कर्नाटक के एसआईआर में बेंगलुरु के लगभग आधे मतदाता हटाए जाने की सूची में 

‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बेंगलुरु के लगभग आधे पंजीकृत मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची से हटाए जाने की संभावित श्रेणी में रखा गया है. कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु के 1.03 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 49.42 लाख मतदाताओं को "अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट अथवा अन्य" श्रेणी में चिह्नित किया गया है.

पूरे कर्नाटक में ऐसे मतदाताओं की संख्या 1.11 करोड़ है, जो राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग पांचवां हिस्सा है.

बेंगलुरु की कई विधानसभा सीटों पर 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता चिह्नित

आंकड़ों के अनुसार, बोम्मनहल्ली विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 57.08 प्रतिशत मतदाताओं (करीब 2.76 लाख) को इस श्रेणी में रखा गया है. बेंगलुरु की 10 विधानसभा सीटों में आधे से अधिक मतदाता संभावित विलोपन की सूची में शामिल किए गए हैं.

इनमें विजयनगर (53.66 प्रतिशत), दसरहल्ली (53.55 प्रतिशत), बीटीएम लेआउट (53.43 प्रतिशत) और सी.वी. रमन नगर (53.25 प्रतिशत) प्रमुख हैं.

संख्या के लिहाज से बेंगलुरु दक्षिण में सबसे अधिक 3.84 लाख मतदाता (48.99 प्रतिशत) इस श्रेणी में हैं. इसके बाद महादेवपुरा में 3.13 लाख मतदाता (45.66 प्रतिशत) सूचीबद्ध किए गए हैं.

वहीं, येलहंका विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 38.01 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में दर्ज किए गए हैं.

राजनीतिक दलों को सौंपी गई सूची

मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने बताया कि यह सूची राज्य की सातों मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के साथ साझा कर दी गई है. उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता को गलत तरीके से इस श्रेणी में रखा गया है तो वह 8 अगस्त तक सुधार के लिए आवेदन कर सकता है.

निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रत्येक प्रविष्टि के साथ मौके पर तैयार सत्यापन रिपोर्ट संलग्न है, जिस पर कम से कम एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के बूथ स्तरीय एजेंट के हस्ताक्षर हैं.

ऑनलाइन सत्यापन और सुधार की सुविधा

निर्वाचन आयोग ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां मतदाता यह जांच सकते हैं कि उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है या नहीं.

यदि किसी मतदाता को गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अयोग्य चिह्नित किया गया है, तो वह अपने बूथ स्तरीय अधिकारी से संपर्क कर यह प्रमाणित कर सकता है कि वह अभी भी पंजीकृत पते पर निवास करता है और पुनः गणना प्रपत्र जमा कर अपनी प्रविष्टि बहाल करा सकता है.

"नाम का मिलान नहीं" श्रेणी में भी 34 लाख से अधिक मतदाता

इसके अलावा निर्वाचन आयोग ने 34.17 लाख मतदाताओं को "नाम का मिलान नहीं" श्रेणी में रखा है. इसका अर्थ है कि सत्यापन के दौरान मतदाता या उसके माता-पिता के नाम का मिलान नहीं हो सका. ऐसे मतदाताओं को व्यक्तिगत नोटिस भेजकर सत्यापन किया जाएगा.

वहीं, 1.76 करोड़ मतदाताओं को स्वयं सत्यापित तथा 2.31 करोड़ मतदाताओं को परिवार के सदस्य के रूप में सत्यापित किया गया है. यही 4.07 करोड़ मतदाता 17 अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची का आधार बनेंगे.

प्रारूप सूची जारी होने के बाद 17 अगस्त से 15 अक्टूबर तक मतदाता आधार, पासपोर्ट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा जॉब कार्ड सहित निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 11 दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर नाम जोड़ने या सुधार के लिए दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे.

विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर बढ़ा विवाद

विशेष गहन पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग द्वारा देशभर में मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए चलाया जा रहा अभियान है. आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अन्य अयोग्य मतदाताओं की पहचान कर सटीक, शुद्ध और समावेशी मतदाता सूची तैयार करना है.

हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, नागरिक अधिकार संगठनों और कई चुनाव विशेषज्ञों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं. उनका कहना है कि इससे बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं, विशेषकर प्रवासी मजदूरों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, मुसलमानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मताधिकार प्रभावित हो सकते हैं.

आलोचकों ने इस प्रक्रिया को "पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिक पंजी" लागू करने जैसा बताते हुए आरोप लगाया है कि इससे नागरिकों पर अपनी पात्रता साबित करने का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जबकि नागरिकता से जुड़े प्रश्न संविधान के अनुसार केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

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