ऐन ऐपलबॉम | लूट का साम्राज्य

अमेरिकी विदेश नीति अब दूतावासों से नहीं, दलालों और विचारधारा के सौदागरों से चल रही है — ऐन ऐपलबॉम की पड़ताल

अमेरिकी पत्रिका द अटलांटिक के अक्टूबर 2026 अंक में छपे एक लंबे लेख में वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार ऐन ऐपलबॉम ने यह दलील रखी है कि अमेरिका अब अपने सहयोगियों के लिए वह देश नहीं रहा जिसे वे जानते थे. "एम्पायर ऑफ़ ग्रिफ़्ट" यानी "लूट का साम्राज्य" शीर्षक से छपे इस लेख में ऐपलबॉम लिखती हैं कि अमेरिकी ताक़त अब सिर्फ़ प्रशिक्षित राजनयिकों और सरकारी तंत्र के ज़रिए नहीं चलती. अनौपचारिक दूत, निजी कंपनियाँ, ऑनलाइन ठग और कट्टर विचारधारा वाले लोग — सरकार के भीतर भी और बाहर भी — अब ज़्यादा मायने रखते हैं. ये लोग लोकतंत्र फैलाने की भाषा नहीं बोलते, लंबे रिश्ते नहीं बनाना चाहते, और अमेरिका की साख की परवाह नहीं करते. वे अमेरिकी कूटनीति और सरकार के औज़ारों को अपने कारोबारी या वैचारिक मक़सद के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि अचानक वे ऐसा कर सकते हैं.

ब्राज़ील: जब सारे सरकारी दरवाज़े एक साथ बंद हो गए

लेख की शुरुआत ब्राज़ील के उस संकट से होती है जो 2025 की गर्मियों में शुरू हुआ. ट्रंप प्रशासन ने अचानक ब्राज़ीली उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगा दिया, जिससे कॉफ़ी उगाने वालों से लेकर जूता बनाने वालों तक सब पर संकट आ गया. साथ ही अमेरिका ने ब्राज़ील के आठ सुप्रीम कोर्ट जजों के वीज़ा रद्द कर दिए और एक ताक़तवर जज तथा उनके परिवार पर अभूतपूर्व वित्तीय और यात्रा प्रतिबंध लगा दिए.

ऐपलबॉम बताती हैं कि यह पहला मौक़ा था जब किसी अमेरिकी प्रशासन ने टैरिफ़ को आर्थिक वजहों से नहीं, बल्कि एक मित्र लोकतंत्र की भीतरी राजनीति को प्रभावित करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया. ट्रंप सार्वजनिक रूप से पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे को "विच हंट" बता रहे थे. बोल्सोनारो पर 2022 का चुनाव हारने के बाद तख़्तापलट की साज़िश का मुक़दमा चल रहा था, और उनके समर्थकों ने ब्राज़ील की संसद और दूसरी संघीय इमारतों पर हमला किया था — 6 जनवरी 2021 के अमेरिकी हमले से प्रेरित होकर. स्टीव बैनन ने ब्राज़ीली हमलावरों को "स्वतंत्रता सेनानी" कहा था.

अमेरिका ने पहले भी प्रतिबंध और वीज़ा पाबंदियाँ लगाई हैं, लेकिन तानाशाहों, अपराधियों और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार या अत्याचार के आरोपियों पर. जज अलेक्ज़ांद्रे दे मोरायस पर ऐसा कोई विश्वसनीय आरोप नहीं था. उनके ख़िलाफ़ दो ही बातें थीं — उनकी अदालत बोल्सोनारो पर मुक़दमा चला रही थी, और उन्होंने एलन मस्क को नाराज़ कर दिया था. दे मोरायस ने एक्स पर जुर्माने की धमकी दी थी और ग़लत सूचना फैलाने वाले अकाउंट ब्लॉक करने का आदेश दिया था. मस्क ने उनकी तुलना वोल्डेमॉर्ट से करते हुए कहा था कि उन्हें जाना होगा.

संकट के इस मोड़ पर, जब अरबों डॉलर और ब्राज़ील की लोकतांत्रिक संप्रभुता दाँव पर थी, ब्राज़ीली अफ़सरों ने पाया कि ट्रंप प्रशासन में कोई भी वामपंथी झुकाव वाले राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के औपचारिक प्रतिनिधियों से बात करने को तैयार नहीं. वॉशिंगटन में ब्राज़ील की राजदूत अलग-थलग पड़ गईं. विदेश मंत्री, जो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को दशकों से जानते थे, किसी से संपर्क नहीं कर सके. एक जूनियर अधिकारी ने ऐपलबॉम को बताया कि अमेरिकी ट्रेज़री में बैठा उसका ग्रेजुएट स्कूल का सहपाठी तक फ़ोन नहीं उठा रहा था.

