45 दिनों में 70 'चोरी' के मामले: राम मंदिर चढ़ावा जांच में एसआईटी के चौंकाने वाले निष्कर्ष

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, सुरक्षा प्रोटोकॉल और नकदी गिनती की प्रक्रिया में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 45 दिनों की उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में कथित चोरी या गबन की 70 घटनाओं की पहचान की गई. एसआईटी का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में मौजूद कई संस्थागत कमियां जिम्मेदार दिखाई देती हैं.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के पत्रकार भूपेंद्र पांडेय और मनीष साहू की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सामने आए शुरुआती निष्कर्ष मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा, निगरानी और गिनती व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

एसआईटी की रिपोर्ट की प्रमुख बातें

1. निगरानी और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही

एसआईटी ने पाया कि चढ़ावे की गिनती से जुड़े कई कर्मचारियों ने निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यवेक्षण में गंभीर चूक हुई, जिससे कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं.

जांच में यह भी सामने आया कि दान पेटियों की चाबियां रखने या उन तक पहुंच नियंत्रित करने का काम बिना किसी लिखित अधिकृत आदेश के कुछ व्यक्तियों के हाथों में था. इनमें आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम भी शामिल है, जिन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय का करीबी बताया गया है.

रिपोर्ट में मामले में गिरफ्तार गिनती प्रभारी और दान पेटियां खुलवाने की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले सुभाष श्रीवास्तव को भी इस अनौपचारिक व्यवस्था को जारी रखने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.

2. सीसीटीवी निगरानी में बड़ी खामियां

गिनती कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद ट्रस्ट के कर्मचारियों ने लाइव फुटेज की प्रभावी निगरानी नहीं की.

सीसीटीवी रिकॉर्डिंग केवल 27 अप्रैल से 6 जून तक यानी 45 दिनों के लिए सुरक्षित रखी गई थी, जबकि पहले के ऑडिट में इसे 180 दिनों तक सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी. इसी सीमित अवधि की फुटेज में एसआईटी ने कथित चोरी या गबन की 70 घटनाओं की पहचान की.

एसआईटी का कहना है कि संभव है कि कथित चोरी की घटनाएं 27 अप्रैल से पहले भी हो रही हों, लेकिन पुरानी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी.

उपलब्ध फुटेज में कई बार कुछ कर्मचारी गिनती के दौरान नोटों की गड्डियां और नकदी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों या अन्य छिपे हुए स्थानों में रखते हुए दिखाई दिए. रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में अन्य कर्मचारी भी उनकी मदद करते या उन्हें बचाने की कोशिश करते नजर आए.

3. सुरक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर विफलता

एसआईटी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर कमियों के कारण कथित चोरी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई.

  • कर्मचारियों की गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलते समय पर्याप्त तलाशी नहीं ली गई.

  • निर्धारित ड्रेस कोड का सख्ती से पालन नहीं कराया गया.

  • कर्मचारियों के निजी सामान को अंदर ले जाने पर प्रभावी रोक नहीं थी.

  • प्रत्येक हुंडी का चढ़ावा अलग-अलग नहीं गिना गया.

  • नोटों के मूल्यवर्ग के अनुसार उचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया.

4. गिनती प्रक्रिया के दौरान एसओपी का पालन नहीं हुआ

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट और बैंक के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद पूरी प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी नहीं की गई.

सितंबर 2024 में लागू व्यवस्था के तहत गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय सभी कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी होती थी. लेकिन 6 फरवरी 2025 को जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में इस नियम को बदल दिया गया और तलाशी केवल समय-समय पर या यादृच्छिक आधार पर करने की अनुमति दी गई.

एसआईटी ने कहा कि इस बदलाव की परिस्थितियों की गहराई से जांच की जानी चाहिए, क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक बाद में सीमित स्तर पर तय की गई तलाशी भी नियमित रूप से नहीं की गई.

रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने सितंबर 2024 की व्यवस्था और फरवरी 2025 की एसओपी तैयार करने में ट्रस्ट की ओर से बैंक के साथ समन्वय किया था. एसआईटी के अनुसार, उनसे सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा थी, लेकिन लगातार निगरानी, समीक्षा और प्रभावी पर्यवेक्षण के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले.

5. चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं

एसआईटी ने तीनों माध्यमों हुंडी, काउंटर और गर्भगृह में प्राप्त चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन में निर्धारित प्रक्रियाओं के व्यापक उल्लंघन की बात कही है. रिपोर्ट के अनुसार नकदी और अन्य चढ़ावे के दस्तावेजीकरण, अलग-अलग रिकॉर्ड रखने और सुरक्षित हस्तांतरण की व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं.

जांच में सामने आया कि नियमों के अनुसार प्रत्येक दान पेटी का चढ़ावा अलग-अलग दर्ज और गिना जाना था, लेकिन व्यवहार में अलग-अलग हुंडियों की नकदी को पहले एक साथ मिला दिया जाता था और उसके बाद गिनती होती थी.

इसके अलावा, नकदी को ले जाने वाले बक्सों की नंबरिंग और ट्रैकिंग की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी. इस कारण यह पता लगाना संभव नहीं था कि कौन-सा बक्सा किस हुंडी से, किस दिन आया, कितने बक्सों की गिनती हो चुकी है और कितने अभी बाकी हैं.

एसआईटी ने कहा कि मंदिर में बड़ी मात्रा में आने वाले सार्वजनिक चढ़ावे को देखते हुए यह स्थिति ऑडिट, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से एक गंभीर कमजोरी है.

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