भारत में गरीबी और असमानता पर शोध के लिए जीन द्रेज़ को वैश्विक सम्मान

‘स्क्रोल’ के मुताबिक, अर्थशास्त्री जीन द्रेज़ को शुक्रवार को पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित विश्व असमानता सम्मेलन में ग्लोबल इनइक्वैलिटी रिसर्च अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

द्रेज़ को भारत में गरीबी और असमानता के मापन पर उनके शोध के साथ-साथ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के समर्थन में उनकी भूमिका के लिए यह सम्मान मिला है.

पुरस्कार मिलने के बाद द्रेज़ ने कहा, "यह सम्मान केवल मेरी उपलब्धि नहीं है. मेरा सारा काम बदलाव के लिए काम करने वाले लोगों और समूहों के सहयोग से हुआ है."

उन्होंने कहा कि भारत में आर्थिक असमानता के अलावा जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता और शिक्षा तक पहुंच में भारी अंतर जैसी कई तरह की असमानताएं मौजूद हैं. हालांकि भारत में इनके खिलाफ संघर्ष और प्रतिरोध की मजबूत परंपरा भी रही है.

ग्लोबल इनइक्वैलिटी रिसर्च अवॉर्ड हर दो साल में उन शोधकर्ताओं को दिया जाता है जिन्होंने वैश्विक असमानताओं को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो. यह इस पुरस्कार का दूसरा संस्करण है. 2024 में पहला पुरस्कार बीना अग्रवाल और जेम्स के बॉयस को सामाजिक और पर्यावरणीय असमानताओं पर उनके काम के लिए संयुक्त रूप से दिया गया था.

हाल के वर्षों में द्रेज़ ने मनरेगा को समाप्त करने के प्रयासों का विरोध किया है और राशन वितरण में आधार प्रमाणीकरण की अनिवार्यता पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने विकसित भारत-गारंटी ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून की आलोचना करते हुए कहा था कि यह ऐसा रोजगार गारंटी कानून है जो "काम की गारंटी देता है, लेकिन यह गारंटी नहीं देता कि गारंटी वास्तव में लागू होगी."

द्रेज़ ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आधार प्रमाणीकरण न होने के कारण लोगों को राशन से वंचित किए जाने पर भी चिंता जताई है.

Previous
Previous

विद्या कृष्णन | मोदी कॉकरोच को मारने के लिए तोप का इस्तेमाल कर रहे हैं

Next
Next

युवा आंदोलनों से भाजपा क्यों डरती है? विरोध से निपटने की चार-स्तरीय रणनीति की पड़ताल