त्रिभुवन | सुंदर पिचाई का वह भाषण, जिसकी दुनिया भर में चर्चा है

गूगल और अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने 14 जून 2026 को अमेरिका के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के 135वें दीक्षांत समारोह में जो भाषण दिया, वह दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

सुंदर पिचाई के लिए यह केवल किसी विश्वविद्यालय में दिया गया औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि यह उस संस्थान में उनकी वापसी भी थी, जहाँ वे कभी चेन्नई से आए एक युवा अंतर्राष्ट्रीय छात्र के रूप में पढ़े थे और जहाँ से उन्होंने 1995 में पदार्थ विज्ञान और अभियांत्रिकी (मटीरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग) में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी.

दुनिया इस भाषण को दो अलग-अलग कारणों से सुन और पढ़ रही है.

पहला कारण स्वयं भाषण है.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - एआई) की वैश्विक क्रांति के केंद्र में बैठे व्यक्ति से यह आशा थी कि वह इस तकनीक, भविष्य की तकनीकी प्रणालियों और बदलते रोज़गार बाज़ार पर कोई बड़ा व्याख्यान देगा. लेकिन पिचाई ने जान-बूझकर तकनीकी भविष्यवाणियों के बजाय मनुष्य के जीवन की बात की.

सुंदर ने युवाओं को तीन सरल और सुंदर नसीहतें दीं—

  1. आशावाद चुनिए,

  2. कठिन कार्यों की ओर बढ़िए,

  3. और वह काम कीजिए, जो आपको भीतर से उत्साहित करता है.

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन के प्रत्येक निर्णय को बिल्कुल सही कर लेना आवश्यक नहीं है. असली बात गिरने, भटकने और अनिश्चित होने के बावजूद निरंतर आगे बढ़ते रहना है.

दूसरा कारण वह विरोध है, जो भाषण के दौरान सामने आया.

गूगल के इज़राइल सरकार के साथ विवादित 'परियोजना निंबस' को लेकर कई विद्यार्थियों ने फिलिस्तीनी ध्वजों के साथ प्रदर्शन किया और समारोह का बहिष्कार करते हुए बाहर चले गए. इस कारण यह अवसर केवल एक दीक्षांत भाषण नहीं रहा, बल्कि वह तकनीक की शक्ति, कॉर्पोरेट उत्तरदायित्व, युद्ध, नैतिकता और युवा प्रतिरोध के टकराव का मंच भी बन गया.

इसीलिए इस भाषण को पढ़ना आवश्यक है. यहाँ एक ओर दुनिया की सबसे शक्तिशाली तकनीकी कंपनियों में से एक का प्रमुख जीवन में आशा और साहस चुनने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर युवा पीढ़ी उसी शक्ति से नैतिक जवाबदेही माँग रही है. इन दोनों के बीच यह भाषण हमारे समय का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन जाता है.

यह भाषण बहुत ही उपयोगी है और इसे यहाँ पूरी तरह प्रस्तुत किया जा रहा है. शब्दशः अनुवाद:

'क्लास 2026' के लिए दीक्षांत भाषण

अध्यक्ष लेविन, प्रोवोस्ट मार्टिनेज, न्यासीगण और वरिष्ठ कक्षा अध्यक्षगण. आज मुझे आप सबको संबोधित करने के लिए आमंत्रित करने पर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और प्रतिष्ठित ' क्लास 2026' को मेरी हार्दिक बधाई.

मुझे आप सभी को पहले ही सावधान कर देना चाहिए—यह मेरे जीवन का केवल दूसरा दीक्षांत भाषण है.

पहला भाषण मैंने सचमुच अपने घर के पिछवाड़े में दिया था.

वह 2020 की वसंत ऋतु थी. कोविड और पूर्णबंदी (लॉकडाउन) अपने चरम पर थे. हम उन स्नातकों के लिए एक यूट्यूब दीक्षांत समारोह रिकॉर्ड कर रहे थे, जिन्हें आप लोगों की तरह अपने परिवार और मित्रों के साथ स्नातक होने का उत्सव मनाने का अवसर नहीं मिल पाया था.

