बंगाल : ‘एसआईआर’ की आड़ में अब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या भी कम की जा रही

23 जून, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की 'पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को कलकत्ता हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया. कृषि मजदूरों और छोटे किसानों के इस संगठन ने राज्य की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार की उन दो अधिसूचनाओं को चुनौती दी है, जो सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ को 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के नतीजों से जोड़ते हैं.

‘द हिंदू’ में शिव सहाय सिंह के अनुसार, पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 4 जून, 2026 को एक आदेश जारी किया, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के आधार पर अपात्र सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) लाभार्थियों की पहचान करना और उन्हें हटाना है. इसके लिए पांच प्रमुख श्रेणियां तय की गईं:

1. दिसंबर 2025 की ड्राफ्ट लिस्ट में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट (एएसडीडी) मतदाता.

2. एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सुनवाई के बाद खारिज किए गए अनमैप्ड मामले.

3. ड्राफ्ट लिस्ट के प्रकाशन के बाद दूसरी सूची से हटाए गए लोग.

4. न्यायिक निर्णय के बाद हटाए गए नाम.

5. विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान वोटर स्लिप वितरण के समय अनुपस्थित या मृत पाए गए लोग.

यह आदेश न केवल एसआईआर बल्कि मतदान से ठीक पहले बांटी जाने वाली वोटर स्लिप के दौरान मिले आंकड़ों के आधार पर भी 15 जून तक मात्र 12 दिनों के भीतर लाभार्थियों के नाम हटाने का निर्देश देता है.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पीडीएस 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013' के तहत एक वैधानिक अधिकार है, जो नागरिकों को भोजन की गारंटी देता है. किसी चुनावी या कार्यकारी प्रक्रिया (जैसे एसआईआर) के आधार पर नागरिकों को इस बुनियादी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. उन्होंने मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के 'बिहार एसआईआर' फैसले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग की जांच केवल चुनावी पात्रता तक सीमित है और इसका असर अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर नहीं होना चाहिए.

इसी तरह का एक अन्य आदेश 19 मई, 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी किया गया, जिसमें पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार की 'लक्ष्मी भंडार योजना' के लाभार्थियों को नई 'अन्नपूर्णा योजना' में स्थानांतरित करने की बात कही गई है. हालांकि, इसमें भी एसआईआर के तहत हटाए गए या अनुपस्थित (एएसडीडी) लोगों को बाहर रखने का प्रावधान है. राहत की बात केवल यह है कि सीएए ट्रिब्यूनल में अपील करने वालों को फैसला आने तक लाभ मिलता रहेगा.

पश्चिम बंगाल में नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच चली एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जिनमें से 34 लाख लोगों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है.

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने लक्ष्मी भंडार योजना के लाभ को ₹1,500 से बढ़ाकर अन्नपूर्णा योजना के तहत ₹3,000 करने का वादा किया था. चुनाव से पहले लक्ष्मी भंडार के 2.2 करोड़ लाभार्थी थे. चुनाव के बाद सरकार ने सभी के लिए 12 पन्नों का फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया. 22 जून को पेश बजट में योजना के लिए ₹36,000 करोड़ आवंटित किए गए, जिससे स्पष्ट है कि लाभार्थियों की संख्या घटकर आधी (लगभग 1 करोड़) रह जाएगी.

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, पिछली सरकार में करीब 30 लाख अपात्र लोग इसका लाभ ले रहे थे. सरकार का तर्क है कि वह केवल अवैध नागरिकों और मृत लोगों को हटा रही है, जबकि आलोचकों का मानना है कि 'एसआईआर' को जानबूझकर सामाजिक कल्याण योजनाओं से लाभार्थियों की संख्या कम करने के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

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