न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया

न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने कहा है कि वह अपने शहर में होने जा रहे उस आगामी कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं जिसमें भारत की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक पैतृक संगठन के नेता शामिल हो रहे हैं.

‘रॉयटर्स’ के अनुसार, आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), एक शक्तिशाली हिंदू संगठन है जिससे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी निकली है. आरएसएस ने मई में कहा था कि उसने अमेरिका सहित विदेशी यात्राओं का आयोजन इस धारणा का मुकाबला करने के लिए किया है कि वह अल्पसंख्यकों पर हमलों में शामिल एक अर्धसैनिक संगठन है.

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) का कहना है कि आरएसएस "दशकों से अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों के खिलाफ अत्यधिक हिंसा और असहिष्णुता के कृत्यों में शामिल रहा है."

आरएसएस असहिष्णुता के आरोपों का खंडन करता है और कहता है कि वह एक "हिंदू-केंद्रित सांस्कृतिक आंदोलन" है जिसका लक्ष्य हिंदुओं को एकजुट करने सहित "राष्ट्र को परम वैभव के शिखर पर ले जाना" है.

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हाल के वर्षों में भारतीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़े हैं, और वे बढ़ते नफरत भरे भाषणों, धर्म-आधारित नागरिकता कानून, मुसलमानों की संपत्तियों के विध्वंस, मुस्लिम बहुल कश्मीर की स्वायत्तता को हटाने और धर्म की स्वतंत्रता को चुनौती देने वाले धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों की ओर इशारा करते हैं.

बीजेपी के नेतृत्व वाली भारत सरकार भेदभाव के आरोपों से इनकार करती है और उसका कहना है कि उसकी नीतियां, जिनमें खाद्य सब्सिडी कार्यक्रम और विद्युतीकरण अभियान शामिल हैं, सभी समुदायों को लाभ पहुंचाती हैं.

कार्यक्रम की वेबसाइट के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का शनिवार को मैनहट्टन के एक कार्यक्रम में संबोधन तय है.

"मैं इस रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के पास है या नहीं," न्यूयॉर्क शहर के पहले मुस्लिम और भारतीय अमेरिकी मेयर ममदानी ने यह पूछे जाने पर कहा कि क्या कार्यक्रम रद्द होना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, "भारत की जिस अवधारणा को मुझे मेरे परिवार ने सिखाया था और जिसके साथ मैं बड़ा हुआ हूँ, वह एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के बहुलवादी समाज की थी जो भारत के प्रत्येक व्यक्ति के अपनेपन में विश्वास रखता था. और एक ऐसे आंदोलन के उभार को देखना बेहद परेशान करने वाला रहा है जो एक बहिष्करण (भेदभावपूर्ण) दृष्टिकोण पर आधारित है."

कार्यक्रम की वेबसाइट 29 अगस्त के इस समागम को "यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन" (सार्वभौमिक एकजुटता उत्सव) के रूप में दर्शाती है, जो हिंदू अमेरिकी समुदाय को एक साथ लाता है.

आयोजकों, 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' का कहना है कि इस कार्यक्रम को कई हिंदू अमेरिकी समूहों का समर्थन प्राप्त है और यह साझा विरासत और अंतर-धार्मिक एकता को बढ़ावा देता है. हालाँकि, कई स्थानीय संगठनों ने भागवत की उपस्थिति और आरएसएस के इतिहास को लेकर इसकी आलोचना की है.

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