यह एक खेदजनक तथ्य; पीएम मोदी ने एक भी ओपन प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने रविवार (24 मई, 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस सप्ताह की शुरुआत में नॉर्वे और नीदरलैंड की यात्रा के दौरान विदेशी पत्रकारों और भारतीय अधिकारियों के बीच तीखी बहस को "शर्मनाक" बताया. ईजीआई ने सरकार से मीडिया को एक "प्रतिद्वंद्वी" के रूप में देखना बंद करने का आह्वान किया और कहा कि यह एक "खेदजनक तथ्य" है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपनी सरकार के सत्ता में आने के बाद से एक भी ओपन (खुली) प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है.
‘द हिंदू’ के अनुसार, संगठन ने एक बयान में कहा, "एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोनों देशों की हालिया यात्रा के दौरान भारतीय सरकारी अधिकारियों और नीदरलैंड व नॉर्वे के पत्रकारों के बीच हुई शर्मनाक नोकझोंक को लेकर चिंतित है." गिल्ड ने आगे कहा, "यूरोपीय मीडिया के साथ यह टकराव प्रधानमंत्री द्वारा एक प्रेस ब्रीफिंग के बाद स्थानीय पत्रकारों के सवालों के जवाब देने से इनकार करने के कारण शुरू हुआ."
भारतीय राजनयिकों और यूरोपीय पत्रकारों के बीच यह बहस तब शुरू हुई जब नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों के मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठाए. इसके जवाब में, विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम), सिबी जॉर्ज ने एक विस्तृत उत्तर देते हुए कहा, "लोगों को भारत के पैमाने (आकार) की कोई समझ नहीं है. वे किसी अज्ञात, अज्ञानी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओज़) द्वारा प्रकाशित एक या दो रिपोर्ट पढ़ते हैं और फिर आकर सवाल पूछने लगते हैं."
इससे पहले, लिंग ने मोदी से उस समय सवाल पूछने का प्रयास किया था जब उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य दिया था और बिना किसी सवाल का जवाब दिए मीडिया स्थल से चले गए थे.
ईजीआई ने कहा, "यह एक खेदजनक तथ्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में अपने एक दशक से अधिक के कार्यकाल के दौरान एक भी ओपन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है." इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा, "ईजीआई सरकार से आह्वान करता है कि वह मीडिया को केवल उसका वही काम करने के लिए—जो कि सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह ठहराना है—एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखना बंद करे."

