सुरभि गुप्ता | अमेरिका में भारतीयों के लिए वीजा और नौकरी, दोनों मुश्किल होते जा रहे हैं

‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने न्यूयॉर्क से जुड़ीं पत्रकार सुरभि गुप्ता के साथ अमेरिका की एच-1बी वीजा नीति में बदलाव, भारतीय आईटी पेशेवरों पर इसके संभावित प्रभाव और भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती अनिश्चितता पर चर्चा की.

सुरभि गुप्ता के अनुसार, अमेरिका में एच-1बी वीजा भारतीय पेशेवरों के लिए रोजगार और बेहतर भविष्य की संभावनाएं तलाशने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद आव्रजन नीतियों में सख्ती, वीजा नियमों में बदलाव और भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नस्लीय टिप्पणियों ने इन पेशेवरों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. उन्होंने बताया कि अमेरिका में पढ़ाई करने वाले कई भारतीय विद्यार्थी एफ-1 वीजा पर वहां जाते हैं. पढ़ाई के बाद वे वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) के माध्यम से काम करने का अवसर पाते हैं और फिर एच-1बी वीजा हासिल करने की कोशिश करते हैं. हालांकि, वीजा की सीमित उपलब्धता और ग्रीन कार्ड के लिए लंबा इंतजार उनके भविष्य को अनिश्चित बना देते हैं.

बातचीत में एच-1बी वीजा से जुड़ी फीस और नियमों में बदलाव के संभावित प्रभावों पर भी चर्चा हुई. सुरभि गुप्ता ने कहा कि इन नीतिगत बदलावों का असर केवल नए आवेदकों पर ही नहीं, बल्कि उन परिवारों पर भी पड़ सकता है, जिनकी आर्थिक स्थिति अमेरिका में काम कर रहे सदस्यों की आय पर निर्भर है. उन्होंने भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों और कंसल्टेंसी फर्मों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, कुछ कंपनियां वीजा पर निर्भर कर्मचारियों की स्थिति का फायदा उठाती हैं, जिससे उनके लिए नौकरी बदलना या दूसरी जगह काम तलाशना मुश्किल हो जाता है.

चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर भी बात हुई. सुरभि गुप्ता ने बताया कि टेक कंपनियां कई कामों के लिए एआई का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. इससे कुछ क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में भारतीय पेशेवरों को एक साथ दो चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है—वीजा नियमों में सख्ती और तकनीकी बदलावों के कारण नौकरियों पर बढ़ता दबाव.

निधीश त्यागी ने सवाल उठाया कि यदि भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में रोजगार के अवसर सीमित होते हैं, तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशों से आने वाली धनराशि पर क्या असर पड़ेगा. बातचीत में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, भारत सरकार की रणनीति और देश में कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर भी चर्चा हुई.

सुरभि गुप्ता के अनुसार, बदलते वैश्विक माहौल में भारत के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि यदि विदेशों में रोजगार के अवसर कम होते हैं, तो देश अपने कुशल पेशेवरों के लिए किस तरह के अवसर और बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकता है.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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