सीबीएसई की गड़बड़ी बताने पर छात्र के पीछे पड़ा बीजेपी का आईटी सेल, उसे ‘पाकिस्तानी’ और ‘देश विरोधी’ बताया

राहुल गांधी ने सोमवार को कक्षा 12 के एक छात्र का बचाव किया, जिसने उत्तर पुस्तिका में कथित हेरफेर (मिसमैच) और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) के खिलाफ शिकायत की थी. राहुल गांधी ने भाजपा समर्थकों और दक्षिणपंथी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर आरोप लगाया कि वे मूल्यांकन त्रुटियों पर छात्र की चिंताओं को दूर करने के बजाय उस किशोर को निशाना बना रहे हैं.

‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि यह "दशकों में पहली बार" है जब सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं, राहुल ने कहा, "मोदी-शाह की जोड़ी ने एक और संस्थान को धांधली के प्रतीक में बदल दिया है." यह विवाद ‘तब शुरू हुआ जब वेदांत श्रीवास्तव के रूप में पहचाने गए छात्र ने ‘एक्स पर दावा किया कि उसे भौतिक विज्ञान में उम्मीद से बहुत कम अंक मिले हैं और उसने सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, वेदांत ने दावा किया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई भौतिक विज्ञान की उत्तर पुस्तिका उसकी नहीं थी, जबकि उसकी अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाएं उसकी लिखावट से मेल खा रही थीं. उसने अपने दावों के समर्थन में तीनों उत्तर पुस्तिकाओं की तस्वीरें भी साझा कीं.  उसने बोर्ड से अपनी मूल भौतिक उत्तर पुस्तिका को सत्यापित करने, स्कैनिंग और टैगिंग प्रक्रिया की समीक्षा करने और यह जांचने का आग्रह किया कि क्या डिजिटलीकरण के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं में कोई उलटफेर (मिसमैच) हुआ है. इस मुद्दे ने सीबीएसई द्वारा शुरू की गई ओएसएम-आधारित डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर कई छात्रों की ओर से आलोचना को जन्म दिया.

छात्र का समर्थन करते हुए राहुल ने कहा, "एक 17 साल का लड़का, जिसकी उत्तर पुस्तिका का गलत मूल्यांकन किया गया था, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया. लेकिन मदद के बजाय उसे गालियां मिलीं." उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के आईटी सेल ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए छात्र को "देश विरोधी" और "डीप स्टेट" का हिस्सा करार दिया.

एक्स प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट में अकाउंट का क्षेत्र 'पाकिस्तान' दिखने के बाद छात्र को ऑनलाइन भी निशाना बनाया गया, जिससे कुछ उपयोगकर्ताओं ने उसे "पाकिस्तानी" कहना शुरू कर दिया. वेदांत के भाई सिद्धांत श्रीवास्तव ने एक वीडियो साझा कर दावा किया कि तकनीकी खराबी के कारण अकाउंट का क्षेत्र बदला नहीं जा सका था. कुछ उपयोगकर्ताओं द्वारा एक्स अकाउंट बनाने के समय पर सवाल उठाने के बाद, सिद्धांत ने कहा कि यह प्रोफाइल सीबीएसई मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े "वास्तविक मुद्दों" को उठाने के लिए बनाई गई थी.

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और सीबीएसई की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई प्रक्रिया के कारण धुंधली उत्तर पुस्तिकाएं, गलत मूल्यांकन, मिसमैच बुकलेट और अन्य अनियमितताएं हुई हैं, जिससे देश भर के छात्र प्रभावित हुए हैं.

उन्होंने दावा किया कि कक्षा 12 का उत्तीर्ण प्रतिशत 88 प्रतिशत से घटकर 85 प्रतिशत हो गया है और सवाल किया कि सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय इस प्रणाली को लागू करने से पहले तकनीकी समस्याओं का अनुमान लगाने में क्यों विफल रहे. आप नेता अरविंद केजरीवाल ने सीबीएसई मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर आरोप लगाया कि खराब पोर्टल्स और धुंधली स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं सहित मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में समस्याओं के कारण देश भर के छात्र और अभिभावक अत्यधिक तनाव में हैं. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "पहले नीट और अब सीबीएसई. धर्मेंद्र प्रधान एक दिन के लिए भी शिक्षा मंत्री बनने के लायक नहीं हैं."

ऑन-स्क्रीन मार्किंग और पुनर्मूल्यांकन के अलावा, शुल्क गणना में अनियमिताओं को भी छात्रों और अभिभावकों द्वारा बड़े पैमाने पर उठाया गया है. खबरों के मुताबिक, पोर्टल कथित तौर पर प्रति विषय ₹1 से लेकर लगभग ₹70,000 तक के मनमाने पुनर्मूल्यांकन शुल्क दिखा रहा था. छात्रों ने भारी ट्रैफिक के बीच सर्वर क्रैश होने, भुगतान विफल होने (जहाँ पुष्टि के बिना पैसे कट गए) और खराब तरीके से स्कैन की गई या अपठनीय उत्तर पुस्तिकाओं की भी शिकायत की.

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