तत्कालीन ब्राज़ीली वित्त मंत्री फ़र्नांडो हदाद ने किसी तरह अमेरिकी ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट से बातचीत तय की. बैठक से दो दिन पहले ट्रेज़री ने उसे रद्द कर दिया — और उसी समय पर बेसेंट ने पूर्व राष्ट्रपति के बेटे एदुआर्दो बोल्सोनारो से मुलाक़ात की, जो टेक्सस में रहते हैं और डॉनल्ड ट्रंप जूनियर के दोस्त हैं.

"हमारे पास जितने भी आधिकारिक रास्ते थे, वे अचानक बंद हो गए," उस जूनियर अधिकारी ने ऐपलबॉम से कहा. इसके बाद असंख्य अनौपचारिक लोग दरवाज़े खटखटाने लगे — ऐसे लॉबिस्ट जो सरकारी अफ़सरों से नहीं, बल्कि मार-ए-लागो के इर्द-गिर्द घूमने वालों से या उन मागा प्रभावशाली लोगों से अपने रिश्ते बेच रहे थे जिनके एक्स अकाउंट राष्ट्रपति का ध्यान खींच सकते हैं. एक निवेशक ने, जिसका दावा था कि बेसेंट के छुट्टी वाले घर के पास उसका मकान है, ट्रेज़री सचिव से मुलाक़ात कराने की पेशकश की — बदले में उसे अहम खनिजों तक पहुँच चाहिए थी. ब्राज़ीलियों ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया.

आख़िरकार समझौता कराने में मदद मिली अरबपति जोएस्ली बतिस्ता से, जिनकी मीटपैकिंग कंपनी अमेरिका और ब्राज़ील दोनों में कारोबार करती है और जिनकी अमेरिकी सहयोगी कंपनी ने ट्रंप के शपथग्रहण में 50 लाख डॉलर चंदा दिया था — अमेज़न, मेटा और गूगल के कुल चंदे से भी ज़्यादा. बतिस्ता के पास कोई सरकारी पद नहीं था, लेकिन उनके पैसे ने शायद उन्हें वह रसूख़ दिया जिससे 2025 की संयुक्त राष्ट्र महासभा और क्वालालंपुर शिखर सम्मेलन में ट्रंप और लूला की मुलाक़ातें हो सकीं. टैरिफ़ घटा दिए गए.

यह शांति अस्थायी थी. इस बीच विदेश विभाग ने ब्राज़ील नीति पर नया वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया — डैरेन बीटी, जिन्होंने रिवॉल्वर न्यूज़ नाम की वह वेबसाइट शुरू की थी जो "फ़ेड्सरेक्शन" की साज़िश थ्योरी फैलाती थी, यानी यह मान्यता कि 6 जनवरी के दंगों के पीछे संघीय एजेंट थे. ब्राज़ील सरकार ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार कर दिया. जुलाई में प्रशासन ने दो दूतों को ब्राज़ील भेजकर चुनाव नकारने वालों से मिलवाने और ब्राज़ीली चुनाव प्रणाली की "जाँच" कराने की योजना बनाई — उनके वीज़ा भी ख़ारिज हो गए. इस साल पूर्व राष्ट्रपति के दूसरे बेटे फ़्लावियो बोल्सोनारो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं, और ऐपलबॉम के मुताबिक़ ब्राज़ील में मुख्य सवाल यह नहीं था कि अमेरिका चुनाव में दख़ल देगा या नहीं, बल्कि यह कि कैसे देगा.

"क्रांति" की विचारधारा

ऐपलबॉम इस पूरे परिघटना को एक क्रांतिकारी आंदोलन की तरह पढ़ती हैं. मार्क्स के इस वाक्य को याद करते हुए कि क्रांतियाँ इतिहास के इंजन होती हैं, वे लिखती हैं कि आधुनिक युग का हर बड़ा क्रांतिकारी आंदोलन सिर्फ़ एक देश की राजनीति नहीं, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बदलना चाहता था — नेपोलियन, लेनिन और त्रॉत्स्की, आयतुल्लाह ख़ुमैनी. उनके मुताबिक़ अमेरिकी संघीय सरकार पर क़ाबिज़ मौजूदा गिरोह भी अलग नहीं. इन्हें "अलगाववादी" कहना ग़लत है. ये ख़ुद को साधारण रिपब्लिकन नहीं मानते जो चुनाव जीतकर अगले चुनाव तक सत्ता में हैं — ये ख़ुद को एक ऐसे आंदोलन का अगुआ दस्ता मानते हैं जो सिर्फ़ अमेरिका नहीं, पूरी दुनिया बदल देगा.

