हिंदुत्व और बुलडोजर ‘नए भारत’ में एक-दूसरे को आकार दे रहे हैं, बढ़ावा दे रहे हैं और एक-दूसरे के साथ फल-फूल रहे हैं

‘द प्रिंट’ में ब्रह्म प्रकाश ने लिखा है कि हिंदुत्व मात्र एक विचार या दर्शन नहीं है, बल्कि यह एक ठोस रूप और आकृति धारण कर चुका है.  यह सवाल उठाता है कि इस विचारधारा की शारीरिक या प्रतीकात्मक छवि क्या हो सकती है—क्या यह कोई मनुष्य है, कोई ज़ोंबी है, या फिर कोई विनाशकारी मशीन है? हिंदुत्व के इस शक्तिशाली पुनरुत्थान के दौर में इसके परतदार अर्थों, इसकी अनियंत्रित और विनाशकारी शक्ति, तथा इसकी पुरुषवादी ताक़त को दर्शाने वाली एक ऐसी छवि की आवश्यकता महसूस होती है, जो समाज में बिना किसी विरोध के बहुसंख्यकवादी रास्ते को साफ कर सके.

यह एक ऐसी कलाकृति या प्रतीक की तलाश है, जो सौंदर्यशास्त्र और संवेदनहीनता (एनेस्थीसिया) को एक साथ लाकर जनता में डर और नफरत पैदा करती है. यह तोपखाने और कला, नारे और सन्नाटे, तथा मजे और हिंसा का एक ऐसा अनूठा मिश्रण है, जो खिलौने वाली बंदूक की तरह बच्चों के दिमाग में भी हिंसा भर देता है. जिस तरह इटली में 'फासीवाद' का प्रतीक लोहे की छड़ों और कुल्हाड़ी का गुच्छा था, उसी तरह आज हिंदुत्व का सबसे सटीक और चलता-फिरता प्रतीक 'बुलडोजर' बनकर उभरा है.

बुलडोजर: विनाश, निष्कासन और बहुसंख्यकवादी राजनीति का साधन बुलडोजर केवल लोहे की एक मशीन नहीं, बल्कि एक शारीरिक-उपकरण (बॉडी-डिवाइस) बन चुका है जो जैव-राजनीतिक और भू-राजनीतिक  प्रभुत्व स्थापित करता है. इसका प्राथमिक कार्य ध्वस्त करना, बेदखल करना और नष्ट करना है. विकास के नाम पर यह आम जनता की संपत्तियों और आजीविका को छीनकर कॉर्पोरेट्स को सौंपने का माध्यम बनता है. यह किसी भी प्रकार के संवाद की संभावना को समाप्त कर देता है और मूल निवासियों की कीमत पर नए बसने वालों के लिए जगह तैयार करता है.

हिंदुत्व और बुलडोजर का संबंध एक अटूट गठबंधन जैसा लगता है, जहाँ गढ़ा हुआ पुरुषत्व और अदम्य मशीन एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इस मशीन का सांस्कृतिक चरित्र अलग है—इजराइल में यह ज़ियोनिस्ट (यहुदी राष्ट्रवादी) दिखता है, अमेरिका में यह श्वेत सर्वोच्चता का प्रतीक है, तो भारत आते ही यह 'बुलडोजर बाबा' बनकर एक श्रद्धेय धार्मिक अवतार का रूप ले लेता है.

हिंदुत्व का सपाटपन और इतिहास का समतलीकरण

हिंदुत्व की मानसिकता में कोई दार्शनिक या जटिल गहराई नहीं है; यह बेहद सपाट है. यह किसी भी जटिल दृष्टिकोण को स्वीकार करने में रुचि नहीं रखता. बुलडोजर इस सपाट मानसिकता का सबसे बड़ा प्रतीक है, जो इतिहास, संस्कृति, और विविधताओं को खोदकर समतल कर देना चाहता है. यह आस्था, धर्म और राष्ट्रवाद को एक 'प्रदर्शनी' में बदल देता है, जिसका एकमात्र उद्देश्य नवउदारवादी राजनीति के साथ तालमेल बिठाकर सब कुछ एकसमान बना देना है.

लोक संस्कृति और जनमानस में बुलडोजर का प्रवेश

भारत में बुलडोजर अब निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहा; इसने भारतीय लोक संस्कृति और जनमानस में गहराई से अपनी जगह बना ली है. रैलियों, जन्मदिनों और सामूहिक विवाहों में बुलडोजर का इस्तेमाल हो रहा है. शादी में दूल्हे द्वारा घोड़ी के बजाय बुलडोजर पर सवार होकर जाना और परिवार संग सेल्फी लेना इसका नया ट्रेंड बन गया है.

बच्चों के खिलौने और त्यौहार: बच्चों में बंदूकों की जगह अब बुलडोजर के खिलौने लोकप्रिय हो रहे हैं. त्योहारों पर, जैसे होली में बनारस के बाजारों में 'बुलडोजर पिचकारियां' भारी मात्रा में बिकीं.

लोकप्रिय संगीत और टैटू संस्कृति: इस वाहन पर लोकप्रिय गाने बन रहे हैं और युवा लड़के-लड़कियां अपने शरीर पर 'दिल' के आकार के अंदर बुलडोजर के टैटू बनवा रहे हैं.

राजनीतिक पहचान और भाषा: नेता खुद को 'बुलडोजर बाबा' या 'बुलडोजर मामा' का नाम देकर महिमामंडित कर रहे हैं. यह भारतीय राजनीति का नया 'सांड' बन चुका है.

यह उपकरण हिंदुत्ववादी पुरुषत्व की गहरी असुरक्षाओं और हीन भावनाओं को छिपाने तथा नकली आत्मविश्वास पैदा करने का प्रतीक बन गया है. अल्पसंख्यकों और असंतुष्टों के घरों को तबाह करने के बाद हिंदुत्व समर्थकों के बीच इस मशीन को 'मसीहा' जैसा दर्जा दिया जा रहा है.

नवउदारवाद और फासीवाद का नया गठबंधन

बुलडोजर और हिंदुत्व का यह मिलन वास्तव में फासीवाद और नवउदारवादी बाजार का इतिहास में सबसे सफल गठबंधन है. जिस तरह संयुक्त राज्य अमेरिका में सैन्य और तकनीकी पुरुषत्व के गौरव के रूप में युद्ध टैंक एक सांस्कृतिक प्रतीक बना, उसी तरह 'नए भारत' में अति-राष्ट्रवाद के उभार को दर्शाने के लिए बुलडोजर मुख्य मंच संभाल चुका है.

कुलमिलाकर ब्रह्म प्रकाश के इस लेख का निचोड़ यह है कि आज भारतीय लोकतंत्र एक ऐसे 'बुलडोजर युग' में प्रवेश कर चुका है, जहाँ संवाद, अधिकार और विविधिता को समतल करके एक सजातीय और भयभीत समाज का निर्माण किया जा रहा है. हिंदुत्व और बुलडोजर का यह गठबंधन 'नए भारत' में एक-दूसरे को लगातार ऊर्जा, आकार और बढ़ावा दे रहा है.

(यह हिंदी में अनुदित सारांश है. अंग्रेजी में मूल लेख यहां पढ़ा जा सकता है)

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