मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से निलंबित करने की याचिका पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के नाम पर एकतरफा शक्तियों के इस्तेमाल के आरोपों को चुनौती देने और उन्हें पद से निलंबित करने की मांग वाली याचिका को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया.
कृष्णदास राजागोपाल के अनुसार, मंगलवार (29 सितंबर, 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के वकीलों ने याचिका पर जल्द सुनवाई का मौखिक उल्लेख किया. याचिका में अंतिम फैसला आने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के दायित्वों से अलग रखने का निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में तर्क दिया गया है कि चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) को भी आयोग के कामकाज में समान अधिकार मिलना चाहिए. 1995 के ऐतिहासिक टी.एन. शेषन फैसले का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 324(1) चुनावों का संचालन किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरे निर्वाचन आयोग को सौंपता है. मुख्य चुनाव आयुक्त केवल आयोग के अध्यक्ष हैं, न कि स्वयं संपूर्ण आयोग.
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने 2023 के अधिनियम की धारा 18 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि आयोग का कामकाज सर्वसम्मति या बहुमत से ही संचालित होना चाहिए. याचिका में सवाल उठाया गया कि क्या सीईसी के पास बिना बहु-सदस्यीय सहमति के एकतरफा फैसले लेने का वैध अधिकार है? इस बिंदु की जांच 'अधिकार-पृच्छा' याचिका के माध्यम से की जानी चाहिए.
साथ ही, याचिका में 1 अक्टूबर, 2025 से अब तक के सभी भौतिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स (जैसे फाइल नोटिंग्स, सर्वर लॉग, ईआरओनेट/ ईसीआईनेट डेटा, फॉर्म-6 संशोधन और विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े दस्तावेज) को सुरक्षित रखने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि फॉर्म-6 में बदलाव के कारण किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से वंचित न किया जाए.

