सरकार कोर्ट की आड़ ले रही: मांगों के पूरा न होने पर सीजेपी ने दी नए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
केंद्र सरकार ने अभी तक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को लिखित आश्वासन नहीं दिया है, और संगठन ने अब चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वह फिर से एक नया राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा.
सीजेपी ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के अपने वादे से बचने के लिए संगठन के आंदोलन से जुड़ी जनहित याचिकाओं के एक समूह में उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के अंतरिम आदेश का हवाला दे रही है.
संगठन ने "पूर्ण जवाबदेही" की अपनी मांग दोहराई और संसद से 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान हुई कथित पुलिस बर्बरता पर बहस करने का आह्वान किया. सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ को बताया कि इसमें "न केवल पुलिस, बल्कि गृह मंत्री की भी जिम्मेदारी तय करना" शामिल है.
दास ने कहा कि मंगलवार को बातचीत के दौरान सरकार के प्रतिनिधियों ने संगठन को सूचित किया कि यह मामला अब "न्यायाधीन" हो गया है.
दास ने कहा, “वे अब उस आदेश का इस्तेमाल कर रहे हैं और इस देश के युवाओं को दी गई गारंटियों से पीछे हटना चाहते हैं. यदि सरकार अपने शब्द और समझौतों का सम्मान नहीं करती है, तो हम न केवल दिल्ली में, बल्कि देश भर में फिर से एक बड़े आंदोलन का आह्वान करने के लिए मजबूर होंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “इस बार, जब इस देश का युवा लक्षित किए जा रहे अपने साथी युवाओं के समर्थन में सड़कों पर उतरेगा, तो वे तब तक वापस नहीं लौटेंगे जब तक कि पूरी जवाबदेही तय नहीं हो जाती.”
‘फास्ट-ट्रैक अदालतें एक बैंड-एड मात्र’
दास ने परीक्षा में धांधली के खिलाफ कानूनों को कड़ा करने पर चर्चा का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि संसद को 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाइयों पर भी ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि संसद 20 जुलाई को हुई पुलिस बर्बरता पर भी चर्चा करेगी—कि कैसे लोगों के सिर फोड़े गए, कैसे पैलेट गन से लोगों की आंखों की रोशनी छीन ली गई (वे अंधे हो गए). जवाबदेही सिर्फ पुलिस की ही नहीं, बल्कि उस गृह मंत्री की भी तय होनी चाहिए जो दिल्ली में इस सब की निगरानी कर रहे थे.” उन्होंने कहा, “सिस्टम को समग्र रूप से बदलने की जरूरत है. जवाबदेही तय होनी ही चाहिए.”
जयपुर में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यह "शर्म की बात" है कि सरकार अपने पहले दिए गए आश्वासनों पर कार्रवाई करने में विफल रही है.
उन्होंने कहा, “25 जुलाई को यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. यदि किसी केंद्रीय मंत्री के शब्द का कोई मूल्य नहीं है, तो हम नहीं जानते कि किसके शब्द का मूल्य है.” रांका ने मांग की कि सरकार समझौते का सम्मान करे और लिखित प्रतिबद्धता प्रदान करे.