इनके दुश्मन वैध प्रतिद्वंद्वी नहीं, अस्तित्व का ख़तरा हैं और अंतरराष्ट्रीय हैं — "वोकनेस" की महामारी फैलाने वाले, तथाकथित "सेंसरशिप-औद्योगिक गठजोड़" के समर्थक, कारोबार पर "नियमन" थोपने वाले, या "सामूहिक प्रवासन" के हिमायती. बीटी ने एक्स पर लिखा था कि चीज़ें ठीक चलानी हैं तो "योग्य श्वेत पुरुषों" का नियंत्रण ज़रूरी है. बैनन एक दशक से ख़ुद की तुलना लेनिन से करते रहे हैं.

ये विचार अब अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में हैं. पिछले साल म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में उपराष्ट्रपति वैंस ने यूरोप पर अपने बुनियादी मूल्यों से पीछे हटने का आरोप लगाया. इस साल के म्यूनिख सम्मेलन में रुबियो ने वही बात ज़्यादा शाइस्तगी से कही — प्रवासन की लहर को समाज की एकता के लिए ख़तरा बताते हुए उन्होंने अमेरिका और यूरोप से "साझा इतिहास, ईसाई आस्था, संस्कृति, विरासत, भाषा, वंश" के नाम पर मिलकर काम करने को कहा. लोकतंत्र, पारदर्शिता या क़ानून के राज का ज़िक्र उन्होंने नहीं किया.

ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में यह बात दस्तावेज़ी शक्ल ले चुकी है. उसमें कहा गया है कि अमेरिका अब दुनिया में कहीं भी लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए दख़ल नहीं देगा, लेकिन "यूरोप को उसकी मौजूदा दिशा सुधारने में मदद" ज़रूर करेगा — यानी यूरोपीय राजनीति में सीधे दख़ल, ताकि "सभ्यतागत मिटाव" रोका जा सके और विचारधारा के सहयोगियों को सत्ता तक पहुँचाया जा सके. विदेश विभाग के सबस्टैक पर 27 साल के ट्रंप नियुक्त अधिकारी सैमुअल सैमसन ने यूरोपियों पर पश्चिमी सभ्यता के ख़िलाफ़ आक्रामक अभियान चलाने का आरोप लगाया. सार्वजनिक कूटनीति की उपमंत्री सारा रॉजर्स ने कांग्रेस को बताया कि अमेरिका "एक्सचेंज कार्यक्रमों, सांस्कृतिक विरासत पहलों, माइक्रो-ग्रांट और बाक़ी सब औज़ारों" का पूरा इस्तेमाल राष्ट्रपति के अमेरिका फ़र्स्ट एजेंडे को आगे बढ़ाने में कर रहा है. सैमसन एएफ़डी समेत यूरोप के धुर दक्षिणपंथी नेताओं से निजी तौर पर मिलते रहे हैं. रॉजर्स ने ब्रिटेन यात्रा में प्रवासियों की वजह से अपराध बढ़ने का आरोप लगाया, जबकि ब्रिटेन में अपराध घट रहा है.

अपने ही गोलार्ध में यह परियोजना खुलकर साम्राज्यवादी है. रणनीति दस्तावेज़ कहता है कि अमेरिका "अपने सिद्धांतों और रणनीति से मोटे तौर पर जुड़ी सरकारों, पार्टियों और आंदोलनों को पुरस्कृत और प्रोत्साहित करेगा". जब ट्रंप ने अमेरिकी विशेष बलों को वेनेज़ुएला से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उठा लाने का आदेश दिया और उनके प्रशासन ने वहाँ के तेल का दोहन किया, तो हमारे गोलार्ध के वैध लोकतांत्रिक नेताओं ने इसे चेतावनी की तरह पढ़ा — यह तुम्हारे साथ भी हो सकता है. फ़्लावियो बोल्सोनारो ने तो अक्टूबर 2025 में पूछ ही लिया कि क्या अमेरिकी सेना रियो के पास ग्वानाबारा खाड़ी में "कुछ महीने बिताना" नहीं चाहेगी.

जहाँ विचारधारा और धंधा एक हो जाते हैं

दूसरी क़िस्म के क्रांतिकारी वे हैं जिनकी दिलचस्पी तेल-गैस, क्रिप्टोकरेंसी, दुर्लभ खनिज और सबसे बढ़कर बड़ी टेक कंपनियों में है. व्हाइट हाउस के उप-चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ स्टीफ़न मिलर ने सीएनएन पर कहा था कि असली दुनिया ताक़त और बल से चलती है, यही सृष्टि के आरंभ से चले आ रहे लोहे के क़ानून हैं.

जनवरी में रियल एस्टेट कारोबारी से अमेरिकी विशेष दूत बने स्टीव विटकॉफ़ ने पेरिस में यूक्रेन पर जुटे यूरोपीय राष्ट्राध्यक्षों से कहा कि वे युद्ध के बाद लागू होने वाले ऊर्जा और खनिज सौदों पर रूस से पहले ही बातचीत कर रहे हैं. बैठक में मौजूद कई लोग चौंक गए, जिनकी चिंता यूक्रेन में शांति थी. व्हाइट हाउस ने इस बयान से इनकार किया है. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फ़िंक यूक्रेनियों से बातचीत के दौरान जेरेड कुशनर के बग़ल में बैठे थे.

