अजित साही | अब हिंदुस्तान से तानाशाह का दौर खत्म है
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ वॉशिंगटन डीसी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक अजित साही ने जेन जी के उभार, युवाओं के आंदोलन, मोदी सरकार की राजनीतिक चुनौतियों, अर्थव्यवस्था, मीडिया और न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से हुई कि जंतर-मंतर के आंदोलन के बाद पैदा हुई राजनीतिक ऊर्जा आखिर किस दिशा में जा रही है और क्या सरकार पहली बार युवाओं के दबाव में दिखाई दे रही है.
अजित साही ने कहा कि जंतर-मंतर का आंदोलन खत्म होने के बावजूद उसकी ऊर्जा खत्म नहीं हुई है. उन्होंने मोहन भागवत के जेन जी से संवाद और राहुल गांधी के इलाहाबाद कार्यक्रम को इसी बदलाव के संकेत के तौर पर देखा. उनके मुताबिक इलाहाबाद में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के छात्र पहुंचे और उन्होंने रोजगार, परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े अपने बुनियादी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "जेन जी ने इंडिया में आज की तारीख में चाहे वो आरएसएस हो, चाहे वो नेता हो, चाहे प्राइम मिनिस्टर हो, चाहे कोई भी हो, जेन जी ने सबको ए से लेकर जी तक सबकी हालत टाइट कर दी है."
अजित साही के मुताबिक सरकार और संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युवा अब डरने के बजाय सवाल पूछ रहा है. उन्होंने कहा, "वो फ्रीज हो गए हैं. इस समय आरएसएस, बीजेपी, मोहन भागवत और मोदी सारे फ्रीज हो गए हैं." उनके अनुसार राज्य की हिंसा और दमन अब इस राजनीतिक चुनौती का समाधान नहीं रह गया है, क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में हर कार्रवाई का सबूत जनता के सामने मौजूद है.
बातचीत में मीडिया और न्यायपालिका की विश्वसनीयता भी बड़ा मुद्दा रही. अजित साही ने कहा कि जब लोकतंत्र के संस्थान अपनी भूमिका नहीं निभाते, तो जनता सड़क पर उतरती है. उन्होंने मीडिया के पुराने दौर का उदाहरण देते हुए पत्रकारों के अधिकार, वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट और वेज बोर्ड की चर्चा की और बताया कि किस तरह पत्रकारों की स्वतंत्रता धीरे-धीरे कमजोर हुई.
न्यायपालिका पर चर्चा करते हुए अजित साही ने पारदर्शिता और जजों की नियुक्ति व्यवस्था पर सवाल उठाए. उनका कहना था, "जब तक यह सिस्टम तोड़ा नहीं जाएगा, जब तक मेरिट सामने नहीं आएगी, जब तक पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक हम जुडिशरी से उम्मीद नहीं कर सकते कि वो जनता के फेवर में और लोकतांत्रिक तरीके से फैसले देगी."
इसके बाद चर्चा अर्थव्यवस्था और रोजगार तक पहुंची. अजित साही ने कहा कि कारोबार, उद्यमिता और रोजगार के संकट को केवल आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता. उन्होंने कहा, "इकोनॉमिक्स वही है जो आपके खाने की मेज पर रोटी, दाल, सब्जी रख सके. इकोनॉमिक्स वही है जो आपको नौकरी दे सके."
अंत में परिसीमन, उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव, राम मंदिर, इथेनॉल और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. अजित साही के मुताबिक सरकार के सामने कई मोर्चे एक साथ खुल रहे हैं और जनता के बुनियादी सवालों के जवाब दिए बिना राजनीतिक संकट से निकलना मुश्किल होगा. उनका कहना था कि अब किसी भी सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती जनता के सवालों का सामना करना और उनके जवाब देना है.