जब मैं उस समय को पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मुझे बहुत गहरी बेचैनी का एक दौर दिखाई देता है.

मुझे वह खाली जगह दिखाई देती है, जहाँ दर्शक होने चाहिए थे.

और मुझे बालों की वह अनगढ़ कटाई भी दिखाई देती है, जो मैंने रिकॉर्डिंग से ठीक पहले खुद अपने हाथों से की थी.

सच कहूँ तो मैं चाहता हूँ कि काश वह दृश्य मेरी याददाश्त से हमेशा के लिए मिट सकता.

लेकिन आज मेरे सामने जो दृश्य है, दीक्षांत समारोह वास्तव में ऐसा ही होना चाहिए.

स्नातक एक-दूसरे के साथ उत्सव मना रहे हैं. वे उन लोगों के साथ हैं, जिन्हें वे प्रेम करते हैं और जिन्होंने उनकी इस यात्रा में उनका साथ दिया है—आपके माता-पिता, रिश्तेदार, मित्र, प्राध्यापक और वे सभी लोग, जिन्होंने आपको इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुँचने में सहायता की.

आइए, हम उनके सम्मान में एक बार फिर ज़ोरदार तालियाँ बजाएँ.

वे सचमुच इसके अधिकारी हैं.

मैं जानता हूँ कि जिन लोगों की आप परवाह करते हैं, उनमें से हर व्यक्ति आज यहाँ उपस्थित नहीं हो पाया होगा.

आपमें से बहुत से लोग देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से यहाँ आए हैं—ठीक उसी तरह, जैसे कभी मैं आया था.

परिवारों के लिए इतनी दूर यात्रा कर पाना हमेशा संभव नहीं होता.

वास्तव में यह पहली बार है जब मेरे माता-पिता किसी ऐसे दीक्षांत समारोह में उपस्थित हुए हैं, जिसका मैं स्वयं हिस्सा हूँ.

इसलिए मैं विशेष रूप से उनका और आज यहाँ मेरे साथ मौजूद अपने पूरे परिवार का धन्यवाद करना चाहता हूँ.

मैं जानता हूँ कि आज का दिन वह दिन है, जब मुझे आप सभी को सलाह देनी है.

लेकिन पिछले कुछ समय से बहुत से लोग मुझे भी सलाह दे रहे थे कि मुझे यहाँ क्या कहना चाहिए.

असल में उनकी सलाह लगभग एक जैसी थी.

और वह सलाह इस बारे में थी कि मुझे क्या नहीं कहना चाहिए.

लोगों को लगा कि मेरे लिए उस विषय से बचना बहुत कठिन होगा—आखिर वह मेरे उपनाम के आखिरी दो अक्षर, 'एआई' (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), ही तो हैं.

लेकिन पूरी ईमानदारी से कहूँ तो मैं आज जो बातें आपके साथ साझा करना चाहता हूँ, उनके लिए वह विषय बहुत अधिक महत्वपूर्ण नहीं है.

मैंने यह सीखा है कि सबसे उपयोगी और सबसे स्थायी सलाह हमेशा तकनीक-निरपेक्ष होती है.

वह किसी एक तकनीक पर निर्भर नहीं होती.

वह आपके बारे में होती है.

उस जीवन के बारे में होती है, जिसे आप अपने लिए बनाना चाहते हैं.

और उन विकल्पों के बारे में होती है, जो आपको उस जीवन की ओर बढ़ने में सहायता करते हैं.

आपमें से कुछ लोगों को पहले से पता है कि वे अपने जीवन में क्या करना चाहते हैं.

आपको बधाई.

फिलहाल छात्र विश्रामालय को बंद होने तक वहाँ बैठकर आनंद ले लीजिए—क्योंकि एक बार नियमित रोज़गार शुरू हो गया, तो ऐसा करना अधिक कठिन हो जाएगा.

