्च में रमजान के दौरान नाव पर मांस पकाने वाले 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी से मिलता-जुलता है. हालांकि, मुस्लिम युवकों को निचली अदालत से जमानत नहीं मिली थी क्योंकि उन पर नाव छीनने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, जबकि मौजूदा मामले में कम सजा वाली धाराएं लागू की गईं.

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