‘आत्मनिर्भर भारत’: बड़ी बिक्री में भारत के खाद टेंडर की अधिकांश आपूर्ति करेगा चीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘मेक इन इंडिया, स्वदेशी, लोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अपने नारों को चाहे जब दोहराते रहते हैं, लेकिन ताज़ा खबर है कि चीन से भारत जल्द ही कम से कम 12 लाख (1.2 मिलियन) टन प्रमुख उर्वरक (खाद) का आयात करने वाला है. इस साल की शुरुआत में बीजिंग द्वारा निर्यात नियंत्रण में ढील दिए जाने के बाद, दुनिया के शीर्ष उत्पादक की ओर से बिक्री में यह बड़ी बढ़ोतरी को दर्शाता है.
‘ब्लूमबर्ग’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह खेप व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले नाइट्रोजन उर्वरक 'यूरिया' के लिए भारत के सबसे हालिया टेंडर का हिस्सा है. कुल बुक की गई मात्रा का कम से कम दो-तिहाई हिस्सा इसी आपूर्ति से पूरा होगा, और इस खेप को 24 सितंबर तक लोडिंग पोर्ट्स से रवाना करना अनिवार्य है.
भारत के उर्वरक मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. भारत यूरिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है, जिससे इसकी खरीदारी पर वैश्विक बेंचमार्क के रूप में पैनी नजर रखी जाती है. यह व्यापार इस बात का एक और संकेत है कि यूरिया बाजार में बनी तंगी अब सुधर रही है, खासकर तब जब इस साल की शुरुआत में ईरान में युद्ध के कारण एक प्रमुख निर्यात क्षेत्र — मध्य पूर्व— से आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी. इस प्रमुख फसल पोषक तत्व की कीमतें अप्रैल में चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन तब से इस तेजी का असर समाप्त हो गया है.
यह आंशिक रूप से चीन में नीतिगत बदलावों के कारण हुआ है. स्थानीय किसानों के लिए आपूर्ति की सुरक्षा के उद्देश्य से बीजिंग ने युद्ध की शुरुआत के आसपास उर्वरक निर्यात पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था. मगर रियायत के फैसले के बाद कोटा बढ़ाकर अब लगभग 50 से 55 लाख (5 से 5.5 मिलियन) टन कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि भारत के टेंडर के लिए तय की गई मात्रा कुल कोटे के पांचवें हिस्से से अधिक होगी.
चीन के सीमा शुल्क (कस्टम्स) डेटा से पता चलता है कि जून और जुलाई में लगभग 4,10,000 टन यूरिया का निर्यात किया गया था. भारत अमेरिका और ब्राजील के संयुक्त उपयोग से भी अधिक यूरिया का उपयोग करता है.