और आपमें से बहुत से लोगों को शायद बिल्कुल भी पता नहीं होगा कि वे आगे क्या करने वाले हैं.

यह भी बिल्कुल ठीक है.

मुझे याद है कि अपने स्नातक दिवस पर मैं भी अनिश्चितता से भरा हुआ था.

मुझे ऐसा लगता था कि जीवन बहुत बड़े-बड़े निर्णायक क्षणों की एक कड़ी है.

और मुझे हर क्षण में बिल्कुल सही निर्णय लेने का दबाव महसूस होता था. यह दबाव विशेष रूप से उन उच्च उपलब्धि हासिल करने वाले छात्रों पर अधिक होता है, जिन्होंने हर श्रेणी, हर शोध पत्र और हर परीक्षा के लिए पसीना बहाया है.

जिन्होंने गतिविधियों, खेल-कूद, व्यावहारिक प्रशिक्षण (इंटरर्नशिप) और अब अपने पहले रोज़गार तक—हर चीज़ का बिल्कुल सही तालमेल बनाने की कोशिश की है.

लेकिन मैं आपको एक छोटा-सा रहस्य बताना चाहता हूँ.

उस समय ये सारी बातें बहुत महत्वपूर्ण लगती हैं, लेकिन वास्तव में इनके परिणाम उतने निर्णायक नहीं होते, जितना आप समझते हैं.

आप जीव विज्ञान की उस परीक्षा में असफल हो सकते थे.

आप कोई कक्षा छोड़ सकते थे.

आप कभी कोई वाद्ययंत्र बजाना नहीं सीखते.

फिर भी बहुत संभव है कि आज आप यहीं बैठे होते.

मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ कि मैंने अपने जीवन में यह बात कैसे सीखनी शुरू की.

जब मैं यहाँ छात्र था, तब मेरा एक सहपाठी था—उसका नाम पैट था.

वह लॉन्ग बीच से आया था.

उसने एक कान में बाली पहन रखी थी, जो उस समय मुझे बहुत विद्रोही और लीक से हटकर लगती थी.

उसके पास सफेद रंग की दो दरवाजों वाली खुली कार (कन्वर्टिबल) थी.

जनवरी की एक बुधवार की सुबह थी.

वह स्टैनफोर्ड में मेरा पहला शीतकालीन सत्र था.

हम दोनों कक्षा के लिए जा रहे थे.

तभी उसने अचानक मुझसे पूछा—

"कक्षा जाने के बजाय वेगास चलना चाहोगे?"

मैंने अपने जीवन में कभी कोई कक्षा नहीं छोड़ी थी.

और निश्चित रूप से मैंने कभी ऐसी अचानक सड़क यात्रा (रोड ट्रिप) भी नहीं की थी.

वास्तव में मेरे माता-पिता भी यह कहानी आज पहली बार सुन रहे हैं.

लेकिन फिर भी मैंने कहा—

"हाँ, चलो."

हम वापस अपने छात्रावास के कमरों में गए, कुछ सामान उठाया और यात्रा पर निकल पड़े.

वेगास पहुँचने के लिए पहाड़ों के बीच से होकर जाना पड़ता था.

जब हम पहाड़ों से गुजर रहे थे, तो अचानक बर्फ गिरने लगी.

मैंने इससे पहले अपने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी.

मैंने बर्फ को पकड़ने के लिए अपना हाथ कार की खिड़की से बाहर निकाला.

बर्फ के छोटे-छोटे फाहों की कोमलता पर मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था.

पैट ने कार रोक दी, ताकि मैं बाहर निकल सकूँ.

वह दृश्य अत्यंत सुंदर था.

वह एक ऐसा क्षण है, जिसे मैं जीवनभर नहीं भूलूँगा.

