ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के मुख्य दोषी दारा सिंह को किया जाएगा रिहा
वर्ष 1999 में ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की नृशंस हत्या के मुख्य दोषी दारा सिंह को जल्द ही जेल से रिहा किए जाने की संभावना है. ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने जेल में उसके 'अच्छे व्यवहार' के आधार पर उसकी समय पूर्व रिहाई की सिफारिश की है.
‘द हिंदू’ में सत्यसुंदर बारिक की रिपोर्ट के अनुसार, दारा सिंह वर्तमान में क्योंझर जिला जेल में बंद है. वह विभिन्न जेलों में 26 वर्ष से अधिक का समय काट चुका है. 22 जनवरी 1999 की एक सर्द रात को दारा सिंह ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर उस वैन में आग लगा दी थी, जिसमें स्टेन्स और उनके बेटे सो रहे थे. क्योंझर जिला प्रशासन से इस संबंध में प्रस्ताव मिलने के बाद पुलिस महानिदेशक (कारागार) ने उसकी रिहाई की सिफारिश की थी.
ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बैठक में जेल से समय पूर्व रिहाई के पात्र आजीवन कारावास के कैदियों के मामलों पर विचार किया गया था.
सितंबर 2025 में हुई बोर्ड की पिछली बैठक में 107 मामलों पर विचार किया गया था. इनमें से 18 मामलों की सिफारिश की गई थी, 75 मामलों को खारिज कर दिया गया था और 14 मामलों को बोर्ड द्वारा टाल दिया गया था.
ओडिशा के कारागार और सुधारात्मक सेवा निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया, “नवंबर 2025 के दौरान सरकार से मंजूरी मिलने पर, सभी 18 आजीवन कारावास के कैदियों को जेलों से रिहा कर दिया गया है. टाले गए सभी 14 मामलों को समय पूर्व रिहाई पर विचार के लिए दोबारा बोर्ड के सामने रखा गया था. दारा सिंह का मामला भी उन्हीं में से एक था.” बोर्ड ने पहले सिंह के मामले को उत्तर प्रदेश के औरैया जिले (उसका गृह जिला) के प्रशासन से नई रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए टाल दिया था, क्योंकि औरैया के पुलिस अधीक्षक की पिछली रिपोर्ट 2022 की थी.
साल 2022 में, सुदर्शन टीवी के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने दारा सिंह को जेल से रिहा कराने के लिए एक अभियान चलाया था. जब उन्होंने क्योंझर जेल में उससे मिलने का प्रयास किया, तो उन्हें अनुमति नहीं दी गई. उस समय, वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, जो तब क्योंझर से विधायक थे, चव्हाणके के साथ जेल के बाहर धरने पर बैठ गए थे और उसकी रिहाई की मांग की थी.
ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड
22 जनवरी 1999 को ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटे — फिलिप (11) और टिमोथी (7) — क्षेत्र के ईसाइयों के एक वार्षिक मिलन समारोह 'जंगल कैंप' में शामिल होने के लिए क्योंझर जिले के मनोहरपुर आए थे. जब वे एक स्टेशन वेगन (वैन) में सो रहे थे, तब दारा सिंह के नेतृत्व में एक भीड़ ने वैन को बाहर से बंद कर दिया, उस पर ज्वलनशील पदार्थ डाला और आग लगा दी. इस भयानक कृत्य के बाद, वे कथित तौर पर 'जय बजरंग दल' के नारे लगा रहे थे. हमलावरों का आरोप था कि स्टेन्स हिंदुओं को जबरन ईसाई धर्म में परिवर्तित करने में शामिल थे.
घटना के एक सप्ताह बाद नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी. पी. वाधवा की अध्यक्षता वाले एक न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस अपराध की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में बजरंग दल शामिल नहीं था. समिति ने यह भी नोट किया कि स्टेन्स के जबरन धर्मांतरण में शामिल होने का कोई सबूत नहीं था, और वे कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के लिए एक आश्रय गृह चला रहे थे. हालांकि, ऐसे संकेत देने वाले सबूत मिले थे कि दारा सिंह और भीड़ के कुछ सदस्य संघ परिवार से थे.
इस हत्याकांड, जिसने वैश्विक स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया था, के सिलसिले में 1999 से 2000 के बीच कुल 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उनमें से 37 को शुरुआती सुनवाई के दौरान बरी कर दिया गया. दारा सिंह सहित 14 लोगों को एक नामित सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराया था. बाद में, उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 11 और लोगों को बरी कर दिया.
अदालत द्वारा दी गई सजाओं में 14 साल की कैद से लेकर मृत्युदंड तक शामिल था. दारा सिंह की मौत की सजा को अंततः आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. घटना के समय नाबालिग रहे चेंचू हांसदा को एक अपील के बाद 2008 में रिहा कर दिया गया था. यदि दारा सिंह को रिहा कर दिया जाता है, तो ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या का कोई भी दोषी जेल में नहीं बचेगा.

