बंगाल विधानसभा में ओबीसी संशोधन विधेयक पारित, 77 मुस्लिम समुदाय ओबीसी सूची से बाहर
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट. पश्चिम बंगाल विधानसभा ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो बड़े संशोधन विधेयक पारित किए. कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद 77 मुस्लिम समुदायों को ओबीसी सूची से हटाया गया, ओबीसी कोटा 17% से घटकर 7% हुआ.
बंगाल : ‘एसआईआर’ की आड़ में अब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या भी कम की जा रही
'द हिंदू' के शिव सहाय सिंह की रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं और पीडीएस लाभ को 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) से जोड़ने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. जानिए कैसे 'अन्नपूर्णा योजना' और राशन कटौती पर विवाद गहराया है.
खोया हुआ राजकुमार: क्या पार्टी और उसके नेता के बीच आ गए अभिषेक बनर्जी?
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी व संगठनात्मक पतन के लिए केवल अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन उनके कॉर्पोरेट और भावनाहीन दृष्टिकोण ने पार्टी को भारी नुकसान पहुँचाया है. लेख में अभिषेक बनर्जी के बचपन के 'बदले के संकल्प' से लेकर, रुजिरा नरूला से थाईलैंड कनेक्शन वाली हाई-प्रोफाइल शादी, प्रशांत किशोर की आई-पैक (I-PAC) टीम के माध्यम से जमीनी नेताओं पर तकनीकी सर्विलांस और 2016 के कार हादसे के बाद ममता बनर्जी के सुरक्षात्मक रवैये का पूरा ब्योरा दिया गया है. जानिए कैसे 2026 के चुनावों में 74 विधायकों के टिकट काटने की अभिषेक की जिद ने सुवेंदु अधिकारी जैसे जननेताओं के विद्रोह के बाद टीएमसी को बिखराव की कगार पर खड़ा कर दिया.
कैसे हिंदुत्व पश्चिम बंगाल में सत्ता-विरोधी लहर की भाषा बन गया
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने राज्य के सियासी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है, जहां भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाई है और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. रिपोर्ट में विस्तार से विश्लेषण किया गया है कि कैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ उपजे जन-आक्रोश (जैसे स्कूल सर्विस कमीशन भर्ती घोटाला और आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना) को भाजपा ने हिंदू पहचान और हिंदुत्व के वैचारिक ढांचे में समाहित किया. लेख में विजय रैलियों में बुलडोजर के इस्तेमाल, मायापुर में गौ-पूजा, तुष्टिकरण विरोधी संदेशों और बंगाल के दबे हुए सांप्रदायिक इतिहास पर शहरी मध्यवर्ग के बदलते रुख का पूरा राजनीतिक ब्योरा पढ़ें.
शमशेरगंज एक सैंपल: मतदान से पहले ही ‘एसआईआर’ ने बदला चुनावी समीकरण, भाजपा को वोटिंग से पूर्व लाभ
अपर्णा भट्टाचार्य की रिपोर्ट के अनुसार, सामान्यतः मतदाता सूची से नाम ‘एएसडीडी’ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, विस्थापित या मृत) श्रेणी के तहत हटाए जाते हैं. शमशेरगंज में इस प्रक्रिया से केवल 16,836 नाम हटाए गए. विलोपन का सबसे बड़ा कारण ‘विचाराधीन’ (अंडर एडजुडिकेशन) प्रक्रिया रही. इस प्रक्रिया के तहत 1,08,400 मतदाताओं को चिन्हित किया गया, जिनमें से लगभग 68.98% (74,775 लोग) के नाम अंततः काट दिए गए.