हमारे निकलने के लगभग नौ घंटे बाद हमें दूर क्षितिज पर वेगास की रात की रोशनियाँ दिखाई दीं.

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उस दृश्य के बारे में क्या सोचूँ.

पैट ने मुझे ताश का एक खेल (ब्लैकजैक) खेलना सिखाया.

मैंने पाँच डॉलर से शुरुआत की और किसी तरह लगभग पन्द्रह डॉलर और जीत गया.

इसके बाद मैंने तुरंत कहा—

"बस, अब मैं बाहर."

हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम वहाँ अधिक समय तक रुक सकें.

इसलिए अगले दिन हमने वापसी की यात्रा शुरू कर दी.

दिलचस्प बात यह थी कि किसी ने यह तक ध्यान नहीं दिया कि हम कक्षा में नहीं आए थे.

पहली बार मुझे समझ आया कि यदि मैं थोड़ा तनावमुक्त हो जाऊँ, तो दुनिया समाप्त नहीं हो जाएगी.

जीवन में आपको अनेक महत्वपूर्ण क्षणों का सामना करना पड़ेगा.

उनमें से केवल कुछ ही क्षण वास्तव में इतने महत्वपूर्ण होंगे कि आपको उनमें सही निर्णय लेना आवश्यक होगा.

जैसे—

  • जीवनसाथी चुनना.

  • परिवार शुरू करना है या नहीं, इसका निर्णय लेना.

  • या आजीविका (करियर) में कोई बड़ा बदलाव करना.

ऐसे निर्णयों के लिए समय, विचार और स्पष्ट उद्देश्य की आवश्यकता होती है.

लेकिन जीवन में आपको ऐसे बहुत अधिक क्षण मिलेंगे, जो उस समय बहुत बड़े दिखाई देंगे.

वास्तव में ऐसे हज़ारों क्षण होंगे.

लेकिन उनमें से बहुत कम सचमुच जीवन बनाने या बिगाड़ने वाले होंगे.

विश्वविद्यालय के बाद आपका पहला रोज़गार कौन-सा है?

आप अगली बार किस शहर में रहने जाते हैं?

आप वह सड़क यात्रा करते हैं या नहीं?

ये क्षण आपकी जीवन-यात्रा को रंग, अनुभव और नया आयाम अवश्य देते हैं, लेकिन वे बहुत कम अवसरों पर आपके पूरे जीवन की दिशा तय करते हैं.

लेकिन यदि आप शोर के बीच से सही संदेश को पहचानना सीख लें, तो आप इन छोटे-छोटे क्षणों में भी अपने जीवन को धीरे-धीरे उस प्रभाव की दिशा में मोड़ सकते हैं, जो आप संसार पर डालना चाहते हैं. इसलिए आज मैं आपके साथ तीन ऐसे सरल मापदंड (फ़िल्टर) साझा करना चाहता हूँ, जिन्हें मैंने अपने जीवन में अपनाया है.

इन तीन मापदंडों ने मुझे गलत निर्णयों की तुलना में अधिक सही निर्णय लेने में सहायता की है.

और उन्होंने मेरे ऊपर से हर निर्णय को बिल्कुल त्रुटिहीन बनाने का दबाव भी कम किया है.

तीन मापदंड 

1. पहला मापदंड— आशावाद को चुनिए

हो सकता है कि इस समय यह बात आपको बहुत स्वाभाविक न लगे.

दुनिया इस समय अनेक कठिन परिस्थितियों से गुजर रही है—

  • वैश्विक संघर्ष,

  • आर्थिक चिंता,

  • तकनीक की पूरी संरचना में तेज़ बदलाव,

  • सूचनाओं की अति,

  • और यह सब कुछ अत्यंत तेज़ गति से हो रहा है.

आज के समाचार देखकर यह सोचना बहुत आसान है कि हम इतिहास के सबसे कठिन और सबसे चुनौतीपूर्ण समय में जी रहे हैं.

