मोहन भागवत ने कहा, लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन अपरिहार्य; ऑनलाइन सामग्री पर सरकारी अंकुश का समर्थन

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि "लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन अपरिहार्य हैं", लेकिन उनका उद्देश्य समाधान ढूंढना होना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ हो रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई है.

‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग यानी ओटीटी प्लेटफार्मों पर अधिक सरकारी नियंत्रण की भी वकालत की. नागपुर में संघ के वार्षिक विजयादशमी उत्सव समारोह को संबोधित करते हुए, भागवत ने बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हाल ही में हुए उथल-पुथल का हवाला दिया.

उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने हितों को साधने वाली ताकतें राजनीतिक परिस्थितियों को बदलने के साधन के रूप में सत्ता परिवर्तन का उपयोग करती हैं, जिससे शायद ही कभी इच्छित परिणाम प्राप्त होते हैं.

इशिता मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, भागवत ने राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलनों और सामाजिक विभाजनों के खिलाफ आगाह किया. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भारत को कमजोर करने की मंशा रखने वाली अंतरराष्ट्रीय ताकतें देश के भीतर होने वाली अशांति का फायदा उठा सकती हैं, और साथ ही यह भी जोड़ा कि "यह गलत धारणा है कि समस्याएं केवल आंदोलनों के माध्यम से ही हल होती हैं."

भागवत ने कहा कि लोग कहते हैं कि सत्ता परिवर्तन से स्थिति बदल जाएगी, लेकिन अतीत में ऐसा कभी नहीं हुआ है.

वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि "यह हमारा राष्ट्रीय गीत है."

लोगों को चेतावनी देते हुए कि भले ही उनकी भावनाएं तीव्र हों, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कार्य संविधान और कानून के दायरे में रहें, उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों में भी भाषण, आचरण और व्यवहार को नियंत्रित करने वाले शिष्टाचार और औचित्य के मानक होने चाहिए.

उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए कि चुनावी लाभ, सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक फायदे का प्रलोभन हमारे विवेक और सद्भावना पर भारी न पड़े." उन्होंने आगे कहा, "यह भी हमारा अनुभव नहीं है कि केवल सरकार ही समाज की सभी समस्याओं को हल कर सकती है, या समस्याएं केवल आंदोलनों के माध्यम से ही हल होती हैं. समस्याएं समाज की सक्रियता और आपसी संवाद के माध्यम से भी हल की जा सकती हैं."

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