ट्रंप का "बोर्ड ऑफ़ पीस", जिसके नियम किसी विशिष्ट गोल्फ़ क्लब जैसे हैं — ट्रंप अध्यक्ष हैं, अपना उत्तराधिकारी चुन सकते हैं, बोर्ड नियुक्त कर सकते हैं और मिशन तय कर सकते हैं — यही सवाल खड़ा करता है. इसका बहुत सारा पैसा खाड़ी देशों से आता है और पारदर्शी नहीं है. द गार्डियन के मुताबिक़ ग़ज़ा के पुनर्निर्माण के नाम पर बोर्ड ने फ़लस्तीनी ज़मीन और इमारतें अपने क़ब्ज़े में लेने का अधिकार माँगा है, जिससे कुशनर की प्रस्तावित "न्यू ग़ज़ा" परियोजना का रास्ता खुल सकता है.

पिछले साल ट्रंप और वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कज़ाख़िस्तान के दुनिया के सबसे बड़े अछूते टंगस्टन भंडारों में से एक तक एक छोटी अमेरिकी खनन कंपनी की पहुँच बनवाई. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ 1.6 अरब डॉलर की संघीय मदद वाले इस सौदे से ट्रंप के बेटों को फ़ायदा होता है, जो परियोजना में हिस्सेदारी रखने वाले एक निवेश बैंक के आंशिक मालिक हैं. लुटनिक के बेटे कैंटर फ़िट्ज़जेराल्ड चलाते हैं, जो इस सौदे से जुड़ी है. दोनों पक्षों ने किसी भूमिका से इनकार किया है. वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़ ट्रंप के बेटों ने कई डिफ़ेंस-टेक कंपनियों में निवेश किया है जिन्हें पेंटागन के ठेके या संघीय फ़ंडिंग मिली है. टाइम्स का आकलन है कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में 2.2 अरब डॉलर कमाए, जिसका बड़ा हिस्सा क्रिप्टो परियोजनाओं से आया.

टेक और विचारधारा का गठजोड़ यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज़ ऐक्ट के ख़िलाफ़ साझा लड़ाई में सबसे साफ़ दिखता है. विदेश विभाग इसे "सेंसरशिप" कहता है. अमेरिका ने इस क़ानून को बनाने में भूमिका के लिए यूरोपीय संघ के पूर्व आयुक्त थियरी ब्रेटन और चार अन्य यूरोपियों पर वीज़ा पाबंदी लगा दी — यानी अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर उनकी आज़ादी छीन ली. ऐपलबॉम लिखती हैं कि यह क़ानून सेंसरशिप की बात करता ही नहीं. वह प्लेटफ़ॉर्मों से कहता है कि नाबालिगों की रक्षा करें, यूरोपीय क़ानूनों का पालन करें — जिनमें जर्मनी जैसे देशों में नाज़ी प्रचार, होलोकॉस्ट से इनकार, बाल पोर्नोग्राफ़ी और आतंकवाद के उकसावे पर रोक शामिल है — और अपने एल्गोरिदम को लेकर पारदर्शिता बरतें.

मस्क अपने प्लेटफ़ॉर्म, अपने चंदे और सरकार के भीतर अपने रसूख़ का इस्तेमाल डिजिटल नियमन के ख़िलाफ़ और नस्लवादी साज़िश थ्योरियों के पक्ष में करते रहे हैं. लंदन की "यूनाइट द किंगडम" रैली में वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि हिंसा तुम्हारी ओर आ रही है, या तो लड़ो या मरो. एएफ़डी की रैली में भी वे प्रकट हुए, जिसे जर्मन ख़ुफ़िया एजेंसी धुर दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन मानती है. 2024 में इंग्लैंड के साउथपोर्ट में चाकू हमले के बाद यह झूठ कि हमलावर मुसलमान और अवैध प्रवासी था, एक्स और दूसरे प्लेटफ़ॉर्मों पर लाखों लोगों तक पहुँचा और दंगे भड़के.

राजनीति और मुनाफ़े का यह रिश्ता नया नहीं. न्याय विभाग की एपस्टीन फ़ाइलों में सुरक्षित 2018 के एक संदेश में बैनन ने जेफ़री एपस्टीन को लिखा था कि यूरोप की चरमपंथी पार्टियों की कामयाबी क्रिप्टो उद्योग के लिए रास्ता आसान कर देगी. ख़ुद को इतालवी, जर्मन और स्विस दक्षिणपंथी पार्टियों तथा ओरबान और नाइजेल फ़राज का सलाहकार बताते हुए बैनन ने लिखा कि सीटें 92 से 200 तक ले जाई जा सकती हैं और फिर "क्रिप्टो पर कोई भी क़ानून या जो कुछ हम चाहें, रोका जा सकता है." एपस्टीन का जवाब था — "रोजर दैट."