लेकिन मेरे लिए यह याद रखना उपयोगी होता है कि प्रत्येक पीढ़ी ने अपने तरीके से कठिनाइयों का सामना किया है.

हमें यह चुनने का अवसर नहीं मिलता कि हम किस प्रकार की दुनिया में स्नातक होंगे.

लेकिन हमें यह चुनने का अवसर अवश्य मिलता है कि हम अपनी परिस्थितियों को किस दृष्टि से देखते हैं.

यह बात मेरे माता-पिता ने बचपन से ही मेरे भीतर विकसित की थी.

मैं भारत के जीवंत शहर चेन्नई में बड़ा हुआ.

अधिकांश समय हमारा जीवन सुविधाजनक और संतोशजनक था.

लेकिन उन शुरुआती वर्षों में हमें कुछ कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा.

हमें भयंकर सूखे की चिंता रहती थी.

हम सोचते थे कि पानी का टैंकर समय पर आएगा या नहीं.

और हमारे जीवन में तकनीक बहुत धीरे-धीरे पहुँची.

हमें एक दूरभाष (टेलीफोन), एक टेलीविजन और एक प्रशीतक (रेफ्रिजरेटर) पाने के लिए वर्षों प्रतीक्षा करनी पड़ी.

लेकिन इन सभी चीज़ों ने हमारे जीवन को अपने-अपने ढंग से महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया.

मेरे माता-पिता ने कभी हमारी सीमित परिस्थितियों को मेरी कल्पना की सीमा नहीं बनने दिया. यही कारण था कि मैं यह सपना देखने का साहस कर सका कि शायद एक दिन मैं 'सिलिकॉन वैली' नाम की किसी दूरस्थ जगह पर काम करूँगा.

जब स्टैनफोर्ड से प्रवेश का फोन आया, तो मेरे पिता ने मेरे हवाई जहाज़ के टिकट के लिए लगभग अपनी एक वर्ष की पूरी आय के बराबर राशि खर्च कर दी.

वह मेरे जीवन की पहली हवाई यात्रा थी.

जब मैं कैलिफोर्निया पहुँचा तो वह जगह बिल्कुल वैसी नहीं थी, जैसी मैंने कल्पना की थी.

मुझे हवाई अड्डे से मेरी मेज़बान (होस्ट) काउंटी के साथ मुख्य मार्ग पर की गई वह पहली यात्रा आज भी याद है.

जो लोग यहाँ के नहीं हैं, उन्हें बता दूँ कि कैलिफोर्निया को आमतौर पर बहुत हरा-भरा और समृद्ध क्षेत्र बताकर प्रस्तुत किया जाता है. लेकिन जब मैंने कार की खिड़की से बाहर देखा, तो दृश्य कुछ अधिक ही…भूरा था.

शायद मैंने यह बात ज़ोर से कह दी थी.

मुझे नहीं मालूम कि मैंने ऐसा क्यों किया.

मेरी मेज़बान, श्रीमती जेन अर्ल ने बहुत विनम्रता से मुझे सुधारा.

उन्होंने कहा—

"हम इसे भूरा नहीं कहते. हम इसे सुनहरा (गोल्डन) कहना पसंद करते हैं."

और आशावाद को चुनने से मेरा अर्थ बिल्कुल यही है.

इसका अर्थ है किसी परिस्थिति को अधिक सकारात्मक दृष्टि से दोबारा देखना.

जहाँ मुझे भूरा रंग दिखाई दिया, वहाँ उन्हें सुनहरा दिखाई दिया.

दृष्टिकोण में इस छोटे-से बदलाव ने मेरे आसपास की दुनिया को देखने के तरीके पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला.

सच कहूँ तो केवल हरे-भरे जंगलों का ही गलत विज्ञापन नहीं किया गया था.

पुस्तिकाओं में समुद्र भी बहुत गर्म और आकर्षित करने वाला दिखाई देता था.

