एक अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण दिल्ली में सड़क किनारे लगे पेड़ों की पत्तियों के रासायनिक ढांचे को बदल रहा है, जिससे भोजन बनाने और पानी बनाए रखने की उनकी क्षमता प्रभावित हो रही है. कम प्रदूषित स्थानों की तुलना में अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों के पेड़ अधिक शरीर-क्रियात्मक (फिजियोलॉजिकल) तनाव का सामना कर रहे हैं.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, यह अध्ययन दिल्ली के चार स्थानों में सात प्रजातियों के पेड़ों पर किया गया. इसका उद्देश्य यह आंकना था कि प्रदूषण का स्तर और मौसमी बदलाव पेड़ों के शरीर-क्रियात्मक गुणों को कैसे प्रभावित करते हैं. सबसे प्रमुख अंतर क्लोरोफिल की मात्रा में देखा गया — वह हरा वर्णक (पिगमेंट) जो पौधों को सूर्य का प्रकाश अवशोषित करने और प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) के माध्यम से भोजन बनाने में मदद करता है. प्रदूषित इलाकों में क्लोरोफिल तेजी से घट रहा है.
‘अर्बन एयर क्वालिटी एंड पोल्यूशन टॉलरेंस ऑफ रोडसाइड ट्रीज इन दिल्ली: एन एपीटीआई एप्रोच’ शीर्षक वाले इस अध्ययन में पत्तियों द्वारा पानी बनाए रखने की क्षमता में भी अंतर पाया गया, जो उनके जैविक और रासायनिक कार्यों को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है.
इस अध्ययन में चार स्थानों पर सात प्रजातियों — नीम, डेविल्स ट्री (सप्तपर्णी), पीपल, अर्जुन, फाइकस इन्फेक्टोरिया, अमलतास और नकली अशोक — की जांच की गई और चार मौसमी नमूनों के अवधियों के दौरान उनके शरीर-क्रियात्मक गुणों का मूल्यांकन किया गया.

