भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी एलएनजी लेने से इनकार किया
मध्य पूर्व में तनाव के कारण आपूर्ति में कमी के बावजूद भारत ने रूस की उस तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को खरीदने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं. भारत के इस रुख के कारण एक टैंकर अधर में लटक गया है, जबकि अन्य 'अनुमत' (गैर-प्रतिबंधित) खेपों को लेकर बातचीत जारी है.
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, यह कदम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता देश (भारत) द्वारा ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिबंधों के जोखिम के बीच बनाए जा रहे बारीक संतुलन को दर्शाता है. अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एलएनजी खेपों को छिपाना मुश्किल होता है और इनमें अनुपालन का जोखिम अधिक होता है. यह स्थिति रूस की अपने एलएनजी निर्यात को नए बाजारों की ओर मोड़ने की सीमाओं को भी उजागर करती है.
'रूस बेचने को उत्सुक, भारतीय कंपनियां सतर्क'
इस बीच, रूसी कच्चे तेल की भारत द्वारा खरीद निर्बाध रूप से जारी है. इसे अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली उस अस्थायी छूट से मदद मिली है, जो 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट से निपटने के लिए देशों को दी गई थी.
'आर्कटिक एलएनजी 2' रूस का दूसरा निर्यात संयंत्र है जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है. वाशिंगटन ने यूक्रेन पर रूस के युद्ध के कारण 2025 की शुरुआत में इन एलएनजी संयंत्रों पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए थे.
एक सूत्र ने बताया कि जहाँ कच्चे तेल की खेपों को समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में स्थानांतरित करके छिपाया जा सकता है, वहीं एलएनजी शिपमेंट को सैटेलाइट ट्रैकिंग से छिपाना कहीं अधिक कठिन है.
लंबी अवधि के समझौतों की तलाश
सूत्र के अनुसार, भारत अधिकृत (गैर-प्रतिबंधित) रूसी एलएनजी खरीदने के लिए तैयार है, लेकिन उसका अधिकांश हिस्सा यूरोप को आवंटित है. सूत्र ने यह भी कहा कि चीन अभी भी प्रतिबंधित और गैर-प्रतिबंधित, दोनों तरह की रूसी एलएनजी का प्रमुख खरीदार बना हुआ है. इसके अलावा, मास्को भारत को एलएनजी और पोटाश, फास्फोरस व यूरिया जैसे उर्वरकों की आपूर्ति के लिए लंबी अवधि के सौदों की तलाश में है.
ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग बाधित होने से पहले, भारत अपनी गैस खपत का आधा हिस्सा आयात के जरिए पूरा कर रहा था, जिसमें से लगभग 60% इसी जलमार्ग से आता था. भारत की कच्चे तेल की आधे से अधिक आपूर्ति भी इसी रास्ते से होती थी.