यहाँ तक कि स्टैनफोर्ड के एक प्राध्यापक ने मेरा प्रवेश स्वीकार करने से पहले मुझे पत्र भेजा था और यहाँ के सुंदर समुद्र तटों को स्टैनफोर्ड आने का एक बड़ा कारण बताया था.

इसलिए जब मैं पहली बार समुद्र तट पर गया, तो बिना कुछ सोचे सीधे पानी में दौड़ गया.

पानी बिल्कुल भी गर्म नहीं था.

बाद में मुझे पता चला कि यहाँ का पानी बहुत ठंडा होता है.

और वैसे भी स्टैनफोर्ड के खेल संघों में शामिल होने का यही एकमात्र कारण है, जो मुझे कुछ समझ में आता है.

भूरे पहाड़ों और ठंडे समुद्र के बावजूद, यहाँ मिलने वाले लगभग प्रत्येक व्यक्ति का जीवन के प्रति सामान्य दृष्टिकोण सकारात्मक था.

शायद इसका कारण यह है कि यहाँ लोग पूरे वर्ष आरामदायक वस्त्र पहन सकते हैं.

मैं निश्चित रूप से नहीं जानता.

धीरे-धीरे मैंने भी कैलिफोर्निया का यह आशावाद अपनाना शुरू कर दिया.

और इसी आशावाद ने स्टैनफोर्ड में मेरे समय के दौरान मेरे जीवन के एक बड़े आजीविका परिवर्तन से निपटने में मेरी सहायता की.

जब मैं यहाँ आया था, तब मेरा पूरा इरादा विद्यावाचस्पति (पीएचडी) करने और शिक्षण क्षेत्र में जाने का था.

लेकिन जीवन की योजना कुछ और थी.

मुझे अपेक्षा से पहले नौकरी की आवश्यकता पड़ गई.

इसलिए मैंने अपना शोध कार्यक्रम छोड़ दिया.

स्टैनफोर्ड ने उदारता दिखाते हुए मुझे स्नातकोत्तर की आवश्यकताएँ पूरी करने का अवसर दिया.

मैं इसे अपने सपने का अंत मान सकता था.

लेकिन श्रीमती अर्ल से मिली उस सीख के कारण मैं इस विशेष भूरी पहाड़ी को भी सुनहरे अवसर के रूप में देख सका.

2. दूसरा मापदंड— कठिन समस्याओं पर काम करने की ओर बढ़िए

I मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि क्या स्टैनफोर्ड छोड़ते ही मुझे तुरंत बड़ी सफलता मिल गई? लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

लगभग एक दशक बाद भी मुझे महसूस होता था कि शायद मैं सही रास्ते पर नहीं हूँ.

अपने कदम जमाने और सही दिशा खोजने में मुझे काफी समय लगा.

फिर मैंने गूगल में आवेदन किया. 2004 में मेरा वहाँ अंतिम साक्षात्कार था. वह अप्रैल फूल का दिन था और उसी दिन गूगल की पत्र सेवा (जीमेल) शुरू हुई थी. जब साक्षात्कारकर्ताओं ने मुझसे इसके बारे में पूछा तो मुझे समझ नहीं आया कि यह कोई मज़ाक है या सचमुच कोई नया उत्पाद.

उस समय प्रत्येक व्यक्ति को एक गीगाबाइट का मुफ्त भंडारण (स्टोरेज) देना अत्यंत महत्वाकांक्षी और लगभग असंभव-सा विचार लगता था. गूगल में काम शुरू करने के कुछ वर्ष बाद मुझे भी एक ऐसी समस्या पर काम करने का अवसर मिला, जो देखने में लगभग असंभव लगती थी.

वह समय था जब इंटरनेट एक नए चरण में प्रवेश कर रहा था.

वेब साधारण पन्नों से आगे बढ़कर समृद्ध अनुप्रयोगों की दिशा में विकसित हो रहा था.

हममें से कुछ लोगों को लगा कि हम इंटरनेट विचरक (ब्राउज़र) की पूरी अवधारणा को फिर से सोच सकते हैं.

