‘नौकरियों के पीछे भागने के बजाय पैसा कमाने के लिए टैक्सी चलाएं’: चुनाव पूर्व यूपी के उपमुख्यमंत्री पाठक की सलाह से योगी सरकार असहज

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक लाख सरकारी नौकरियां देने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वादे को एक अप्रत्याशित शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है. और इसका कारण कोई और नहीं बल्कि उनके अपने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक हैं, जिनकी इस सलाह ने सत्ताधारी प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया है कि युवाओं को सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाय टैक्सी चलानी चाहिए. हालांकि पाठक ने ये टिप्पणियां 23 सितंबर को लखनऊ में एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान की थीं, लेकिन मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा आदित्यनाथ और पाठक के विरोधाभासी बयानों को एक साथ पेश किए जाने के बाद ये राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गईं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक वीडियो क्लिप भी चलाई, जिसमें नौकरियों और रोजगार के अवसरों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के दोनों नेताओं के विरोधाभासी बयानों को साथ-साथ दिखाया गया.

लखनऊ के एक प्रभावशाली विधायक पाठक, राज्य सरकार में व्यावहारिक रूप से तीसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं. संयोग से, जब उन्होंने पिछले हफ्ते ये टिप्पणियां कीं, तब आदित्यनाथ भी मंच पर मौजूद थे.

विधानसभा चुनाव में चार महीने से थोड़ा अधिक समय बचा है, ऐसे में रोजगार और युवाओं की अधूरी आकांक्षाएं राज्य भर में केंद्रीय राजनीतिक युद्ध का मैदान बनकर उभर रही हैं. विपक्षी दलों ने कथित भर्ती अनियमितताओं, भर्ती परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा में देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे या वेतन वृद्धि की मांग कर रहे छात्र और युवा समूहों के पीछे अपनी पूरी ताकत लगा दी है.

उमर राशिद की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार की 'भारत टैक्सी' सेवाओं के आधिकारिक शुभारंभ के दौरान, पाठक ने दावा किया कि यह नई सहकारी पहल स्थानीय युवाओं के बीच स्व-रोजगार सुनिश्चित करेगी. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा, "गांवों और शहरों के जिन नौजवानों के पास हुनर है और जो कमाई करना चाहते हैं, उन्हें मोटर वाहन चलाना चाहिए."

हालांकि, जिस बात ने व्यापक तंज को जन्म दिया, वह थी युवाओं से पारंपरिक रोजगार के अवसरों के पीछे भागना बंद करने की उनकी स्पष्ट अपील. पाठक ने कहा, "नौकरी के चक्कर में मत पड़ो." भारत टैक्सी को भारत का पहला सहकारिता संचालित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म बताया गया है, जिसे इस साल की शुरुआत में केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया था.

"अपने घर चलाने पर ध्यान दो. दोपहर का समय अपने बच्चों के साथ बिताओ. अगर आप किसी और के लिए काम करेंगे, तो क्या आप अपने बच्चों के साथ दो घंटे भी बैठ पाएंगे?" पाठक ने पूछा, जिनकी टिप्पणियों का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर मजाक उड़ाया गया.

उन्होंने आगे सुझाव दिया कि टैक्सी चलाने से न केवल युवाओं को आजीविका हासिल करने में मदद मिलेगी बल्कि उन्हें दोपहर के ब्रेक के दौरान अपने परिवारों के साथ समय बिताने की आजादी भी मिलेगी. पाठक ने भारत टैक्सी सेवा के ड्राइवरों सहित उपस्थित लोगों को सलाह दी, "अंतिम राइड वह लें जो आपके घर के पास हो. दो घंटे खाना खाने, आराम करने और अपने बच्चों के साथ बिताएं, और फिर से निकलें और रात 10 बजे तक काम करें." उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर जरूरत पड़ी, तो जिस दिन भी अतिरिक्त आय की आवश्यकता हो, ड्राइवर केवल दो अतिरिक्त ट्रिप पूरी कर सकते हैं.

पाठक के बयानों का मजाक उड़ाते हुए समाजवादी पार्टी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें उनके बयानों की तुलना चुनाव से पहले एक लाख सरकारी नौकरियों के आदित्यनाथ के स्पष्ट वादे से की गई. पार्टी ने एक तीखा कैप्शन जोड़ा जिसमें कहा गया कि राज्य सरकार का इंजन (मुख्यमंत्री) और सब-इंजन (उपमुख्यमंत्री) आपस में टकरा रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे दो इंजनों (राज्य सरकार और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार) के बीच घर्षण है.

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