ग्रीनलैंड में कैमोफ़्लाज पैंट और तेल का कुआँ

मई में लुइज़ियाना के गवर्नर जेफ़ लैंड्री ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक पहुँचे — ट्रंप के "विशेष दूत" के तौर पर, जिस पद पर न वेतन है न डेनमार्क की मान्यता. उतरते ही उन्होंने कैमोफ़्लाज पैंट पहन ली, जैसे लड़ाई पर जा रहे हों. वे उस कारोबारी सम्मेलन में गए जिसमें उन्हें बुलाया ही नहीं गया था. उन्होंने मागा टोपियाँ बाँटने की कोशिश की, ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली. लुइज़ियाना अमेरिका की स्वास्थ्य रैंकिंग में सबसे नीचे है और ग्रीनलैंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवा सबको उपलब्ध है, इसके बावजूद वे एक डॉक्टर साथ लाए जो ग्रीनलैंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बात करने आया लगता था. उनके जाने के अगले दिन ग्रीनलैंडवासियों ने नए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया, जिसे वे "ट्रंप टावर" कहते हैं. लौटकर लैंड्री ने फ़ॉक्स न्यूज़ पर कहा कि जिन लोगों से वे मिले, वे ग्रीनलैंड में अमेरिका की ज़्यादा भागीदारी चाहते हैं.

डेनमार्क में कोई नहीं हँस रहा था. जनवरी 2026 के उन अविश्वसनीय दिनों के बाद, जब डेनिश सेना ने संभावित अमेरिकी हमले को नाकाम करने के लिए द्वीप पर ब्लड बैंक पहुँचाए और हवाई पट्टियाँ उड़ाने की तैयारी की, कोपेनहेगन नुउक आने वाले हर अमेरिकी पर नज़र रखता है. अगस्त में ग्रीनलैंड एनर्जी नाम की एक अमेरिकी तेल कंपनी ने बिना औपचारिक अनुमति के द्वीप के दूरदराज़ हिस्से में ड्रिलिंग का सामान पहुँचाना शुरू कर दिया. उसके निवेशकों में रिपब्लिकन पार्टी के बड़े दानदाता केन ग्रिफ़िन शामिल हैं. पूर्व टॉक-शो होस्ट डॉ. फ़िल को इस परियोजना पर वृत्तचित्र शृंखला बनाने का काम मिला है. कंपनी ने स्थानीय लोगों को सालाना 1,85,000 डॉलर तक की तनख़्वाह का ज़िक्र किया, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है. कंपनी का कहना है कि उसने भर्ती औपचारिक रूप से शुरू नहीं की और विशेषज्ञ सुरक्षाकर्मियों के लिए ऐसी तनख़्वाहें सामान्य हैं. कई क़स्बों में विरोध प्रदर्शन हुए और अगस्त के मध्य में ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने ड्रिलिंग टाल दी.

इसी बीच "क्रिप्टो-नेटिव देश" प्रैक्सिस के सह-संस्थापक ड्राइडन ब्राउन ग्रीनलैंड पहुँचे थे — 2024 के अमेरिकी चुनाव से ठीक पहले, उनके अपने शब्दों में, उसे "ख़रीदने की कोशिश" करने. प्रैक्सिस को पलांतिर के सह-संस्थापक जो लॉन्सडेल, "द नेटवर्क स्टेट" के लेखक बालाजी श्रीनिवासन, तथा पीटर थील और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन से जुड़ी संस्थाओं का समर्थन है. डेनमार्क में अमेरिकी राजदूत केन हॉवरी ख़ुद थील के साथ पेपाल के सह-संस्थापक हैं. और ज़्यादा लगातार आने वाले हैं ड्रू हॉर्न, जो ख़ुद को अहम खनिजों का उद्यमी बताते हैं और पश्चिमी ग्रीनलैंड में डेटा सेंटर बनाना चाहते हैं. द न्यूयॉर्कर के मुताबिक़ वे ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी रह चुके हैं और 2020 में वेनेज़ुएला में नाकाम तख़्तापलट की कोशिश में शामिल एक व्यक्ति ने उनका नाम अपने संपर्क के तौर पर लिया था. हॉर्न ने हर आरोप से इनकार किया है और मई में द स्पेक्टेटर में लेख लिखा — "नहीं, मैं ग्रीनलैंड में सीआईए का जासूस नहीं हूँ." रॉयटर्स से उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस के अधिकारियों से उनका "संवाद" बना हुआ है.

