5 छात्र निलंबित, 25 के खिलाफ मामला दर्ज: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘भगवाकरण’ का विरोध, मुस्लिम छात्रों को निशाना बनाने का आरोप

मकतूब मीडिया में प्रकाशित अशफाक ईजे की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथित ‘भगवाकरण’ के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच छात्रों को दो सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस ने 25 अन्य छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन मुस्लिम छात्रों को निशाना बना रहा है और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में संघ परिवार की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है.

विवाद वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को लेकर शुरू हुआ. गुरुवार शाम जारी निलंबन आदेश में पांच छात्रों को तत्काल छात्रावास खाली कर परिसर छोड़ने का निर्देश दिया गया. इसके बाद छात्रों ने प्रॉक्टर के. श्रीकुमार से आदेश वापस लेने और उनके इस्तीफे की मांग की. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को छोड़कर अन्य छात्र संगठनों ने प्रशासनिक भवन का घेराव किया. शुक्रवार को भी कक्षाओं का बहिष्कार जारी रहा.

निलंबित छात्रों में एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई के सचिव सैयद अली, एनएसयूआई अध्यक्ष मोहम्मद यासीन एस, एसएफआई सचिवालय सदस्य आवेद वीबी और मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन के कार्यकर्ता शबीर तथा तकियुद्दीन शामिल हैं. एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ सांप्रदायिक आधार पर कार्रवाई की गई है. हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है.

बेकल पुलिस ने संगोष्ठी में व्यवधान डालने के आरोप में 25 छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया. पुलिस के अनुसार, छात्रों ने नारेबाजी की, माइक्रोफोन बंद किया और कार्यक्रम रद्द करने की मांग की. छात्रों ने इसके विपरीत आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने से रोका और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया. एसएफआई नेताओं के मुताबिक, कुछ छात्रों को चोटें भी आईं.

संगोष्ठी में आरएसएस से जुड़े वक्ता को बुलाने पर विवाद

संगोष्ठी का आयोजन साहित्य अकादमी, आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय साहित्य परिषद और विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बौद्धिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार मुख्य वक्ता थे. छात्र संगठनों ने उनकी भागीदारी को विश्वविद्यालय में संघ परिवार की राजनीति को जगह देने की कोशिश बताया.

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने प्रदर्शन के पीछे कथित साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि वंदे मातरम के खिलाफ नारेबाजी के पीछे शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए. प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध राष्ट्रवाद या वंदे मातरम के खिलाफ नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के कथित भगवाकरण के खिलाफ है.

पुरानी शिकायतों का भी हवाला

छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में पहले भी आरएसएस से जुड़े संगठनों के कार्यक्रमों को जगह दी गई और विरोध करने वाले छात्रों तथा शिक्षकों के खिलाफ चुनिंदा अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई. उन्होंने प्रॉक्टर पर एबीवीपी के प्रति पक्षपात और मुस्लिम छात्रों के साथ भेदभाव का भी आरोप लगाया. ये आरोप स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हैं. मकतूब के अनुसार, प्रॉक्टर से प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनका जवाब नहीं मिला.

छात्र संगठनों ने निलंबन वापस लेने और प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग की है. एनएसयूआई नेता मोहम्मद यासीन ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे धर्मनिरपेक्ष संस्थानों में भगवाकरण के प्रयासों का विरोध किया जाएगा. एसएफआई नेता सैयद अली ने भी कहा कि छात्रों को निलंबित करने से उनके सवाल खत्म नहीं होंगे.

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