"क्या आप मुसलमान हैं?": रंगकर्मी ने कहा, "अगर हूं तो क्या? क्या यह देश मुसलमानों का भी नहीं?", इसके बाद पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर हुई पिटाई
‘ऑल्ट न्यूज़’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के श्यामनगर रेलवे स्टेशन के पास एक रंगकर्मी के साथ कथित तौर पर धर्म पूछकर मारपीट की गई. पीड़ित शुभंकर दाशशर्मा का आरोप है कि 28 जुलाई की रात कोलकाता में नाटक का मंचन करने के बाद वह अपने घर लौट रहे थे. स्टेशन से बाहर निकलकर सार्वजनिक वाहन की तलाश में जा रहे थे, तभी चार युवकों ने उन्हें रोक लिया और पूछा, "क्या आप मुसलमान हैं?" शुभंकर का कहना है कि उन्होंने पहले सवाल का विरोध करते हुए कहा कि केवल काला कुर्ता-पायजामा पहन लेने से किसी की धार्मिक पहचान तय नहीं की जा सकती. लेकिन जब युवक लगातार यही सवाल दोहराते रहे, तो उन्होंने जवाब दिया, "अगर मैं मुसलमान हूं तो क्या? क्या यह देश मुसलमानों का भी नहीं है? क्या मुसलमान होना कोई अपराध है?"
शुभंकर के अनुसार, उनका यह जवाब सुनते ही चारों युवक उन पर टूट पड़े. उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके चेहरे, आंखों, कान और पसलियों पर लगातार मुक्कों और लातों से हमला किया. मारपीट इतनी गंभीर थी कि वह सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़े. उनका कहना है कि रात का समय होने और आखिरी ट्रेन गुजर जाने के कारण वहां कोई राहगीर नहीं था, इसलिए काफी देर तक उन्हें कोई मदद नहीं मिली. होश आने के बाद वह किसी तरह अपने घर पहुंचे और मानसिक आघात के कारण दो दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले.
रंगमंच समूह 'जनगणमन' से जुड़े शुभंकर ने नोआपाड़ा थाने में ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान हमलावर "जय श्री राम" के नारे भी लगा रहे थे. पुलिस में शिकायत करने से पहले उन्होंने बैरकपुर के डॉ. बी.एन. बोस उपमंडलीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराया. बाद में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जांच के दौरान बताया कि उनके कान के पर्दे के पास गंभीर चोट है, वहां पस और तरल पदार्थ जमा हो गया है तथा पूरी तरह ठीक होने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. शुभंकर का कहना है कि वह रंगकर्मी हैं और सुनने की क्षमता प्रभावित होने से उनके पेशे पर असर पड़ सकता है. उनकी पसलियों में भी चोट आई है.
नोआपाड़ा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. वहीं घटना सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल के रंगमंच जगत के कई लोगों ने शुभंकर के समर्थन में आवाज उठाई है. रंगकर्मी जयराज भट्टाचार्य ने कहा कि पूरी रंगमंच बिरादरी उनके साथ खड़ी है और घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तथा कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है. शुभंकर का कहना है कि शुरुआत में वह डर और असुरक्षा के कारण इस घटना को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि ऐसी घटना पर चुप रहना उचित नहीं होगा. इसलिए उन्होंने अपनी आपबीती सार्वजनिक करने और न्याय की मांग करने का फैसला किया.

