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कमियां और दोष बाहर न आएं या सार्वजनिक न हों, लिहाजा गुजरात सरकार ने राज्य के लगभग 46,000 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब अभिभावकों (माता-पिता) सहित किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने के लिए प्रिंसिपल की पूर्व लिखित अनुमति लेनी होगी. इसके अलावा, बिना अनुमति के फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार या लाइव स्ट्रीमिंग करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है.

नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई

निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस परिपत्र का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.  राज्य के शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने स्पष्ट किया कि यह नियम "दुर्भावनापूर्ण इरादों" और राजनीतिक हितों से प्रेरित लोगों को रोकने के लिए लाया गया है. यदि कोई अवैध रूप से प्रवेश करता है या व्यवधान डालता है, तो उस पर पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है.

बच्चों की सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला

ऋतु शर्मा के अनुसार, परिपत्र में लैटिन सिद्धांत 'इन लोको पेरेंटिस' (माता-पिता के स्थान पर कार्य करना) का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है. यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और निजता का अधिकार), 2017 के सुप्रीम कोर्ट के निजता के फैसले और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुरूप लिया गया है.

प्राथमिक शिक्षा निदेशक प्रकाश त्रिवेदी के अनुसार, बिना अनुमति प्रवेश पहले भी वर्जित था, लेकिन अब इस परिपत्र के माध्यम से इसे अनिवार्य और कानूनी रूप से लागू कर दिया गया है. हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में भी ऐसे प्रतिबंधात्मक नियम पहले से लागू हैं.

नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल में प्रवेश करने वाले हर आगंतुक को 'विजिटर्स रजिस्टर' में अपना विवरण दर्ज करना होगा. कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, हॉस्टल और खेल के मैदानों में प्रवेश के लिए अलग से लिखित अनुमति आवश्यक होगी. अनधिकृत प्रवेश या काम में बाधा डालने पर प्रिंसिपल तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित करेंगे.

सरकार के इस फैसले पर राज्य में राजनीतिक बहस छिड़ गई है. विपक्ष कांग्रेस ने इसे शिक्षा प्रणाली की विफलताओं और कमियों को छिपाने का प्रयास बताया है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा कि कैमरों पर प्रतिबंध लगाने या धमकियां देने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं आ सकता.

भाजपा प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि कुछ लोग सस्ती राजनीति के लिए भीड़ जुटाकर रील्स बनाते हैं और बच्चों में भय का माहौल पैदा करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के लिए शांतिपूर्ण माहौल प्रदान करना प्रशासन का संवैधानिक कर्तव्य है.

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