खड़गे को लेकर भाजपा सांसद की जातिवादी टिप्पणी: ‘एक दलित को आरएसएस की परवाह क्यों होनी चाहिए?’
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस से कुछ सवाल क्या पूछे, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रमेश जिगाजिनागी ने उनके खिलाफ एक विवादित और जातिवादी टिप्पणी कर डाली. विजयपुरा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिगाजिनागी ने खड़गे की दलित पहचान को निशाना बनाते हुए सवाल किया कि एक दलित नेता होने के नाते उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की परवाह क्यों होनी चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे को खड़गे के लिए अप्रासंगिक बताया और कहा कि आरएसएस का पंजीकरण कराना गृह मंत्री का काम नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिसने भी आरएसएस से लोहा लिया है, वह टिक नहीं पाया है.
‘मकतूब’ के मुताबिक, भाजपा सांसद ने प्रियांक खड़गे की योग्यता और गृह मंत्रालय चलाने की उनकी बौद्धिक क्षमता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि खड़गे का राजनीतिक उत्थान केवल उनके पिता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की पार्टी के प्रति लंबी सेवा की वजह से हुआ है, न कि उनकी खुद की क्षमता के कारण.
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखा. इस पत्र में उन्होंने आरएसएस से एक कानूनी संस्था के रूप में औपचारिक पंजीकरण कराने और अपनी पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की थी. खड़गे ने कहा कि आरएसएस को अपनी कानूनी स्थिति, नेतृत्व संरचना, फंडिंग के स्रोत, खर्च, टैक्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमतियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.
आरएसएस की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए खड़गे ने बताया कि संगठन अकेले कर्नाटक में 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और सैकड़ों अन्य कार्यक्रम आयोजित करता है. उन्होंने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर काम करने वाले संगठन को ट्रस्टों, कंपनियों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओज़) की तरह पारदर्शिता, वित्तीय खुलासे और नियामक अनुपालन के दायरे में आना चाहिए और संवैधानिक मानदंडों के तहत काम करना चाहिए.

