‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ रामलीला मैदान में हुई विपक्ष की रैली, उसकी राजनीतिक अहमियत और आंदोलन की भावी रणनीति पर चर्चा की. गर्ग ने इस रैली को पिछले 52 वर्षों में विपक्ष के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शनों में से एक बताया. हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष इस जुटान को एक ठोस और निरंतर आंदोलन में बदल पाएगा?
श्रवण गर्ग ने 25 जून 1975 को रामलीला मैदान में हुई जयप्रकाश नारायण की सभा का जिक्र करते हुए बताया कि वह स्वयं उस सभा में मौजूद थे. अपनी स्मृतियों के आधार पर उन्होंने कहा कि पिछले 52 वर्षों में उन्होंने विपक्ष की इतनी बड़ी रैली नहीं देखी. उनके मुताबिक, इस बार बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल हुए, जो सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं थे. उन्होंने कहा कि भीड़ की संख्या पर बहस करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि वहां जुटे लोग सरकार के लिए चिंता का कारण क्यों बन रहे हैं.
हालांकि, गर्ग ने रैली के बाद विपक्ष की ओर से कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं रखे जाने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि लोग अपनी दिवाली छोड़कर रामलीला मैदान पहुंचे, लेकिन उन्हें भाषणों के अलावा आगे की लड़ाई के लिए कोई ठोस दिशा नहीं मिली. उनके अनुसार, केवल भीड़ जुटाना पर्याप्त नहीं है. आंदोलन में शामिल लोगों को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनकी भागीदारी के बाद संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ेगा और उनकी अगली जिम्मेदारी क्या होगी.
गर्ग ने रैली में विपक्षी नेताओं के भाषणों को भी दोहराव वाला बताया. उनका मानना था कि अलग-अलग नेताओं ने अपने राज्यों और राजनीतिक मुद्दों पर बात की, लेकिन पूरे देश के लिए कोई साझा राजनीतिक दृष्टि सामने नहीं आई. उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व को मिल रही स्वीकार्यता का उल्लेख किया, लेकिन कहा कि इसे सामूहिक नेतृत्व में बदलना जरूरी है. विपक्ष का पूरा आंदोलन केवल राहुल गांधी के इर्द-गिर्द नहीं रहना चाहिए.
आंदोलन की भावी रणनीति पर गर्ग ने कहा कि इसे दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय जिलों और छोटे शहरों तक ले जाना होगा. विपक्षी दलों को मिलकर लोगों के बीच जाना चाहिए और लगातार कार्यक्रमों के जरिए सरकार पर दबाव बनाए रखना चाहिए. उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसक आंदोलन पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसक विरोध को अधिक सक्रिय, संगठित और निरंतर बनाने की जरूरत है.
गर्ग के मुताबिक, रामलीला मैदान की रैली ने विपक्ष की ताकत तो दिखाई है, लेकिन उसकी असली परीक्षा अब शुरू होगी. लोगों की उम्मीदों को बनाए रखने के लिए विपक्ष को बिना देरी किए अगला कार्यक्रम घोषित करना होगा.
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