डेनिश-ग्रीनलैंडिक नेता यूली राडेमाखर ने ऐपलबॉम को बताया कि जब से ट्रंप की कक्षा के अमेरिकी कारोबारी और राजनीतिक ऑपरेटर ग्रीनलैंड में सक्रिय हुए हैं, वहाँ की लोकलुभावन आज़ादी-समर्थक पार्टी नलेराक़ ज़्यादा आक्रामक हो गई है. लैंड्री की यात्रा की अगली रात वे नुउक के एक बार में गईं जहाँ लोग खुलेआम बंदूक़ें लिए घूम रहे थे — ऐसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था. उनके शब्दों में, ये लोग समाज, संस्थाओं और आपसी भरोसे को तबाह कर रहे हैं, और ग्रीनलैंडवासियों के लिए अपना मानसिक संतुलन बचाए रखना ही एक लड़ाई बन जाएगा.

कनाडा: मज़ाक़ जो मज़ाक़ नहीं था

कनाडा पर हमला भी एक मज़ाक़ की तरह शुरू हुआ — 51वाँ राज्य. दूसरी बार शपथ लेने से पहले ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि कनाडा के बहुत से लोग 51वाँ राज्य बनना पसंद करेंगे. फिर उन्होंने कनाडाई और मैक्सिकन सामान पर 25 प्रतिशत और कनाडाई ऊर्जा उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया — कथित तौर पर ड्रग्स और अवैध प्रवासियों को न रोक पाने की सज़ा के तौर पर, हालाँकि उत्तरी सीमा से ड्रग्स लगभग आते ही नहीं. जुलाई के आख़िर में शराब से लेकर हॉकी स्टिक और सीमेंट तक कई कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ का नया दौर शुरू हुआ.

कनाडा सरकार की नज़र में इनका असली मक़सद अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करना था. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मुताबिक़ ट्रंप कनाडा को तोड़ना चाहते हैं ताकि अमेरिका उसका मालिक बन सके. टैरिफ़ में राहत की बातचीत के दौरान कनाडा को अमेरिकी टेक कंपनियों पर कर लगाने का इरादा छोड़ना पड़ा.

इसके समांतर एक अनौपचारिक प्रभाव अभियान भी चला. कोविड के दौरान कुछ अमेरिकी धुर दक्षिणपंथी पॉडकास्टरों ने कनाडाई ट्रक ड्राइवरों के टीका-विरोधी आंदोलन को हवा दी. 2022 के बाद वह आंदोलन अल्बर्टा प्रांत के अलगाववादी आंदोलन में बदल गया और पॉडकास्टर भी उसी के साथ चल पड़े. टोरंटो के डिसइन्फ़ोवॉच के मार्कस कोल्गा के मुताबिक़ रूसी अकाउंट भी अल्बर्टा-केंद्रित सामग्री लगातार फैला रहे हैं. अल्बर्टा में 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह होना है, जिसमें नागरिकों से पूछा जाएगा कि प्रांत कनाडा में बना रहे या अलगाव पर दूसरे जनमत संग्रह की क़ानूनी प्रक्रिया शुरू हो.

क़रीब 600 अमेरिकी राजनीतिक पॉडकास्ट पर नज़र रखने वाले कनाडाई विद्वान टेलर ओवेन ने बताया कि पहले कनाडा का ज़िक्र कभी-कभार ही होता था, अब अल्बर्टा पर चर्चा लगातार और दोहराव भरी है, जैसे पॉडकास्टर या तो आपस में तालमेल कर रहे हों या एक-दूसरे के पीछे चल रहे हों. ग्लेन बेक के पॉडकास्ट पर अल्बर्टा के अलगाववादी कीथ विल्सन ने कहा कि प्रांत के मूल्य ओटावा के वामपंथियों से ज़्यादा अमेरिकियों से मिलते हैं.

यह सिर्फ़ मीडिया परियोजना नहीं है. कम से कम तीन मौक़ों पर विदेश विभाग के अधिकारियों ने अलगाववादी समूह अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट के प्रतिनिधियों की मेज़बानी की. ख़बरों के मुताबिक़ समूह ने भविष्य की स्वतंत्र अल्बर्टा सरकार के लिए 500 अरब डॉलर के क़र्ज़ की माँग रखी — एक नेता ने इससे इनकार किया, पर समूह के एक सह-संस्थापक ने एनबीसी न्यूज़ से इसकी पुष्टि की. जनवरी में पिज़्ज़ागेट साज़िश थ्योरी फैलाने वाले जैक पोसोबिएक के पॉडकास्ट पर स्कॉट बेसेंट ने अल्बर्टा को अमेरिका का "स्वाभाविक साझेदार" बताया और यह भी जोड़ा कि उन्होंने जनमत संग्रह की "अफ़वाह" सुनी है. अमेरिकी राजदूत पीट होएकस्ट्रा ने 2022 के ट्रक आंदोलन की नेता तमारा लिच को 4 जुलाई की पार्टी में बुलाया, जो मुक़दमे में दोषी क़रार दी जा चुकी हैं और अब भी नज़रबंद हैं.