हम एक ऐसा ब्राउज़र बना सकते हैं, जो पहले से कहीं बेहतर और तेज़ हो. हमारे पास एक शुरुआती प्रारूप था और हमें लगता था कि वह काफी अच्छा है. लेकिन कंपनी के भीतर सामान्य सहमति यह थी कि नया ब्राउज़र बनाना अत्यंत कठिन होगा.

इसके लिए सैकड़ों अभियंताओं (इंजीनियर्स) की आवश्यकता होगी. और हमारी टीम में केवल लगभग दस लोग थे.

वह सामान्य सहमति सही थी.

यह काम सचमुच बहुत कठिन होने वाला था.

कुछ अर्थों में हम नासमझ थे.

लेकिन नई चीज़ों पर काम शुरू करते समय थोड़ा तर्कहीन होना भी अच्छा होता है.

2008 में हमने वह ब्राउज़र (क्रोम) जारी किया, जिसे हम एक शानदार उत्पाद मानते थे.

पहले चौबीस घंटों में उसके अस्सी लाख उपयोगकर्ता हो गए.

समीक्षाएँ भी अत्यंत सकारात्मक थीं.

लेकिन उसके बाद उपयोगकर्ताओं की वृद्धि अचानक रुक गई.

एक वर्ष बाद हमारी बाज़ार हिस्सेदारी केवल लगभग दो प्रतिशत थी.

मुझे याद है कि एक अन्य बड़ी कंपनी के मुख्य कार्यकारी ने एक साक्षात्कार में हमारा मज़ाक उड़ाया था.

उन्होंने उसे एक मामूली गणना की त्रुटि कहा था—अर्थात इतनी छोटी संख्या, जिसका कोई विशेष महत्व नहीं हो.

यह बात हमारी टीम का मनोबल तोड़ सकती थी.

लेकिन कैलिफोर्नियाई आशावाद के साथ मैंने अपनी टीम से कहा—"यदि वे हमें खारिज करने और हमारा मज़ाक उड़ाने के लिए इतना प्रयास कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि हम अवश्य कुछ सही कर रहे हैं."

हमने काम जारी रखा.

टीम को लगातार आगे बढ़ाते रहने के लिए हमने अत्यंत कठिन लक्ष्य तय किए.

हम तेज़ी से नए बदलाव और सुधार करते रहे.

हम प्रत्येक छह सप्ताह में ब्राउज़र का नया संस्करण जारी कर रहे थे.

जबकि दूसरे लोग शायद छह महीने या एक वर्ष में एक नया संस्करण जारी करते थे.

धीरे-धीरे सफलता हमारे साथ आने लगी.

कठिन समस्याओं पर काम करने से मैंने बहुत कुछ सीखा है.

कठिन काम आमतौर पर दूसरे प्रतिभाशाली और आशावादी लोगों को भी आकर्षित करते हैं.

और यदि आप अपने तय किए गए बहुत ऊँचे लक्ष्यों को पूरी तरह प्राप्त न भी कर पाएँ, तब भी आप कोई महत्वपूर्ण और शानदार उपलब्धि हासिल कर सकते हैं.

इसलिए जब भी आपके सामने किसी कठिन काम को चुनने का अवसर आए—हाँ कहिए.

3. तीसरा मापदंड— जब बाकी सारी बातें बराबर हों, तो वह काम कीजिए जो आपको उत्साहित करता है

मेरे लिए वह चीज़ हमेशा तकनीक तक लोगों की पहुँच रही है.

मेरे परिवार को तकनीक की जितनी अधिक पहुँच मिली, हमारा जीवन उतना ही बेहतर होता गया.

स्टैनफोर्ड आने से पहले मुझे संगणक (कंप्यूटर) इस्तेमाल करने के बहुत कम अवसर मिले थे.