ऐपलबॉम याद दिलाती हैं कि 1990 में मागा आंदोलन के वैचारिक दादा पैट ब्यूकेनन ने कहा था कि अगर क्यूबेक कनाडा से अलग हो जाए तो अमेरिका को "टुकड़े बटोर लेने" चाहिए. आज की नीति वही दिखती है — अर्थव्यवस्था पर दबाव डालो, संघ को तोड़ो, टुकड़े बटोर लो.

और यह सूची लंबी है

ऐपलबॉम इन तरीक़ों की एक लंबी फ़ेहरिस्त गिनाती हैं. अक्टूबर 2025 के अर्जेंटीनी मध्यावधि चुनाव से क़रीब दो हफ़्ते पहले ट्रंप प्रशासन ने 20 अरब डॉलर के बेलआउट का ऐलान किया — यानी सीधी रिश्वत, कि अगर ख़ावियर मिलेई की पार्टी नहीं जीती तो मदद वापस. मिलेई जीते, और उसके बाद उन्होंने एआई के पूरे नियमन-मुक्तिकरण का समर्थन किया. कुछ महीने बाद पीटर थील अपने पूरे परिवार के साथ कुछ समय के लिए ब्यूनस आयर्स जा बसे.

राजनीतिक समर्थन का सिलसिला भी लंबा है. फ़रवरी 2025 में वैंस जर्मनी में एएफ़डी की सह-नेता ऐलिस वाइडेल से ख़ास तौर पर मिले. 2026 में हंगरी के राष्ट्रीय चुनाव से कुछ दिन पहले वैंस ने बुडापेस्ट में ओरबान का समर्थन किया और मंच से ट्रंप को फ़ोन कर उनका समर्थन भी दिलवाया — विपक्षी नेता पेतेर मज्यार से वे मिले तक नहीं, जो बाद में भारी बहुमत से जीते. पोलैंड के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने धुर राष्ट्रवादी उम्मीदवार कारोल नावरोत्स्की को व्हाइट हाउस बुलाया, उनके उदारवादी प्रतिद्वंद्वी को नहीं, और बाद में बार-बार शेख़ी बघारी कि चुनाव उन्होंने जितवाया. इस साल वॉशिंगटन गए विभिन्न जर्मन दलों के सांसदों को बताया गया कि पेंटागन और विदेश विभाग की इमारतों में सिर्फ़ एएफ़डी और ईसाई डेमोक्रेट प्रतिनिधि जा सकते हैं; ग्रीन और सोशल डेमोक्रेट सांसदों को अंदर नहीं जाने दिया गया.

मानवीय एजेंसियों का इस्तेमाल भी बदल गया है. शरणार्थी क़ानून के दशकों पुराने मानक छोड़कर प्रशासन ने दुनिया भर से शरणार्थी-प्रक्रिया अधिकारियों को हटाकर दक्षिण अफ़्रीका भेज दिया, जहाँ वे कथित रूप से उत्पीड़ित अफ़्रीकानेर समुदाय की मदद कर रहे हैं. अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच अमेरिका ने दक्षिण अफ़्रीका से 7,727 "शरणार्थी" लिए — और बाक़ी पूरी दुनिया से तीन. 10,000 और श्वेत दक्षिण अफ़्रीकियों के आने की तैयारी है, जिनकी प्रक्रिया पर सरकारी अनुमान के मुताबिक़ 10 करोड़ डॉलर ख़र्च होंगे. यूएसएड के ख़ात्मे के बाद 70 साल में 4 अरब से ज़्यादा लोगों को खाना पहुँचाने वाले "फ़ूड फ़ॉर पीस" कार्यक्रम को कृषि विभाग के हवाले कर दिया गया, जहाँ उसका मुख्य मक़सद भूख मिटाना नहीं, अमेरिकी किसानों को सब्सिडी देना होगा. इस साल उसकी सूची में अकाल की कगार पर खड़े सूडान, दक्षिण सूडान और सोमालिया नहीं हैं, अल सल्वाडोर है, जिसके शासक क्रांति के दोस्त हैं.

लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाला पूरा ढाँचा या तो ख़त्म कर दिया गया है या नए मक़सद से जोड़ दिया गया है. वॉयस ऑफ़ अमेरिका और रेडियो फ़्री यूरोप जैसे प्रसारक मुश्किल से बचे हैं. विदेश विभाग की मानवाधिकार रिपोर्ट अब यह संकेत देती है कि जर्मनी अल सल्वाडोर से ज़्यादा दमनकारी है. फ़ुलब्राइट कार्यक्रम के बोर्ड के 12 में से 11 सदस्यों ने पिछले साल इस्तीफ़ा दे दिया, जब विदेश विभाग ने बोर्ड से मंज़ूर क़रीब 200 अमेरिकी शिक्षाविदों की फ़ेलोशिप रद्द कर दीं. एक पूर्व सदस्य ने पीबीएस से कहा कि 80 साल में पहली बार चयन प्रक्रिया में राजनीति घुसाई गई है.

दुनिया का जवाब

नतीजा यह है कि दुनिया विकल्प तलाश रही है. कनाडा ने यूरोपीय संघ के साथ रक्षा समझौता किया है और ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा-तकनीक पर बातचीत कर रहा है — कुछ साल पहले तक यह अकल्पनीय था. यूरोपीय संघ ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं. 2026 की पहली छमाही में 26 वैश्विक नेता चीन गए, जिनमें ब्रिटेन, स्पेन, जर्मनी और कनाडा के प्रधानमंत्री शामिल थे. फ़्रांस की सरकार अपने कंप्यूटरों से विंडोज़, माइक्रोसॉफ़्ट टीम्स और ज़ूम हटाकर ओपन-सोर्स या फ़्रांसीसी विकल्प लगा रही है; डेनमार्क, नीदरलैंड्स और कुछ जर्मन प्रांतीय सरकारें भी यही कर रही हैं. ये बदलाव स्थायी माने जा रहे हैं. फ़्रांस के यूरोप मंत्री के शब्दों में, यूरोप की सुरक्षा हर चार साल में विस्कॉन्सिन के मतदाताओं के हाथ में नहीं छोड़ी जा सकती.

जो सरकारें ख़रीद सकती हैं, वे ख़रीद रही हैं. क़तर ने ट्रंप को 40 करोड़ डॉलर का जंबो जेट यूँ ही दोस्ती में नहीं दिया. सऊदी सार्वजनिक निवेश कोष ने जेरेड कुशनर के निजी इक्विटी फ़ंड में 2 अरब डॉलर सद्भावना में नहीं लगाए. अमीराती शाही परिवार के शेख़ तहनून बिन ज़ायद अल नह्यान ने ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी 50 करोड़ डॉलर में ख़रीदी; कुछ महीने बाद प्रशासन ने यूएई को वे हाई-टेक चिप ख़रीदने की इजाज़त दे दी जिन पर बाइडन प्रशासन ने रोक लगाई थी. यूरोपीय, कनाडाई और ऑस्ट्रेलियाई इस दौड़ में शामिल नहीं हो सकते, क्योंकि उनके यहाँ यह ग़ैरक़ानूनी है.

और आख़िर में, एक लाल कार्ड

लेख के अंत में ऐपलबॉम इस गर्मी की एक छोटी-सी घटना का ज़िक्र करती हैं. अमेरिकी स्ट्राइकर फ़ोलारिन बलोगन को लाल कार्ड मिला था, जिससे वे बेल्जियम के ख़िलाफ़ अगले मैच से बाहर हो जाते. ट्रंप ने फ़ीफ़ा अध्यक्ष जियानी इन्फ़ैंतिनो को फ़ोन कर समीक्षा के लिए कहा. फ़ीफ़ा ने प्रतिबंध हटा दिया. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि वे खेल से प्रेम करते हैं, अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं.

प्रतिक्रिया तत्काल और अंतरराष्ट्रीय थी — इसलिए नहीं कि अमेरिकी टीम ने कुछ ग़लत किया था, बल्कि इसलिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने मान लिया कि उन्हें नियम तोड़ने की छूट है. नॉर्वे के फ़ुटबॉल संघ के प्रमुख ने नैतिकता की शिकायत दर्ज कराई कि इस तरह नियम मोड़ने से पूरा खेल ख़तरे में पड़ जाता है. ब्रिटिश पत्रकार ह्यूगो रिफ़काइंड ने लिखा कि वे ख़ुद हैरान थे कि बेल्जियम की जीत में उनकी इतनी दिलचस्पी हो गई है. पूर्व इतालवी प्रधानमंत्री एनरिको लेत्ता ने कहा कि इतालवी, फ़्रांसीसी और डच तक बेल्जियम के साथ थे. अमेरिका बेल्जियम से बुरी तरह हारा.

ऐपलबॉम का सवाल यहीं से निकलता है. दशकों तक अमेरिकी ख़ुद को लोकतंत्र, आज़ादी और मुक्त व्यापार का प्रतिनिधि मानते रहे, यह मानते रहे कि उनके सहयोगी हैं और वे तानाशाहों तथा अपने ही लोगों को लूटने वाले नेताओं के ख़िलाफ़ हैं. अब जब यह सब नहीं रहा, तो होगा क्या.

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