इसलिए आप मेरे आश्चर्य की कल्पना कर सकते हैं, जब मैं पहली बार विश्वविद्यालय की कंप्यूटर प्रयोगशाला में गया और वहाँ कंप्यूटरों की लंबी-लंबी कतारें देखीं.

मैं उन कंप्यूटरों का जब चाहूँ, तब उपयोग कर सकता था.

वह 1993 का वर्ष था.

और इंटरनेट सचमुच मेरे चारों ओर बनाया जा रहा था.

मैंने इंटरनेट को मानव प्रगति के एक बुनियादी साधन के रूप में देखा.

यह विचार ही मुझे रोमांचित कर देता था कि मैं इंटरनेट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में कोई भूमिका निभा सकता हूँ. यही कारण था कि मैंने गूगल का प्रस्ताव स्वीकार किया.

और यही कारण था कि बाद में मुझे कम लागत वाले कंप्यूटरों और मोबाइल संचालन प्रणालियों (एंड्रॉइड) जैसी परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिला तो मैंने बिना हिचक उसे स्वीकार कर लिया.

कई वर्ष पहले मैं ग्रामीण भारत में महिलाओं के एक समूह से मिला था.

वे पहली बार स्मार्टफोन का उपयोग कर रही थीं.

वे उनके माध्यम से नए काम और कौशल सीख रही थीं.

और दूर रहने वाले अपने प्रियजनों से बात कर पा रही थीं.

मुझे एक अन्य शहर की कक्षा की अपनी यात्रा भी याद है.

वहाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र उन उत्पादों की सहायता से सीख रहे थे, जिन्हें बनाने में मैंने भी योगदान दिया था.

इस तकनीक को दूसरे लोगों का जीवन बदलते हुए देखना—ठीक उसी तरह, जैसे उसने मेरा जीवन बदला था—मेरे लिए संसार की सबसे रोमांचक बात थी.

इसलिए जब आप अपने जीवन की राह चुनें, तो अपना ध्यान केवल इन बातों पर मत लगाइए—

  • आपके माता-पिता चाहते हैं कि आप क्या करें.

  • आपके सभी मित्र क्या कर रहे हैं.

  • या समाज आपसे क्या करने की अपेक्षा करता है.

इसके बजाय उन बातों के बारे में सोचिए, जिन पर चर्चा करते हुए आप अपने साथियों के साथ देर रात तक उत्साह से जागते रहते हैं.

और फिर उन्हीं कामों को करने निकल पड़िए.

'कक्षा 2026', मुझे सचमुच विश्वास है कि आप इतिहास की अब तक की सबसे अधिक सक्षम कक्षा हैं.

कम-से-कम अगले वर्ष की कक्षा आने तक.

क्योंकि प्रगति इसी तरह काम करती है.

आपके जीवन में अभी हज़ारों क्षण आने वाले हैं.

महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप उनमें से प्रत्येक क्षण में बिल्कुल सही निर्णय लें. महत्वपूर्ण यह है कि आप आगे बढ़ते रहने का कोई रास्ता खोजते रहें.

कभी-कभी हम किसी अत्यंत सुंदर स्थान पर पहुँच जाते हैं—जैसे बर्फ से ढका हुआ कोई शानदार पहाड़.

और कभी-कभी हम पहुँच जाते हैं…वेगास.

लेकिन दोनों ही अनुभव एक उपहार हैं.

आपके भीतर जीवन की भूरी पहाड़ियों को सुनहरा देखने वाला कैलिफोर्नियाई आशावाद पहले से मौजूद है.

और आपके पास स्टैनफोर्ड की उपाधि भी है, जो यह सिद्ध करती है कि आप कठिन काम कर सकते हैं.

अब बाहर जाइए—

और अपने हृदय को उत्साह की आग से भर दीजिए.

आप सभी को बहुत-बहुत बधाई.

त्रिभुवन पत्रकार हैं. वह राजनीति, लीगल-फैक्ट चेक, साहित्य, संगीत और कला के बारे में लिखते रहते हैं.

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